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Health Insurance: किन परिस्थितियों में इंश्योरेंस क्लेम हो जाता है रिजेक्ट? ज्यादातर मामलों होते हैं ये कारण

यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Wed, 24 Jun 2026 08:18 PM IST
सार

Pre Existing Disease Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय अक्सर कुछ लोग ये गलती करते हैं कि अपनी पुरानी बीमारियों को छुपा लेते हैं। अधिकतर लोग अपने प्रीमियम को कम करने के लिए ऐसा करते हैं, मगर जब बाद में चेकअप में पता चलता है तो आपका सारा प्रीमियम भरा हुआ खराब हो जाता है और क्लेम भी रिजेक्ट हो जाता है। आइए इसी को समझते हैं।

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Health Insurance Claim Rejection Reasons: Why Insurance Companies Reject Your Claim
क्लेम रिजेक्ट होने के कारण - फोटो : AI

Health Insurance Claim Rejection: आज के दौर में हेल्थ इंश्योरेंस (स्वास्थ्य बीमा) किसी भी परिवार के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह होता है, जो बीमारी के समय आर्थिक तंगी से बचाता है। मगर कई बार अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद जब क्लेम रिजेक्ट (खारिज) हो जाता है, तो मरीज और उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है। 



अमूमन लोग इसके लिए सीधे बीमा कंपनियों को दोष देते हैं, लेकिन असल में इसके पीछे पॉलिसी लेते समय की गई कुछ छोटी-छोटी गलतियां और नियम होते हैं। आइए इस लेख में समझते हैं कि किन आम वजहों से आपका हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम फंस या रिजेक्ट हो सकता है।

Health Insurance Claim Rejection Reasons: Why Insurance Companies Reject Your Claim
पुरानी बीमारी को छुपाना - फोटो : Adobe stock

पुरानी बीमारी को छुपाना

  • पॉलिसी खरीदते समय अक्सर लोग अपने प्रीमियम को कम करने के लिए पुरानी बीमारियों को छुपा लेते हैं। 
  • अगर आप अपनी किसी पुरानी बीमारी (जैसे शुगर, बीपी या थायराइड) की जानकारी कंपनी को नहीं देते हैं, तो इसे धोखाधड़ी माना जाता है।
  • इलाज के दौरान जब डॉक्टर की रिपोर्ट से पता चलता है कि यह बीमारी पुरानी है, तो बीमा कंपनी क्लेम को तुरंत खारिज कर देती है।
  • देखा जाए तो क्लेम रिजेक्ट होने सबसे आम कारण यही होता है, इसलिए कभी भी पॉलिसी लेते समय सब सही जानकारी देनी चाहिए।
Health Insurance Claim Rejection Reasons: Why Insurance Companies Reject Your Claim
वेटिंग पीरियड के नियम न जानना - फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी

वेटिंग पीरियड के नियम न जानना

  • हेल्थ इंश्योरेंस लेते ही पहले दिन से सभी बीमारियों का खर्च नहीं मिलता। इसलिए कुछ खास नियम होते है जो अलग पॉलिसी के शर्तों के हिसाब से बदल सकते हैं।
  • आमतौर पर मोतियाबिंद, पथरी या हर्निया जैसी बीमारियों के लिए 2 से 4 साल का शुरुआती समय तय होता है।
  • अगर आप इस तय समय के पूरा होने से पहले इन बीमारियों के इलाज का क्लेम करते हैं, तो कंपनी उसे रिजेक्ट कर देगी।
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इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट - फोटो : Adobe Stock

अस्पताल में भर्ती होने और सूचना देने में देरी

  • ज्यादातर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में क्लेम पाने के लिए मरीज का अस्पताल में कम से कम 24 घंटे लगातार भर्ती रहना कानूनी रूप से जरूरी होता है।
  • अस्पताल में भर्ती होने के तुरंत बाद (आमतौर पर 24 से 48 घंटे के भीतर) बीमा कंपनी को इसकी सूचना देना जरूरी है, देरी होने पर क्लेम रुक जाता है।
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इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट - फोटो : Adobe Stock
पॉलिसी का लैप्स होना और नेटवर्क से बाहर इलाज
  • अगर आपने अपने हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम समय पर नहीं भरा है और ग्रेस पीरियड भी खत्म हो गया है, तो पॉलिसी लैप्स (बंद) हो जाती है।
  • इसके अलावा कैशलेस सुविधा का लाभ उठाने के लिए कंपनी के नेटवर्क अस्पतालों में ही जाना चाहिए। नॉन-नेटवर्क अस्पताल में जाने पर आपको पूरा पैसा खुद देना होता है, हालांकि अधिकतर पॉलिसी में आप इसे रिम्बर्समेंट करवा सकते हैं।
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