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Tim Cook: 28 साल में बनाया $4 ट्रिलियन का साम्राज्य, जानिए डूबते Apple की नैया पार लगाने वाले शख्स की कहानी
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Wed, 10 Jun 2026 10:25 PM IST
सार
Tim Cook's 28-Year Journey At Apple: एपल को 4 लाख करोड़ डॉलर के ऐतिहासिक शिखर पर पहुंचाने वाले दिग्गज सीईओ टिम कुक का 28 साल का सफर अब समाप्त हो रहा है। स्टीव जॉब्स के एक बुलावे पर डूबती एपल को संभालने वाले टिम कुक की इस इनसाइड स्टोरी में जानिए कि कैसे उन्होंने कंपनी की पूरी सप्लाई चेन को बदलकर उसे दुनिया का सबसे बड़ा ब्रांड बना दिया।
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टिम कुक
- फोटो : एआई जनरेटेड
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बात साल 1998 की है। कॉर्पोरेट जगत में कॉम्पैक (Compaq) उस वक्त कंप्यूटर बनाने वाली दुनिया की सबसे धाकड़ कंपनियों में से एक थी। उसी कंपनी में कॉर्पोरेट मैटेरियल्स के वाइस प्रेसिडेंट की एक बेहद सुरक्षित और आलीशान नौकरी छोड़कर एक 37 साल का शख्स उस एपल (Apple) का हाथ थामने चल दिया, जो उस दौर में लगभग दिवालिया होने की कगार पर खड़ी थी।
टिम कुक
- फोटो : एएनआई (फाइल)
एपल में आने से पहले कहां थे टिम कुक?
- टिम कुक के एपल में आने से पहले के सफर को देखें, तो उन्होंने ड्यूक यूनिवर्सिटी से एमबीए और ऑबर्न यूनिवर्सिटी से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया था। एपल जॉइन करने से पहले वह आईबीएम (IBM) जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में पूरे 12 साल बिता चुके थे, जहां वे नॉर्थ अमेरिकन फुलफिलमेंट के डायरेक्टर का पद संभाल रहे थे। इसके बाद उन्होंने इंटेलिजेंट इलेक्ट्रॉनिक्स में भी अपना हुनर दिखाया और फिर कॉम्पैक पहुंचे।
- कॉम्पैक में उन्हें काम करते हुए अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ था कि स्टीव जॉब्स ने उन्हें एक इंटरव्यू के लिए बुलाया। वह मुलाकात महज एक इंटरव्यू नहीं थी, बल्कि उसने टेक इतिहास का रुख ही बदल दिया। कुक ने अपनी जमी-जमाई नौकरी छोड़ एपल के उस अनिश्चित भविष्य में छलांग लगाने का एक ऐसा साहसी फैसला लिया, जिसने सबको हैरान कर दिया।
पर्दे के पीछे रहकर बदली काम करने की पूरी रफ्तार
- फोटो : apple
पर्दे के पीछे रहकर बदली काम करने की पूरी रफ्तार
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साल 1998 में जब टिम कुक ने एपल में कदम रखा, तो उन्हें ऑपरेशंस का सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बनाया गया। उस दौर में एपल के पास खुद के बड़े-बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हुआ करते थे, जो कंपनी के लिए एक बड़ा सफेद हाथी साबित हो रहे थे।
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कुक ने कमान संभालते ही सबसे पहले कंपनी के काम करने के पूरे ढर्रे को बदल कर रख दिया। उन्होंने इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग यानी खुद सामान बनाने के कारखाने बंद कर दिए और चीन के बड़े असेंबली पार्टनर्स के साथ कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग की एक नई शुरुआत की।
- इस मास्टरस्ट्रोक की वजह से एपल को बाजार की मांग के हिसाब से ढलने की गजब की आजादी मिल गई और गोदामों में सामान डंप रखने का झंझट हमेशा के लिए खत्म हो गया। कुक ने सप्लायर्स के साथ बेहद कड़े मोलभाव किए, जिससे एपल के प्रोडक्ट्स को बनाने की लागत में भारी कमी आई और पूरी सप्लाई चेन पर कंपनी का एकछत्र नियंत्रण स्थापित हो गया।
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जब स्टीव जॉब्स ने कुक को बनाया CEO
- फोटो : एआई जनरेटेड
जब स्टीव जॉब्स ने कुक को बनाया CEO
- पर्दे के पीछे रहकर कंपनी की किस्मत बदलने वाले टिम कुक के इस शानदार काम को देखते हुए साल 2005 में उन्हें एपल का चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) बना दिया गया। अब वह सीधे स्टीव जॉब्स को रिपोर्ट कर रहे थे और उनके जिम्मे ग्लोबल सेल्स, मैन्युफैक्चरिंग और मैकिन्टोश डिवीजन की पूरी देखरेख थी।
- साल 2011 आते-आते जब एपल के सबसे बड़े चेहरे स्टीव जॉब्स की सेहत लगातार बिगड़ने लगी, तो उन्होंने अगस्त 2011 में सीईओ पद से इस्तीफा देने का मन बनाया। इस्तीफा देते वक्त जॉब्स ने खुद एपल के बोर्ड के सामने टिम कुक का नाम रखते हुए कहा था कि कुक ही उनके सबसे योग्य उत्तराधिकारी हैं। इसके तुरंत बाद टिम कुक आधिकारिक तौर पर एपल के नए कप्तान बन गए।
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348 बिलियन डॉलर से 4 ट्रिलियन डॉलर तक का सफर
- फोटो : X
348 बिलियन डॉलर से 4 ट्रिलियन डॉलर तक का सफर
- जब कुक ने साल 2011 में बागडोर अपने हाथ में ली, तब एपल की मार्केट वैल्यू करीब 348 बिलियन डॉलर थी। उस वक्त बाजार के बड़ी-बड़ी हस्तियों और आलोचकों का मानना था कि स्टीव जॉब्स जैसी जादुई शख्सियत के बिना एपल ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगी। लेकिन शांत स्वभाव के टिम कुक ने अपनी बेजोड़ सूझबूझ और बिजनेस करने के हुनर से सभी को गलत साबित कर दिया।
- उनकी लीडरशिप में कंपनी की मार्केट वैल्यू में जो उछाल आया, उसने इतिहास रच दिया। अक्टूबर 2025 में एपल ने 4 ट्रिलियन (4 लाख करोड़ डॉलर) के उस जादुई और ऐतिहासिक आंकड़े को छू लिया, जिसकी कल्पना कभी किसी ने नहीं की थी।