{"_id":"69a11d7cd23fc062a905b5c6","slug":"leap-day-importance-what-is-leap-year-know-the-reason-behind-leap-year-in-hindi-2026-02-27","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"What Is Leap Year: अगर 29 फरवरी न हो तो क्या होगा? जानें लीप ईयर के पीछे की असली वजह","category":{"title":"Utility","title_hn":"जरूरत की खबर","slug":"utility"}}
What Is Leap Year: अगर 29 फरवरी न हो तो क्या होगा? जानें लीप ईयर के पीछे की असली वजह
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Fri, 27 Feb 2026 10:18 AM IST
सार
Leap Year Importance: इस साल फरवरी का महीना 28 दिन का है। ऐसे में एक न एक बार आपके मन में भी ये ख्याल आया होगा कि आखिर इस साल 29 फरवरी क्यों नहीं है। यहां हम आपको बताएंगे इसके पीछे की वजह कि आखिर 29 फरवरी कब और क्यों पड़ती है?
विज्ञापन
इस साल क्यों नहीं है 29 फरवरी?
- फोटो : अमर उजाला
What Is Leap Year: इस साल फरवरी का महीना 28 दिन का है। ऐसा इसलिए क्योंकि लीप ईयर हर चार साल में एक बार आता है और उस साल फरवरी में 29 तारीख होती है। यह दिन बाकी वर्षों से अलग इसलिए खास माना जाता है। कई लोग इसे सिर्फ कैलेंडर का एक अतिरिक्त दिन समझते हैं, लेकिन इसका महत्व इससे कहीं ज्यादा है।
Trending Videos
इस साल क्यों नहीं है 29 फरवरी?
- फोटो : Adobe stock
लीप ईयर की वजह क्या है?
असल में पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में 365 दिन नहीं बल्कि लगभग 365.2422 दिन लगते हैं। यानी हर साल 365 दिनों के साथ लगभग 6 घंटे बचते रहते हैं। अगर हर चार साल में यह अतिरिक्त समय कैलेंडर में न जोड़ा जाए, तो धीरे-धीरे हमारी तारीखें मौसम से पीछे चलने लगेंगी। इसे संतुलित करने के लिए हर चार साल में एक दिन यानी 29 फरवरी जोड़ा जाता है।
असल में पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में 365 दिन नहीं बल्कि लगभग 365.2422 दिन लगते हैं। यानी हर साल 365 दिनों के साथ लगभग 6 घंटे बचते रहते हैं। अगर हर चार साल में यह अतिरिक्त समय कैलेंडर में न जोड़ा जाए, तो धीरे-धीरे हमारी तारीखें मौसम से पीछे चलने लगेंगी। इसे संतुलित करने के लिए हर चार साल में एक दिन यानी 29 फरवरी जोड़ा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस साल क्यों नहीं है 29 फरवरी?
- फोटो : Adobe stock
अगर 29 फरवरी न हो तो क्या होगा?
अगर लीप डे न जोड़ा जाए तो समय के साथ मौसम और कैलेंडर के बीच अंतर बढ़ेगा। जिसकी वजह से त्योहार फसल बोने और काटने का समय गड़बड़ा सकता है। इसके कारण ही लंबे समय में दिसंबर में गर्मी और जून में सर्दी जैसी असंगत स्थिति बन सकती है।
अगर लीप डे न जोड़ा जाए तो समय के साथ मौसम और कैलेंडर के बीच अंतर बढ़ेगा। जिसकी वजह से त्योहार फसल बोने और काटने का समय गड़बड़ा सकता है। इसके कारण ही लंबे समय में दिसंबर में गर्मी और जून में सर्दी जैसी असंगत स्थिति बन सकती है।
इस साल क्यों नहीं है 29 फरवरी?
- फोटो : Adobe stock
लीप ईयर के गणना का नियम क्या है?
हर चार साल में लीप ईयर आता है, लेकिन सटीक गणना के लिए जो साल 100 से विभाजित होते हैं वे लीप ईयर नहीं होते। जबकि 400 से विभाजित साल लीप ईयर माने जाते हैं। इससे कैलेंडर और पृथ्वी की परिक्रमा के बीच संतुलन बना रहता है।
हर चार साल में लीप ईयर आता है, लेकिन सटीक गणना के लिए जो साल 100 से विभाजित होते हैं वे लीप ईयर नहीं होते। जबकि 400 से विभाजित साल लीप ईयर माने जाते हैं। इससे कैलेंडर और पृथ्वी की परिक्रमा के बीच संतुलन बना रहता है।
विज्ञापन
इस साल क्यों नहीं है 29 फरवरी?
- फोटो : Adobe stock
इस साल नहीं तो अब कब है लीप ईयर?
आपको बता दें कि वर्ष 2020 में लीप ईयर में आया था, जिसके चार साल बाद यानी 2024 में लीप ईयर था। वहीं अब अगला लीप ईयर 2028 में आएगा।