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प्रेम जिंदगी का अहम हिस्सा होता है। प्रेम एक ऐसा अहसास है जो जीवन को सकारात्मक बनाता है। हम सबने किसी ना किसी से प्रेम किया होगा। इसी अहसास को जीवंत करने के उद्देश्य से हम आपके लिए लेकर आए हैं खास शो मोहब्बतें...

Love Story : न राधा न रुकमणि

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सभी 46 एपिसोड

न राधा न रुकमणि

ओमा के मुख

11 September 202211 mins 15 secs

Love Story : अंगूठी भाग-2

ओमा के मुख से अमरकांत का नाम सुनकर माली और मालिन के चेहरे का रंग लगभग उड़ ही गया था, नौकर इस घटना के बाद से ही एक हफ़्ते की छुट्टी पर चले गए और माली दंपत्ति के साथ बृजेश और ओमा लगभग अकेले रह  गए थे...

बृजेश

4 September 20226 mins 31 secs

Love Story : अंगूठी भाग-1

ओमा और बृजेश जब यहां रहने आए कोठी का हर कर्मचारी उन्हें ऐसे देख रहा था मानों वे कोई अनिष्ट करने जा रहे हों. चौकीदार सकते में आ गया था, माली के खरपतवार काटते, उखाड़ते हाथ क्षण भर को रुक गए थे...

रति रवि से नाराज़

28 August 20223 mins 16 secs

Love Story : नाराज़गी

 रति रवि से नाराज़ थी, इसलिए नहीं कि ब्याह को दस साल हो गए हैं, रवि उतने ही चिड़चिड़े हैं, इसलिए भी नहीं कि रवि को सबके सामने रति को चार बातें सुनाने में आनंद आता है...

निरूपमा

24 August 20226 mins 0 secs

Love Story : चिट्ठियां

वो निरूपमा के जीवन के दुर्दिन ही तो थे. न समय साथ में था न समीर। समय तो भी धीरे-धीरे गुज़र ही रहा था, पर समीर !!! उसकी क्या कहें, अभी भी टस से मस तक न हुआ था.

अच्छा हुआ जो चली गई, चार साल से तो कोमा में थी!... हां!...जान छूटी इनकी भी और हमारी भी!... इस तरह मौसमी मासी का देहांत घरभर के महिलाओं को फुसफुसाहट का सामान दे रहा था...

सारा

10 August 20224 mins 49 secs

Love Story : चूड़ियां

सारा उसे ठीक से जानती भी नहीं थी. वह ज़्यादातर अपनी नौकरी के सिलसिले में देहली में रही थी. ग्वालियर में  तो बस एकाध दिन  भर को रुकना होता था।  आई , रुकी और भागी। 

यह घर मेरी खाला जान का ससुराल था. उनकी बड़ी बेटी माहरुख और मैं ऐन बराबर थे. इन सोलह सालों में, हर छुट्टी माहरुख ही हमारे घर आती थी। मुझे न तो ये लोग कभी बुलाते न ही मेरे आने का कोई इत्तेफ़ाक़ होता...

वो दोनों सावन की अधचांदनी रात में मिले थे। घटाओं के बरसने पर धुल आई धरती की सौंधी सी खुशबू अपनी आत्मा में उतार, इंद्रप्रस्थ बस स्टॉप पर बस का इंतज़ार करते हुए. 9 बजे की लास्ट लोकल बस भी जा चुकी थी,

वो दोनों सावन की अधचांदनी रात में मिले थे। घटाओं के बरसने पर धुल आई धरती की सौंधी सी खुशबू अपनी आत्मा में उतार, इंद्रप्रस्थ बस स्टॉप पर बस का इंतज़ार करते हुए. 9 बजे की लास्ट लोकल बस भी जा चुकी थी, उसे तो मतलब सिर्फ अपने घर जाने से था पर रवि उसे कभी स्टॉप पर अकेला छोड़ कर न जाता था... 

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