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Ayman al-Zawahiri: 48 घंटे तक अमेरिका ने दुनिया से क्यों छिपाई जवाहिरी के खात्मे की सच्चाई? पढ़ें पूरी कहानी
Tue, 02 Aug 2022 03:39 PM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Tue, 02 Aug 2022 03:39 PM IST
सार
रविवार की तड़के सुबह 6.18 बज रहे थे। तब अमेरिका में रात के 9 बजकर 48 मिनट हो रहे थे। खैर, काबुल में सोकर उठने के बाद जवाहिरी टहलने के लिए अपनी छत के बालकनी पर निकला। इसी दौरान अमेरिकी जवानों ने ड्रोन से हेलफायर मिसाइल दाग दी।
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ओसामा बिन लादेन के साथ जवाहिरी
- फोटो : अमर उजाला
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अफगानिस्तान का काबुल शहर और यहां का शेरपुर इलाका। शहर के पॉश इलाकों में से एक है। एक के बाद एक लोगों के घर हैं। यहीं रहता था दुनिया का सबसे खूंखार आतंकी और अलकायदा का प्रमुख अल-जवाहिरी। ये वही अल-जवाहिरी था जिसने अमेरिका की सबसे ऊंची इमारत वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को उड़ाने में ओसामा बिन लादेन का साथ दिया था। पिछले दिनों वह भारत को भी धमकी दे चुका था।
अल-जवाहिरी
- फोटो : अमर उजाला
जनवरी से ही पूरे परिवार को ट्रैक कर रहा था अमेरिका
इस साल जनवरी में अमेरिकी खुफिया सूत्रों को पता चला कि अल-जवाहिरी की पत्नी, बेटी और पोते काबुल के एक घर में शिफ्ट हुए हैं। इसके बाद से अमेरिकी जासूस उनके पीछे लग गए। अप्रैल में अमेरिकी सूत्रों को यह साफ हो गया कि काबुल के उसी घर में अल-जवाहिरी भी रहता है। कई तरह से इस जानकारी को अमेरिकी अफसरों ने कंफर्म किया। काबुल में स्थित शेरपुर का ये इलाका काफी पॉश है। ये अफगान डिफेंस मिनिस्ट्री के अंतर्गत आता है। यहां अफगानिस्तान के बड़े अफसरों के घर हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि इसी इलाके में तालिबानी गृह मंत्री और कुख्यात आतंकी सिराजुद्दीन हक्कानी भी रहता है।
इस साल जनवरी में अमेरिकी खुफिया सूत्रों को पता चला कि अल-जवाहिरी की पत्नी, बेटी और पोते काबुल के एक घर में शिफ्ट हुए हैं। इसके बाद से अमेरिकी जासूस उनके पीछे लग गए। अप्रैल में अमेरिकी सूत्रों को यह साफ हो गया कि काबुल के उसी घर में अल-जवाहिरी भी रहता है। कई तरह से इस जानकारी को अमेरिकी अफसरों ने कंफर्म किया। काबुल में स्थित शेरपुर का ये इलाका काफी पॉश है। ये अफगान डिफेंस मिनिस्ट्री के अंतर्गत आता है। यहां अफगानिस्तान के बड़े अफसरों के घर हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि इसी इलाके में तालिबानी गृह मंत्री और कुख्यात आतंकी सिराजुद्दीन हक्कानी भी रहता है।
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन
- फोटो : PTI
फिर क्या हुआ?
जब अमेरिकी अधिकारियों को पूरी तरह विश्वास हो गया कि काबुल स्थित उस घर में अल-जवाहिरी रहता है तो अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने राष्ट्रपति जो बाइडेन से बात की।
इस बीच, सीआईए ने जवाहिरी के घर के बारे में जानकारी जुटाना शुरू कर दिया। घर कैसे बना है। वहां पर आने-जाने के कितने रास्ते हैं। कितने कमरे हैं। जवाहिरी किस कमरे में रहता है। इसके बाद सीआईए ने राष्ट्रपति जो बाइडन को फिर से इसकी ब्रिफिंग दी। पूरी तरह से सबकुछ पुख्ता हो जाने के बाद बाइडेन ने कैबिनेट सदस्यों के साथ बैठक की और पूरे मिशन के बारे में जानकारी दी और तय किया कि ओसामा बिन लादेन की तरह ही जवाहिरी को भी मार गिराया जाएगा।
जब अमेरिकी अधिकारियों को पूरी तरह विश्वास हो गया कि काबुल स्थित उस घर में अल-जवाहिरी रहता है तो अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने राष्ट्रपति जो बाइडेन से बात की।
इस बीच, सीआईए ने जवाहिरी के घर के बारे में जानकारी जुटाना शुरू कर दिया। घर कैसे बना है। वहां पर आने-जाने के कितने रास्ते हैं। कितने कमरे हैं। जवाहिरी किस कमरे में रहता है। इसके बाद सीआईए ने राष्ट्रपति जो बाइडन को फिर से इसकी ब्रिफिंग दी। पूरी तरह से सबकुछ पुख्ता हो जाने के बाद बाइडेन ने कैबिनेट सदस्यों के साथ बैठक की और पूरे मिशन के बारे में जानकारी दी और तय किया कि ओसामा बिन लादेन की तरह ही जवाहिरी को भी मार गिराया जाएगा।
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Joe Biden
- फोटो : @POTUS
फिर अमेरिका ने बनाया प्लान
