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अमर उजाला संवाद 2026: क्या एआई के पास होगी इंसानों जैसी भावनाएं? कैसा होगा भविष्य, संवाद में हुई चर्चा

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Tue, 19 May 2026 05:54 PM IST
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सार

लखनऊ में आयोजित 'अमर उजाला संवाद उत्तर प्रदेश 2026' के दूसरे दिन "भविष्य की दुनिया: एआई और इंसान" विषय पर चर्चा करने के लिए कवि और फिल्म गीतकार आलोक श्रीवास्तव, S45 एआई के फाउंडर अमन सिंह और इंटेलिमो एआई के फाउंडर सौरव शामिल हुए।

amarujala samvad 2026 future with ai and humans topic discussed
अमर उजाला संवाद 2026 में हुए एआई पर चर्चा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आज एआई की चर्चा चारों तरफ है। घर से लेकर आफिस तक में एआई हमारे काम करने के तौर तरीकों को बदल रहा है। आज एआई कई काम इंसानों से कई गुना तेज और बेहतर तरीके से कर सकता है। इतना ही नहीं, एआई हमारे सोचने-समझने और प्रतिक्रिया करने के भी तरीकों को बदल रहा है। ऐसे में एआई का असर केवल नौकरियों तक ही सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह हमें भावनात्मक रूप से भी बदल रहा है। एआई के साथ इंसानों की कैसी भविष्य की कल्पना की जा सकती है, इसपर अमर उजाला संवाद 2026 में विस्तार से चर्चा हुई।
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लखनऊ में आयोजित 'अमर उजाला संवाद उत्तर प्रदेश 2026' के दूसरे दिन "भविष्य की दुनिया: एआई और इंसान" विषय पर चर्चा करने के लिए कवि और फिल्म गीतकार आलोक श्रीवास्तव, S45 एआई के फाउंडर अमन सिंह और इंटेलिमो एआई के फाउंडर सौरव शामिल हुए।
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एआई डेटा देता है, लेखक जिंदगी: आलोक श्रीवास्तव
कवि और फिल्म गीतकार आलोक श्रीवास्तव ने कहा,  "एआई भावनाओं को नहीं समझ सकता। एआई ने प्यार नहीं किया, जीवन में संघर्ष नहीं किया। उन्होंने कहा कि एआई डेटा देता है, लेकिन लेखक जिंदगी देता है। कवि आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि एआई भावनाओं से भरी कविताएं नहीं लिख सकता।
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एआई से डरें नहीं, इसे अपनाएं: अमन सिंह
S45 AI के फाउंडर अमन सिंह ने बताया कि एआई से डरने के बजाय हमें उसे एडॉप्ट करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि जो एआई को अपना रहे हैं, वे अपने करियर में ज्यादा तरक्की कर रहे हैं।

एआई से विकसित भारत का सपना होगा पूरा: सौरव गुप्ता
इंटेलिमो एआई के फाउंडर सौरव गुप्ता ने एआई पर अपने नजरिए को मंच पर रखते हुए कहा कि एआई से नौकरी जाने का सवाल ही क्यों उठता है। हमें ये सवाल करना चाहिए कि एआई को हम अपने काम में यूज कैसे करेंगे। उन्होंने कहा कि जब एटीएम मशीनें आईं थी तो बैंक कर्मचारी इसी तरह डर रहे थे। लेकिन आज देखा जाए तो तकनीक ने हमारा काम आसान कर दिया है। अब हमें पैसे निकालने के लिए बैंक की लंबी लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ता। उन्होंने कहा कि युवाओं को एआई को एक डर नहीं बल्कि एक अवसर के रूप में देखना चाहिए। सौरव ने बताया कि एआई की मदद से आज एक औसत कोडर मेटा और गूगल में काम करने वाले कोडर के जितना कमाई कर रहा है।
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