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पुलिस सुरक्षा देने पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: यह कहकर खारिज की याचिका, जान से मारने की धमकी का मामला

Sat, 11 Jul 2026 07:13 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Sat, 11 Jul 2026 07:13 PM IST
सार

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा केवल जान से मारने की धमकी का आरोप लगाने मात्र से किसी व्यक्ति को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश नहीं दिया जा सकता।

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High Court decision on providing police protection
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल जान से मारने की धमकी का आरोप लगाने मात्र से किसी व्यक्ति को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश नहीं दिया जा सकता। यदि सक्षम पुलिस अधिकारी विस्तृत जांच के बाद यह निष्कर्ष निकालता है कि धमकी के आरोपों के समर्थन में कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है तो हाईकोर्ट उस निष्कर्ष में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
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कोर्ट ने यह भी कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 528 के तहत उसकी भूमिका पर्यवेक्षी (सुपरवाइजरी) है। वह अपीलीय अदालत की तरह तथ्यों और साक्ष्यों का दोबारा मूल्यांकन नहीं कर सकती।
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जस्टिस मनीषा बत्रा ने फरीदाबाद निवासी दो याचिकाकर्ताओं की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिका में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने, 10 अप्रैल 2026 के पुलिस आदेश को रद्द करने और याचिकाकर्ताओं तथा उनके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
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याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 4 अप्रैल 2024 को पड़ोसियों ने उन पर हमला किया था, जिसके बाद एफआईआर दर्ज हुई। आरोप था कि इसके बाद आरोपी लगातार केस वापस लेने के लिए उन्हें धमकाते रहे। पहले हाईकोर्ट ने पुलिस आयुक्त को शिकायत पर कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया था। इसके अनुपालन में पुलिस ने जांच के बाद 10 अप्रैल 2026 को सुरक्षा देने से इन्कार कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय समझौते का दबाव बनाया, जिसकी रिकॉर्डिंग उनके घर में लगे सीसीटीवी कैमरों में मौजूद है।

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सहायक पुलिस आयुक्त ने विस्तृत जांच की। जांच में सामने आया कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से मुकदमेबाजी और आपराधिक मामले चल रहे हैं तथा वे एक-दूसरे के खिलाफ लगातार शिकायतें करते रहे हैं। पुलिस के अनुसार धमकी के आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिला। यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता अपनी सुरक्षा के लिए पहले से लाइसेंसी हथियार रखता है।

हाईकोर्ट ने कहा कि सक्षम अधिकारी ने शिकायत को यांत्रिक ढंग से खारिज नहीं किया, बल्कि उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत एवं कारणयुक्त आदेश पारित किया है। ऐसे में कोर्ट को उसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।
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