रात को सोते समय सिर के नीचे रखा तकिया कुछ समय बाद अजीब सी गंध देने लगे तो इसे नजरअंदाज न करें। कई बार लोग बदबू आते ही तकिए को पानी में डालकर धो देते हैं, लेकिन असली वजह समझे बिना ऐसा करने से परेशानी फिर लौट सकती है। खासकर गर्मी और उमस के मौसम में तकिए से गंध आने की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। तो आज की इस खबर में हम आपको इसी खबर के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
रातभर सिर के नीचे रहने वाला तकिया दे रहा है गंध? घर की ये छोटी गलती पड़ सकती है भारी
Pillow Start Smelling Bad: तकिए से अजीब गंध आने लगे तो सिर्फ उसे धो देना ही काफी नहीं है। पसीना, बालों का तेल, नमी और तकिए के अंदर जमा गंदगी इसकी बड़ी वजह हो सकती है। जानिए बदबू क्यों आती है और तकिया साफ करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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सिर का पसीना और तेल भी बन सकता है वजह
सोते समय सिर और गर्दन से पसीना निकलता है। इसके अलावा बालों और त्वचा से निकलने वाला तेल भी धीरे-धीरे तकिए के कवर और अंदर की रूई तक पहुंच सकता है। अगर तकिए का कवर लंबे समय तक नहीं बदला जाए तो इसमें पसीने और तेल की गंध जमा होने लगती है। यही वजह है कि तकिया बाहर से साफ दिखने के बावजूद बदबू दे सकता है।
नमी को हल्के में न लें
अगर कमरा ज्यादा नम रहता है या तकिया इस्तेमाल के बाद ठीक से सूख नहीं पाता तो उसमें सीलन जैसी गंध आ सकती है। गीले या नम तकिए को लगातार इस्तेमाल करने से उसकी भराव सामग्री के अंदर भी नमी बनी रह सकती है। ऐसी स्थिति में सिर्फ ऊपर से कवर बदलने से गंध पूरी तरह खत्म नहीं होती।
बालों में लगाए जाने वाले उत्पाद भी पहुंचते हैं तकिए तक
बालों में तेल, सीरम या दूसरे उत्पाद लगाने के बाद सीधे तकिए पर सोने से इनकी कुछ मात्रा कपड़े में लग सकती है। रोज ऐसा होने पर तकिए में अलग तरह की गंध आने लगती है। इसलिए बालों में ज्यादा तेल लगाने के तुरंत बाद तकिए पर सोने से बचना बेहतर है।
सिर्फ कवर धोने से काम नहीं चलेगा
अगर बदबू तकिए के अंदर तक पहुंच गई है तो केवल कवर धोने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। कवर को नियमित रूप से धोने के साथ तकिए की सफाई भी उसकी सामग्री और निर्माता के बताए तरीके के अनुसार करनी चाहिए। हर तकिए को मशीन में डालकर धोना सही नहीं होता।
तकिए को ऐसे रखें कि बदबू दोबारा न आए
तकिए को इस्तेमाल के बाद कुछ देर हवा लगने दें और उसे गीली जगह पर न रखें। कवर नियमित रूप से बदलें और तकिए को समय-समय पर अच्छी तरह सुखाएं। अगर तकिए में लगातार सीलन की गंध रहे, उसमें फफूंद के निशान दिखें या सफाई के बाद भी बदबू न जाए, तो उसे बदल देना बेहतर हो सकता है।
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