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मासूम सावी को नई जिंदगी: गंभीर बीमारी के इलाज के लिए परिवार के पास नहीं थे आठ लाख, इस सरकारी योजना से मिली मदद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजपुर (पंजाब)
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Thu, 29 Jan 2026 04:11 PM IST
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सार
पंजाब के फिरोजपुर के रहने वाले गरीब परिवार की मासूम बच्ची को नया जीवन मिला है। बच्ची गंभीर बीमारी से जूझ रही थी और परिवार के पास उसके इलाज के लिए 8 लाख रुपये नहीं थे। बच्चे के इलाज के लिए सरकारी योजना वरदान साबित हुई है।
मासूम बच्ची सावी।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
फिरोजपुर में नौ महीने की मासूम को चिकित्सकों ने नया जीवन दिया है। सरकार की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) योजना के तहत मासूम सावी मुफ्त इलाज किया गया है। गरीब परिवार की बेटी सावी की सफल हार्ट सर्जरी हुई है। सावी के दिल में छेद था और परिवार के पास इतने रुपये नहीं थे कि वे किसी प्राइवेट अस्पताल में बच्ची का इलाज करवा सकें। फिरोजपुर छावनी के गवाल मंडी के रहने वाली गुरमीत कौर और दीपेश की बेटी सावी की हार्ट सर्जरी पूरी तरह फ्री हुई है। बच्ची अब पूरी तरह से स्वस्थ है और उसकी मुस्कान परिवार के साथ चिकित्सकों के दिल को भी मुस्कान दे रही है। सावी अपने माता-पिता की इकलौती संतान है।
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सिविल सर्जन डॉ. राजीव पराशर ने बताया कि नेशनल चाइल्ड हेल्थ प्रोग्राम के तहत आरबीएसके की फिरोजपुर अर्बन हेल्थ टीम के डॉ. ललित और डॉ. मनमीत कौर ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की हेल्थ जांच के दौरान पता चला कि नौ महीने की बच्ची सावी के दिल में छेद है। स्वास्थ्य टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत हेल्थ डिपार्टमेंट के उच्च अधिकारियों को सूचित किया। इसके बाद सभी औपचारिकताओं को पूरा कर मासूम सावी का आरबीएसके के तहत फोर्टिस मोहाली से ऑपरेशन किया गया। सफल सर्जरी के बाद मासूम सावी को नई जिंदगी मिली है।
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सावी माता-पिता की इकलौती संतान
डॉ. राजीव पराशर ने कहा कि बच्ची अब करीब डेढ़ साल की है, अपने परिवार के साथ पूरी तरह से स्वस्थ जिंदगी जी रही है। वीरवार को सावी के री-हेल्थ चेकअप किया गया। सावी की हेल्थ और उसके माता-पिता की खुशी देखकर अच्छा महसूस हो रहा है। सिविल सर्जन ने कहा कि बच्ची की हार्ट सर्जरी का पूरा खर्च सरकार ने आरबीएसके के तहत उठाया और परिवार का एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ। सावी अपने माता-पिता की इकलौती संतान है।
बच्ची के इलाज में खर्च हुए आठ लाख
सावी के पिता दीपेश और माता गुरमीत कौर ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इस स्कीम से उनकी बेटी और परिवार को नई जिंदगी मिली है। उसका इलाज पूरी तरह से फ्री हुआ है जबकि प्राइवेट इलाज बहुत महंगा था। क्योंकि इसमें लाखों रुपये खर्च होते थे, जो उनकी हैसियत से बाहर था। दीपेश दुकान पर काम करता है और 10 से 12 हजार प्रति माह कमाता है, जबकि गुरमीत कौर गृहणी हैं। बच्चे के इलाज में कुल खर्च 8 लाख रुपये आया है।
योजना के तहत 0 से 18 साल तक के बच्चों का इलाज फ्री
डिस्ट्रिक्ट मास मीडिया ऑफिसर संजीव शर्मा, डिप्टी मास मीडिया ऑफिसर अंकुश भंडारी और नेहा भंडारी ने बताया कि नेशनल चाइल्ड हेल्थ प्रोग्राम राज्य सरकार के सपोर्ट से चलाया जा रहा है। इसके तहत आंगनबाड़ी और सरकारी मदद वाले स्कूलों में रजिस्टर्ड 0 से 18 साल तक के बच्चों का फ्री इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस प्रोग्राम के तहत जन्मजात बीमारियां, दिल की बीमारियां, दिमागी कमजोरी, बोलने में देरी, दांतों की बीमारियां, क्लबफुट, रीढ़ की हड्डी में सूजन समेत 31 बीमारियों का फ्री इलाज किया जाता है।