रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को 61 दिन हो चुके हैं। रूस ने यूक्रेन के कई शहरों को कब्जे में लेकर भारी तबाही मचाई है। इन शहरों से हर रोज दर्दनाक कहानियां सामने आ रही हैं।
आज हम आपको युद्ध क्षेत्र से रूसी सैनिकों की बर्बरता की ऐसी ही पांच कहानियां बताने जा रहे हैं...
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पहली कहानी : गांव से निकलने की इजाजत दी, फिर गोलियां बरसा दीं
यह कहानी यूक्रेन की राजधानी कीव के पूर्वी हिस्से में स्थित प्रेममोहा गांव की है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस गांव में बड़ी संख्या में लोग फंस गए थे। 11 मार्च को रूसी सैनिकों ने लोगों को गांव से निकलने की इजाजत दी। जैसे ही लोग घरों से निकले, रूसी सैनिकों ने धोखे से फायरिंग कर दी। इसमें 14 साल के एलिसी रयाबुकोन की मौत हो गई।
रयाबुकोन की मां एना कहती हैं, 'जैसे ही हम लोग गांव से निकलने लगे, रूसी सैनिकों ने हर तरफ से फायरिंग शुरू कर दी। मैं अपने बच्चों के साथ एक कार में बैठी थी। इसी दौरान फायरिंग शुरू हो गई। हम लोग नीचे छिप गए। खिड़की के पास बैठे अपने छोटे बेटे को मैंने किसी तरह खींच लिया और उसकी जान बच गई, लेकिन बड़े बेटे को नहीं बचा सकी।’
दूसरी कहानी : 10 महीने के बच्चे को लेकर जंग में 17 दिन फंसी रही महिला
ये कहानी यूक्रेनी महिला तत्याना की है। 27 साल की तत्याना अपने दस महीने के बेटे मिशा प्रियमाक के साथ 'लिंबो' में 17 दिन तक फंसी रहीं। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, तत्याना यूक्रेन छोड़कर बाहर निकलना चाहती थीं, लेकिन उनके पास उनके 10 महीने के बेटे का वीजा नहीं था। अधिकारियों ने कहा कि बगैर बच्चे के वीजा के वह दूसरे देश नहीं जा सकतीं। नियमों के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों को भी 'बायोमेट्रिक टेस्ट' से गुजरना पड़ता है। छोटे बच्चों के लिए फिंगर प्रिंट अनिवार्य है। अधिकारियों ने बताया कि बच्चे को यात्रा करने की अनुमति देने में समय लगा। 17 दिन के इंतजार के बाद ही उसे वीजा मिल पाया।
तीसरी कहानी : जब रूसी सैनिकों से भिड़ गई 82 साल की महिला
ये दास्तां यूक्रेन के समुद्री इलाके ओडेसा की रहने वाली मकिशैवा की है। 82 साल की मकिशैवा की एक छोटी सी चिकेन शॉप थी, जिसे रूसी मिसाइल ने तबाह कर दिया। मकिशैवा ने बीबीसी को बताया कि जब रूसी सैनिकों ने यूक्रेन को घेरा और कीव की तरफ बढ़ने लगे तब भी वह नहीं डरीं, लेकिन एक दिन अचानक एक मिसाइल ने उनके घर और दुकान को बर्बाद कर दिया। बमबारी में उनका एक पड़ोसी भी मारा गया। इसके बाद रूसी सैनिक हर रोज उनके एरिया में आने लगे।
मकिशैवा कहती हैं, 'उन (रूसी सैनिकों) लोगों ने सारा घर बर्बाद कर दिया। मुझे बस इतना पता है कि एक मिसाइल आकर गिरा और घर तबाह हो गया।'
वह आगे कहती हैं, 'मैंने मुर्गियों को अपने साथ रखा, क्योंकि मुझे खाने के लिए कुछ चाहिए था। मेरे पास केवल आलू के कुछ भी नहीं है। यहां न पानी है, न गैस। रूसी सैनिक तीन राउंड में आए। पहले राउंड में वो काफी हिंसक थे। एक दिन बहुत सारे सैनिक घर में घुस आए और मुझसे से कहा- 'तहखाने में जाओ। मैंने उनसे कहा 'मुझे मार डालो, लेकिन मैं नहीं जाऊंगी।'
चौथी कहानी : दो दोस्तों के हाथ-पैर काटे, फिर मार दी गोली
ये रूह कंपाने वाली दास्तां है। यूक्रेन की राजधानी कीव के नजदीक एक गांव में दो दोस्त रहते थे। इनके नाम पावेल खोलोदेंको और विक्टर बलाई थे। दोनों साथ पले-बढ़े और सेना में भर्ती हो गए। दोनों की उम्र 28 साल थी।
एक न्यूज चैनल से बात करते हुए दोनों सैनिकों में से एक की मां ने घटना की जानकारी दी। रोते हुए 48 साल की तेतियाना खोलेदेंको ने कहा, 'एक दिन हमारा संपर्क बच्चों से टूट गया। बाद में उनकी लाशें एक जंगल में मिली। उन दोनों पर बहुत ज्यादा टॉर्चर हुए। उनके शरीर का कोई ऐसा अंग नहीं था, जिसको सही छोड़ा गया हो। अंगुलियां, हाथ, टांगें सबकुछ अलग कर दिए गए। पावेल के मुंह में राइफल डालकर गोली मारी गई। यह बहुत ही भयानक रहा होगा।'
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