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कॉरपोरेट में बढ़ी पूर्व सैनिकों की मांग: दबाव झेलने में ज्यादा सक्षम, 2000 से अधिक कंपनियों DGR के संपर्क में
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 18 Mar 2026 08:53 AM IST
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सार
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा में अब पूर्व सैनिकों की भूमिका और बढ़ गई है। रिफाइनरियों, न्यूक्लियर प्लांट और हवाई अड्डों पर सीआईएसएफ के साथ पूर्व सैनिकों को भी सुरक्षा एजेंट के रूप में तैनात किया जा रहा है।
सुरक्षाबल (फाइल)
- फोटो : एजेंसी
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विस्तार
आज के डिजिटल और मुकाबले वाले दौर में जहां युवा वर्क फोर्स हाई सैलरी और तेज ट्रैक करिअर की मांग करती है, वहीं कॉरपोरेट जगत ने अपनी परफेक्ट वर्क फोर्स तलाशनी शुरू कर दी है। कंपनियां अब अनुशासित, जिम्मेदार और अत्यधिक दबाव झेलने में सक्षम पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता दे रही हैं।
पिछले पांच वर्षों में कॉरपोरेट सेक्टर का रुझान तेजी से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए जवानों की ओर बढ़ा है। यही कारण है कि देश की दो हजार से अधिक कंपनियां अब सीधे रक्षा मंत्रालय के पुनर्वास महानिदेशालय (डीजीआर) के संपर्क में हैं। इनमें विनिर्माण इकाइयों के साथ-साथ आईटी, एआई और डाटा साइंस जैसे हाई-टेक उद्योग भी शामिल हैं।
कॉरपोरेट जहां युवाओं में चपलता देखता है, वहीं पूर्व सैनिकों में वह परिपक्वता, धैर्य और संकट प्रबंधन (क्राइसिस मैनेजमेंट) की क्षमता देखता है, जो किसी भी संगठन को मजबूती दे सकती है। कंपनियों का मानना है कि सेना में मिला अनुशासन और तनावपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेने की कला उन्हें दूसरी पारी के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है।
चंडीगढ़ में आयोजित एक जॉब फेयर के दौरान पुनर्वास महानिदेशक मेजर जनरल एसबीके सिंह ने अमर उजाला को बताया कि कॉरपोरेट सेक्टर को अब एहसास हुआ है कि पूर्व सैनिक केवल सुरक्षा गार्ड नहीं हैं, वे मैनेजर, टीम लीडर और टेक्निकल हेड की भूमिका में भी बखूबी फिट बैठते हैं। डीजीआर इसी कड़ी को मजबूत कर रहा है।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा में अब पूर्व सैनिकों की भूमिका और बढ़ गई है। रिफाइनरियों, न्यूक्लियर प्लांट और हवाई अड्डों पर सीआईएसएफ के साथ पूर्व सैनिकों को भी सुरक्षा एजेंट के रूप में तैनात किया जा रहा है। डीजीआर के माध्यम से हर साल इन संस्थानों में लगभग 50 से 60 हजार पूर्व सैनिकों को नियोजित किया जा रहा है। हाल ही में चंडीगढ़ में आयोजित रोजगार मेले में विभिन्न कॉरपोरेट कंपनियां 1800 से 2000 रिक्तियां लेकर पहुंचीं, जहां पूर्व सैनिकों को हाथोंहाथ नौकरियां मिलीं।
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पिछले पांच वर्षों में कॉरपोरेट सेक्टर का रुझान तेजी से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए जवानों की ओर बढ़ा है। यही कारण है कि देश की दो हजार से अधिक कंपनियां अब सीधे रक्षा मंत्रालय के पुनर्वास महानिदेशालय (डीजीआर) के संपर्क में हैं। इनमें विनिर्माण इकाइयों के साथ-साथ आईटी, एआई और डाटा साइंस जैसे हाई-टेक उद्योग भी शामिल हैं।
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कॉरपोरेट जहां युवाओं में चपलता देखता है, वहीं पूर्व सैनिकों में वह परिपक्वता, धैर्य और संकट प्रबंधन (क्राइसिस मैनेजमेंट) की क्षमता देखता है, जो किसी भी संगठन को मजबूती दे सकती है। कंपनियों का मानना है कि सेना में मिला अनुशासन और तनावपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेने की कला उन्हें दूसरी पारी के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है।
चंडीगढ़ में आयोजित एक जॉब फेयर के दौरान पुनर्वास महानिदेशक मेजर जनरल एसबीके सिंह ने अमर उजाला को बताया कि कॉरपोरेट सेक्टर को अब एहसास हुआ है कि पूर्व सैनिक केवल सुरक्षा गार्ड नहीं हैं, वे मैनेजर, टीम लीडर और टेक्निकल हेड की भूमिका में भी बखूबी फिट बैठते हैं। डीजीआर इसी कड़ी को मजबूत कर रहा है।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा में अब पूर्व सैनिकों की भूमिका और बढ़ गई है। रिफाइनरियों, न्यूक्लियर प्लांट और हवाई अड्डों पर सीआईएसएफ के साथ पूर्व सैनिकों को भी सुरक्षा एजेंट के रूप में तैनात किया जा रहा है। डीजीआर के माध्यम से हर साल इन संस्थानों में लगभग 50 से 60 हजार पूर्व सैनिकों को नियोजित किया जा रहा है। हाल ही में चंडीगढ़ में आयोजित रोजगार मेले में विभिन्न कॉरपोरेट कंपनियां 1800 से 2000 रिक्तियां लेकर पहुंचीं, जहां पूर्व सैनिकों को हाथोंहाथ नौकरियां मिलीं।