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पंजाब सीएमओ से जुड़े भ्रष्टाचार केस में नया अपडेट: जस्टिस शील नागू सुनवाई से अलग, दूसरी बेंच करेगी सुनवाई

Fri, 09 Oct 2026 02:24 PM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 09 Oct 2026 02:24 PM IST
सार

पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 5 अक्तूबर के आदेश को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने ईडी की ओर से पंजाब पुलिस को भेजी गई सूचना के आधार पर सीबीआई को कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की एफआईआर दर्ज कर जांच करने और दो महीने में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।

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Corruption case linked to Punjab CMO Supreme Court hear plea against CBI probe today
Supreme Court - फोटो : PTI

विस्तार

पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई जांच के पंजाब सरकार के विरोध को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। 
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सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति शील नागू ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष मामला सूचीबद्ध था। अब मामले को दूसरी पीठ के समक्ष रखा जाएगा।
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सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने न्यायमूर्ति नागू के पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहते कुछ संबंधित याचिकाओं पर आदेश देने का उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार उन पुराने आदेशों पर निर्भर नहीं कर रही है। इसके बाद न्यायमूर्ति नागू ने सुनवाई से अलग होने का निर्णय लिया। न्यायमूर्ति दत्ता ने टिप्पणी की कि मौजूदा समय कठिन है और पता नहीं हमला कहां से हो जाए। उन्होंने कहा कि मामले को दूसरी पीठ को सौंपा जा सकता है।
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पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मामले को सोमवार को सूचीबद्ध करने का सुझाव दिया। अब आगे की सुनवाई नई पीठ के समक्ष होगी। वीरवार को भी मामले की सुनवाई टल गई थी, क्योंकि न्यायमूर्ति नागू को केस की फाइल समय पर नहीं मिल पाई थी। उस दिन सरकार ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को आगे की कार्रवाई से रोकने के लिए अंतरिम निर्देश देने की मांग की थी, लेकिन पीठ ने दोनों न्यायाधीशों को याचिका देखने का अवसर दिए बिना ऐसा आदेश देने पर सहमति नहीं जताई थी।


दरअसल, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पांच अक्तूबर को मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन से जुड़े आरोपों की जांच के लिए सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने और दो महीने में जांच रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। पंजाब सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
 
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