कम बारिश और बढ़ते तापमान से देवभूमि में पहाड़ से लेकर मैदान तक आग ही आग लगी हुई है। पहाड़ों पर जंगल धू धू कर जल रहे हैं तो मैदान में जंगल और गेहूं की खड़ी फसलें जल रही हैं। वहीं वनाग्नि से उत्तरकाशी में दो लोगों की मौत हुई है। उनके परिजनों को चार-चार लाख का मुआवजा एक सप्ताह के अंदर दिया गया है।
देवभूमि में पहाड़ से मैदान तक आग ही आग, तस्वीरें देखें...
इस फायर सीजन में ही वनाग्नि की 107 घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें सबसे ज्यादा गढ़वाल मंडल के जंगल जल रहे हैं। बता दें कि पिछले साल अप्रैल आखिरी सप्ताह से वनाग्नि की घटनाएं शुरू हुई थीं। मुख्य वन संरक्षक विधि प्रकोष्ठ के पास प्रदेश में दावाग्नि नियंत्रण की जिम्मेदारी है।
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उधर, लोहाघाट में जंगल की आग बुधवार को अद्वैत आश्रम मायावती के जंगल तक पहुंच गई। पिछले दो दिन से बलांई तथा मानेश्वर के जंगलों में आग धधकी हुई है। वहीं पिथौरागढ़ जिले के भी कई हिस्से दावाग्नि की चपेट में हैं। थल से सटे हजेती के जंगल बुधवार को आग से धधकते रहे। नाचनी, अस्कोट के साथ ही कई जंगल दावाग्नि की चपेट में हैं। बागेश्वर जिले के जंगल भी आग की चपेट में हैं।
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इधर सितारगंज के उकरौली गांव में आग से नौ परिवारों के घरेलू सामान व दुकानों का सामान जलकर राख हो गया। वहीं, नानकमत्ता के बिडौरा गांव में दो लोगों के गेहूं कटे खेत में दोपहर करीब ढाई बजे आग लग गई। तेज हवा से आग ने विकराल रूप ले लिया। आग से कई एकड़ गेहूं की फसल जल गई।
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वन विभाग की दावाग्नि नियंत्रण कार्यक्रम में अमेरिका का सेटेलाइट काफी मददगार साबित हुआ है। सीसीएफ बीपी गुप्ता बताते हैं कि अमेरिका के मोर्डिस सेटेलाइट से काफी सहायता मिल रही है। यह सेटेलाइट दिन में दो बार इलाके के ऊपर से गुजरता है, उसके बाद वह आग के मामले को डिटेक्ट करता है, जिसके बाद फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया के माध्यम से यह जानकारी हमारे पास आती है, जिसके बाद टीमों को आग पर काबू पाने के लिए भेजा जाता है। इसके अलावा स्थानीय स्तर से जो सूचना मिलती है, उसके आधार पर भी कार्रवाई की जाती है।