पूरी जिम्मेदारी सीआईए को दी गई। एक जुलाई को सीआईए के निदेशक विलियम बर्न्स ने व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम में जो बाइडन व अन्य कैबिनेट सदस्यों को प्रस्तावित ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी। इस दौरान बाइडन ने मिशन के बारे में, उसकी सफलता, ऑपरेशन को अंजाम देने के तरीके के बारे में जानकारी ली। इस दौरान अल-जवाहिरी के घर का मॉडल भी बाइडन को दिखाया गया। एक डेमो करके दिखाया गया कि कैसे जवाहिरी को मारना है।
इसके बाद कानूनी स्तर पर भी इस मिशन के बारे में जानकारी ली गई और वरिष्ठ वकीलों को खुफिया रिपोर्ट की जानकारी दी गई। 25 जुलाई को इस मिशन को अंजाम देने के लिए अंतिम बैठक हुई। इसमें राष्ट्रपति जो बाइडन ने सटीक ड्रोन हमले (जिसमें नागरिकों को कम से कम नुकसान हो) की अनुमति दी। 31 जुलाई, रविवार को सीआईए को अल-जवाहिरी घर की बालकनी में दिखा। इसके बाद ड्रोन से हमला कर उसे मार गिराया गया।
पूरी जिम्मेदारी सीआईए को दी गई। एक जुलाई को सीआईए के निदेशक विलियम बर्न्स ने व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम में जो बाइडन व अन्य कैबिनेट सदस्यों को प्रस्तावित ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी। इस दौरान बाइडन ने मिशन के बारे में, उसकी सफलता, ऑपरेशन को अंजाम देने के तरीके के बारे में जानकारी ली। इस दौरान अल-जवाहिरी के घर का मॉडल भी बाइडन को दिखाया गया। एक डेमो करके दिखाया गया कि कैसे जवाहिरी को मारना है।
इसके बाद कानूनी स्तर पर भी इस मिशन के बारे में जानकारी ली गई और वरिष्ठ वकीलों को खुफिया रिपोर्ट की जानकारी दी गई। 25 जुलाई को इस मिशन को अंजाम देने के लिए अंतिम बैठक हुई। इसमें राष्ट्रपति जो बाइडन ने सटीक ड्रोन हमले (जिसमें नागरिकों को कम से कम नुकसान हो) की अनुमति दी। 31 जुलाई, रविवार को सीआईए को अल-जवाहिरी घर की बालकनी में दिखा। इसके बाद ड्रोन से हमला कर उसे मार गिराया गया।
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Joe Biden
- फोटो : वीडियो ग्रैब
मारने के बाद 48 घंटे तक किसी को बताया क्यों नहीं?
हमने ये समझने के लिए विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल से बात की। उन्होंने कहा, 'ड्रोन से हमला करना अमेरिका का बड़ा प्लान था। अफगानिस्तान से सेना हटाने के बाद से अमेरिका की क्षमता पर सवाल खड़े होने लगे थे। कहा जाने लगा था कि अमेरिका अब कमजोर हो रहा है। यही कारण है कि जब जवाहिरी का ठिकाना बाइडेन को मिला तो बिना देर किया उन्होंने उसे मारने का प्लान बना लिया।'
आदित्य आगे कहते हैं, 'चूंकि ये मिशन बहुत बड़ा था। ऐसे में बाइडेन सरकार किसी तरह की चूक नहीं चाहती थी। भले ही उन्होंने ड्रोन हमले में जवाहिरी को रविवार की सुबह ही मार दिया, लेकिन अमेरिकी अफसर हर हाल में इसे पुख्ता करना चाहते थे कि मरने वाला जवाहिरी ही है न। इसके लिए लगातार अमेरिकी खुफिया सूत्र काबुल में लगे रहे। जब ये पुख्ता हो गया कि मरने वाला जवाहिरी ही है, तब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन मीडिया के सामने आए। इसके पहले वह 48 घंटे तक अपने इस ऑपरेशन की सफलता को और अधिक पुख्ता करना चाहते थे। इसके अलावा यह भी देखना चाहते थे कि ऑपरेशन के बाद अफागनिस्तान का क्या रिएक्शन आता है।'
हमने ये समझने के लिए विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल से बात की। उन्होंने कहा, 'ड्रोन से हमला करना अमेरिका का बड़ा प्लान था। अफगानिस्तान से सेना हटाने के बाद से अमेरिका की क्षमता पर सवाल खड़े होने लगे थे। कहा जाने लगा था कि अमेरिका अब कमजोर हो रहा है। यही कारण है कि जब जवाहिरी का ठिकाना बाइडेन को मिला तो बिना देर किया उन्होंने उसे मारने का प्लान बना लिया।'
आदित्य आगे कहते हैं, 'चूंकि ये मिशन बहुत बड़ा था। ऐसे में बाइडेन सरकार किसी तरह की चूक नहीं चाहती थी। भले ही उन्होंने ड्रोन हमले में जवाहिरी को रविवार की सुबह ही मार दिया, लेकिन अमेरिकी अफसर हर हाल में इसे पुख्ता करना चाहते थे कि मरने वाला जवाहिरी ही है न। इसके लिए लगातार अमेरिकी खुफिया सूत्र काबुल में लगे रहे। जब ये पुख्ता हो गया कि मरने वाला जवाहिरी ही है, तब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन मीडिया के सामने आए। इसके पहले वह 48 घंटे तक अपने इस ऑपरेशन की सफलता को और अधिक पुख्ता करना चाहते थे। इसके अलावा यह भी देखना चाहते थे कि ऑपरेशन के बाद अफागनिस्तान का क्या रिएक्शन आता है।'