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11 महिलाओं की टीम पर दांव लगाने वाले प्रधानमंत्री
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Thu, 14 Jun 2018 01:31 PM IST
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स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज 2 जून को जब अपने पद की शपथ ले रहे थे तब उनके जेहन में आठ मार्च को हुए महिला आंदोलन की तस्वीरें ताजा थीं। सांचेज ने अपना मंत्रिमंडल तय किया और मंत्रिमंडल के 17 में से 11 अहम पदों के लिए महिलाओं को चुनकर नया रिकॉर्ड बना दिया।
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महिलाओं के सपनों को मिले नए पंख
सांचेज साल 2014 में सोशलिस्ट पार्टी के मुखिया बने थे। उसके पहले उनका नाम कभी ज्यादा चर्चा में नहीं रहा। सांचेज ने पार्टी को दोबारा सत्ता में लाने का वादा किया था। साल 2015 और 2016 के चुनावों में मिली हार के बाद उन्हें पार्टी की कमान छोड़नी पड़ी लेकिन वो लौटे और भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी पीपुल्स पार्टी के प्रधानमंत्री मारियानो रखॉय के खिलाफअविश्वास प्रस्ताव लाए।
रखॉय हटे और स्पेन की बागडोर सांचेज के हाथ आ गई। सांचेज ने अपनी कैबिनेट के जरिए देश की आधी से ज्यादा आबादी को नए ख्वाब दे दिए।
सांचेज साल 2014 में सोशलिस्ट पार्टी के मुखिया बने थे। उसके पहले उनका नाम कभी ज्यादा चर्चा में नहीं रहा। सांचेज ने पार्टी को दोबारा सत्ता में लाने का वादा किया था। साल 2015 और 2016 के चुनावों में मिली हार के बाद उन्हें पार्टी की कमान छोड़नी पड़ी लेकिन वो लौटे और भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी पीपुल्स पार्टी के प्रधानमंत्री मारियानो रखॉय के खिलाफअविश्वास प्रस्ताव लाए।
रखॉय हटे और स्पेन की बागडोर सांचेज के हाथ आ गई। सांचेज ने अपनी कैबिनेट के जरिए देश की आधी से ज्यादा आबादी को नए ख्वाब दे दिए।
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महिलाओं की मांग का असर
उनके मंत्रिमंडल में महिलाओं के दबदबे पर अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रोफेसर हर्ष पंत कहते हैं, "इसका काफी सांकेतिक महत्व है। मुझे लगता है कि नीचे से एक मांग उठ रही थी कि महिलाओं का इतना कम प्रतिनिधित्व क्यों है, ख़ासकर उन देशों में जहां महिला आंदोलन काफी मजबूत रहे हैं। मुझे लगता है कि इससे सरकार और राजनीतिक तबकों पर दबाव पड़ रहा है और हम इस तरह के बदलाव देख रहे हैं।"
लेकिन, स्पेन में महिलाओं को सरकार में बड़े पैमाने पर प्रतिनिधित्व पहली बार नहीं मिला है। यूरोप की राजनीति पर नजर रखने वाली और पेरिस में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार वैजू नरावने बताती हैं कि सोशलिस्ट पार्टी की सरकारों में महिलाओं को अहमियत मिलती रही है।
उनके मंत्रिमंडल में महिलाओं के दबदबे पर अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रोफेसर हर्ष पंत कहते हैं, "इसका काफी सांकेतिक महत्व है। मुझे लगता है कि नीचे से एक मांग उठ रही थी कि महिलाओं का इतना कम प्रतिनिधित्व क्यों है, ख़ासकर उन देशों में जहां महिला आंदोलन काफी मजबूत रहे हैं। मुझे लगता है कि इससे सरकार और राजनीतिक तबकों पर दबाव पड़ रहा है और हम इस तरह के बदलाव देख रहे हैं।"
लेकिन, स्पेन में महिलाओं को सरकार में बड़े पैमाने पर प्रतिनिधित्व पहली बार नहीं मिला है। यूरोप की राजनीति पर नजर रखने वाली और पेरिस में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार वैजू नरावने बताती हैं कि सोशलिस्ट पार्टी की सरकारों में महिलाओं को अहमियत मिलती रही है।
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वो कहती हैं, "हमने ये देखा है कि जब होजे लुइस जपातेरो सोशलिस्ट पार्टी की ओर से स्पेन के प्रधानमंत्री बने थे, तब उन्होंने भी काफी सारी औरतों को बहुत बड़े पदों पर नामित किया था। तब स्पेन में पहली बार एक महिला (कारमैन चकोन) रक्षामंत्री थीं।"
बिना बाइबिल के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले पेद्रो सांचेज
जपातेरो की कैबिनेट में 50 फीसदी महिलाएं थीं जबकि सांचेज ने उनसे 11 फीसद ज्यादा महिलाओं को जगह देकर नया रिकॉर्ड बना दिया है। महिलाओं को कैबिनेट में बराबरी की जगह देने वाले कनाडा, स्वीडन और फ्रांस जैसे देशों से स्पेन काफी आगे निकल गया है।
वैजू नरावने कहती हैं, "यूरोप में जो देश सबसे ज़्यादा प्रगतिशील कहे जाते हैं, उनमें औरतों को आगे लाने की सोच दिखती है। लेकिन अगर इस मामले में हम अमरीका समेत बाक़ी देशों की तरफ देखें तो वो काफी पीछे रह गए हैं।"
बिना बाइबिल के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले पेद्रो सांचेज
जपातेरो की कैबिनेट में 50 फीसदी महिलाएं थीं जबकि सांचेज ने उनसे 11 फीसद ज्यादा महिलाओं को जगह देकर नया रिकॉर्ड बना दिया है। महिलाओं को कैबिनेट में बराबरी की जगह देने वाले कनाडा, स्वीडन और फ्रांस जैसे देशों से स्पेन काफी आगे निकल गया है।
वैजू नरावने कहती हैं, "यूरोप में जो देश सबसे ज़्यादा प्रगतिशील कहे जाते हैं, उनमें औरतों को आगे लाने की सोच दिखती है। लेकिन अगर इस मामले में हम अमरीका समेत बाक़ी देशों की तरफ देखें तो वो काफी पीछे रह गए हैं।"
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संयुक्त राष्ट्र की ओर से दुनिया भर की सरकारों पर एक रिपोर्ट तैयार की गई जिसे जनवरी 2017 में जारी किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक उस वक्त किसी भी देश की कैबिनेट में 52।9 फीसदी से ज्यादा महिलाएं नहीं थीं। सिर्फ छह ऐसे देश थे जिनके मंत्रिमंडल में पचास फीसदी या उससे ज्यादा महिलाएं थीं और तेरह ऐसे देश थे जिनके मंत्रिमंडल में कोई महिला ही नहीं थी।
स्पेन में महिला दिवस के मौके पर लाखों औरतों ने सड़क पर उतरकर लैंगिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई थी।
स्पेन में महिला दिवस के मौके पर लाखों औरतों ने सड़क पर उतरकर लैंगिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई थी।