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Coolers: एयर कूलर को घटिया रेटिंग क्यों दे रहे ग्राहक, क्या कंपनियां बेच रही हैं कबाड़ या हम ही कर रहे गलती?
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Wed, 20 May 2026 01:32 PM IST
सार
Air Coolers Bad Rating: ऑनलाइन किसी भी कंपनी के एयर कूलर को उठाकर देख लीजिए। आपको 3 स्टार रेटिंग वाले कूलर्स की भरमार दिखेगी। शायद ही कोई कूलर दिखे जिसे 4 या उससे अधिक रेटिंग मिली हो। बड़े-बड़े ब्रांड्स के महंगे कूलर भी ग्राहकों को पसंद नहीं आ रहे। कम रेटिंग देखकर नए ग्राहक भी दुविधा में पड़ जाते हैं। कस्टमर रिव्यू को देखें तो ज्यादातर ग्राहकों का कहना है कि कूलर की कूलिंग पसंद नहीं आ रही या कम है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कंपनियां खराब कूलर्स बना रही हैं, या हमें उसे ठीक से इस्तेमाल करना नहीं आता। आखिर माजरा क्या है? आइए जानने की कोशिश करते हैं।
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ऑनलाइन बिकने वाले कूलरों को मिल रही है खराब रेटिंग
- फोटो : एआई जनरेटेड
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गर्मी शुरू होती है और आप नया कूलर घर ले आते हैं। लेकिन कूलर आपकी उम्मीदों में खरा नहीं उतरता। आजकल कई लोग शिकायत कर रहे हैं कि कूलर ठीक से कूलिंग नहीं कर रहा और उमस पैदा कर रहा है। तो कई लोग कूलर की शोर से परेशान हैं। ऑनलाइन शापिंग प्लेटफॉर्म्स पर कूलर के बारे में सर्च करने पर पता चलता है कि ज्यादातर की रेटिंग 3 स्टार या उससे भी कम है। बड़े-बड़े ब्रांड्स के महंगे और फीचर्स से भरपूर कूलर को भी लोग कम रेटिंग दे रहे हैं। आखिर ऐसा क्यों है? क्या अब कंपनियां घटिया कूलर बनाने लगी हैं, या फिर हम ही इन्हें गलत तरीके से चला रहे हैं? आइए जानते हैं कि अच्छे ब्रांड्स के कूलर भी आज लोगों को क्यों पसंद नहीं आ रहे हैं।
समझिए कूलर का विज्ञान
हम ये बताएं कि कूलर से लोगों का क्यों मोहभंग हो रहा है, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि एयर कूलर एसी का विकल्प नहीं है। इसमें कोई कंप्रेसर या रेफ्रिजरेंट गैस नहीं होती। यह वाष्पीकरण (Evaporative Cooling) के सिद्धांत पर काम करता है। यानी यह गर्म हवा को पानी से भीगे पैड्स के बीच से खींचता है। जब पानी भाप बनता है, तो वह गर्मी सोख लेता है और कमरे में ठंडी हवा फेंकता है। जब यह प्रक्रिया फेल हो जाती है, तो लोग कूलर पर अपना गुस्सा उतारने लगते हैं। इसी वजह से ऑनलाइन साइट्स पर कम रेटिंग और गुस्से भरे रिव्यू आते हैं। आइए जानते हैं कूलर हमेशा आपकी उम्मीदों पर खरा क्यों नहीं उतरता।
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उमस कमरे को बना देती है गैस चैंबर
- फोटो : एआई जनरेटेड
1. सबसे बड़ी समस्या है उमस
कूलर तभी बेहतर तरीके से काम करता है जब गर्मी सूखी हो। गर्म हवा कूलर के पैड्स से तेजी से नमी सोखती है, जिससे हवा ठंडी हो जाती है और कमरे का तापमान तेजी से गिरता है। लेकिन ये उलट हो जाता है जब गर्मी उमस भरी होती है। उमस वाली गर्मी में हवा में पहले से ही नमी होती है। चूंकि, कूलर हवा में नमी बढ़ाने के सिद्धांत पर काम करता है, इसलिए उमस वाली गर्मी में कूलर चलाने से गर्मी और भी बढ़ जाती है और कूलर चलाने का हमें कोई फायदा नहीं मिलता।
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बंद कमरे में कूलर चलाने की गलती न करें
- फोटो : Freepik
2. 'बंद कमरे' वाली गलती
ज्यादातर लोग एसी वाली आदत कूलर पर भी लागू करते हैं। वे ठंडी हवा को रोकने के लिए कमरे के सारे खिड़की-दरवाजे बंद कर देते हैं। हम भूल जाते हैं कि कूलर लगातार हवा में नमी फेंकता है। बंद कमरे में यह उमस तुरंत 100% तक पहुंच जाती है। इससे कूलिंग पूरी तरह रुक जाती है और घुटन महसूस होने लगती है। ऐसा लगता है मानो कमरा 'गैस चैंबर' बन गया हो। ध्यान रखें कि कूलर को हमेशा 'क्रॉस-वेंटिलेशन' (ताजी हवा का आना-जाना) चाहिए। उमस भरी हवा को बाहर निकालने और ताजी हवा अंदर लाने के लिए एक खिड़की या दरवाजा हमेशा खुला रखना चाहिए।
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खारा पानी सबसे बड़ा दुश्मन
- फोटो : Amar Ujala AI
3. खारे पानी की मार
भारत के कई शहरों का पानी खारा होता है। इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है। जब यह खारा पानी कूलर के हनीकॉम्ब पैड्स पर सूखता है, तो यह सफेद रंग की एक मोटी परत (स्केल) छोड़ देता है। कुछ ही हफ्तों में यह परत पैड्स को चोक कर देती है, जिससे हवा का बहाव रुक जाता है और पानी का पंप टूट जाता है। जो कूलर पहले दिन शानदार हवा दे रहा था, वह 30 दिन बाद खारे पानी की वजह से हांफने लगता है।
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कूलर की मेंटेनेंस को न करें इग्नोर
- फोटो : एआई जनरेटेड
4. बदबू और मच्छरों का अड्डा
एयर कूलर बहुत ज्यादा मेंटेनेंस मांगते हैं। अगर आप हर कुछ दिन में टैंक का पानी निकालकर उसे साफ नहीं करते, तो वह रुका हुआ पानी काई, बैक्टीरिया और मच्छरों के पैदा होने की जगह बन जाता है। फिर जैसे ही आप कूलर चालू करते हैं, पूरे कमरे में किसी गंदे तालाब जैसी सड़ांध फैल जाती है। कई निराश ग्राहक अपने रिव्यू में लिखते हैं कि उनके कूलर से 'गंदे नाले जैसी बदबू' आती है।
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