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पंजाब के पानी में खतरनाक रसायन: संसद की स्थायी समिति ने जताई चिंता, यूरेनियम-सेलेनियम की मात्रा अधिक

राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Mon, 06 Apr 2026 03:44 PM IST
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सार

पंजाब के पानी में यूरेनियम, सेलेनियम व नाइट्रेट जैसे रसायन मौजूद हैं। प्रदेश के 400 गांवों की 427 बस्तियां दूषित पानी की चपेट में आ चुकी हैं। राजस्थान में सबसे अधिक 2,368, असम में 1,350 और उड़ीसा में 611 गांव इस समस्या से प्रभावित हैं।

Dangerous Chemicals in Punjab Water Parliamentary Standing Committee Expresses Concern Uranium Selenium
water bottle - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

पंजाब के पानी में खतरनाक रसायन मौजूद हैं, जो कई तरह की बीमारियों को न्योता दे रहे हैं। राजस्थान, असम व उड़ीसा के बाद पंजाब सबसे अधिक इस समस्या से प्रभावित है। संसद की जल संसाधन संबंधी स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस पर चिंता जताई है।

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रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के पानी में यूरेनियम, सेलेनियम व नाइट्रेट जैसे रसायन मौजूद हैं। प्रदेश के 400 गांवों की 427 बस्तियां दूषित पानी की चपेट में आ चुकी हैं। राजस्थान में सबसे अधिक 2,368, असम में 1,350 और उड़ीसा में 611 गांव इस समस्या से प्रभावित हैं। फाजिल्का में यूरेनियम और पारा जैसी भारी धातुओं की मौजूदगी मिली है, जबकि फिरोजपुर के गांवों के पानी में यूरेनियम की मात्रा पाई गई है। मोगा के अंदर पानी में सेलेनियम और यूरेनियम जैसी भारी धातुएं पाई गई हैं। पटियाला के पानी में कैडमियम, यूरेनियम और सेलेनियम व रूपनगर में नाइट्रेट जैसी धातुओं की मौजूदगी सामने आई है।
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समिति ने रिपोर्ट में स्थिति को चिंताजनक बताया है और तत्काल सुधार करने तथा अन्य उपाय लागू करने की सिफारिश की है, जिनमें जल गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करना, नियमित परीक्षण सुनिश्चित करना और प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल के वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराना शामिल हैं। समिति ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को रोकने के लिए समय पर पहचान और हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया है। प्रदेश में पानी के नमूनों की जांच के लिए कुल 33 प्रयोगशालाएं हैं, जिन्हें फिलहाल बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।

भारी धातुओं की मौजूदगी खतरनाक

पानी में भारी धातुओं की मौजूदगी सेहत के लिए खतरनाक है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश के पानी में यूरेनियम की मात्रा अधिक होने के कारण कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। मालवा बेल्ट इससे बुरी तरह प्रभावित है। कैंसर होने के खतरे के साथ ही यह गुर्दे को भी नुकसान पहुंचाता है। इसी तरह पानी में सेलेनियम की उच्च मात्रा से लीवर, किडनी और पाचन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। नाइट्रेट मुख्य रूप से नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों और पशु अपशिष्ट के अनुचित निपटान के कारण होता है। यह कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है। इससे शिशु के खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है और साथ ही थायराइड रोग का भी खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह कैडमियम की अधिक मात्रा भी गुर्दे और हड्डियों की बीमारियों का कारण बन सकती है। 

सूबे में 9.45% बढ़ गए कैंसर के मरीज  

सूबे में पांच साल के अंदर कैंसर के मरीजों में 9.45% की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2020 में सभी तरह के कैंसर के 38,636 मरीज थे और वर्ष 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 42,288 हो गई है। इसी तरह प्रदेश में वर्ष 2021 के दौरान 39,521, वर्ष 2022 में 40,435 और वर्ष 2023 के दौरान कैंसर के 41,337 मरीज सामने आए थे। पानी में भारी धातुओं की मौजूदगी को कैंसर के मामले बढ़ने का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

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