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पंजाब में हर चौथा व्यक्ति पी रहा शराब: तंबाकू का सेवन भी बढ़ा, सूबे में 13.9 फीसदी लोग गिरफ्त में
Mon, 29 Jun 2026 05:07 PM IST
Nivedita
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 29 Jun 2026 05:07 PM IST
सार
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार पंजाब में 15 और उससे अधिक आयु के 22.9 फीसदी लोग शराब पीते हैं। पहले के मुकाबले इसमें मामूली वृद्धि हुई है।
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शराब
- फोटो : AI Generated
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विस्तार
पंजाब में शराब का सेवन बढ़ रहा है। तकरीबन हर चौथा व्यक्ति शराब पी रहा है। तंबाकू सेवन करने वाले लोगों के प्रतिशत में भी वृद्धि हुई है। 13.9 फीसदी लोग तंबाकू की गिरफ्त में हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की 2023-2024 की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार सूबे में 15 और उससे अधिक आयु के 22.9 फीसदी लोग शराब पीते हैं। पहले के मुकाबले इसमें मामूली वृद्धि हुई है। वर्ष 2019–2021 में सर्वेक्षण के दौरान यह प्रतिशत 22.8 था। शहरों के मुकाबले गांवों में हालात खराब हैं। गांवों में 24% लोग जबकि शहरों में शराब पीने वालों का प्रतिशत 21.1 है।
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राज्य में वर्ष 2019-2021 के दौरान 12.8% लोग तंबाकू का सेवन करते थे। गांवों के मुकाबले शहरों में तंबाकू का सेवन करने वाले लोग अधिक हैं। जहां शहरों में 14.2% लोग तंबाकू की गिरफ्त में हैं वहीं गांवों में लोगों का प्रतिशत 13.7 है। केंद्र और राज्य सरकार लोगों को तंबाकू के प्रभावों के बारे में जागरूक कर रही है बावजूद इसके तंबाकू सेवन करने वाले लोगों का प्रतिशत बढ़ रहा है। यह कई बीमारियों को भी न्योत दे रहा है। तंबाकू के सेवन से कैंसर होने का खतरा है।
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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार सूबे में 15 और उससे अधिक आयु के 22.9 फीसदी लोग शराब पीते हैं। पहले के मुकाबले इसमें मामूली वृद्धि हुई है। वर्ष 2019–2021 में सर्वेक्षण के दौरान यह प्रतिशत 22.8 था। शहरों के मुकाबले गांवों में हालात खराब हैं। गांवों में 24% लोग जबकि शहरों में शराब पीने वालों का प्रतिशत 21.1 है।
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महिलाओं में शराब का सेवन बढ़ा
महिलाओं में भी शराब का सेवन बढ़ रहा है लेकिन पुरुषों के मुकाबले यह काफी कम है। प्रदेश में 0.3% महिलाएं शराब का उपभोग कर रही हैं। शहरों में शराब का उपभोग अधिक है जबकि गांवों में कम है। इसी तरह प्रदेश में तंबाकू का सेवन करने वाले भी बढ़ रहे हैं और 13.9% लोग तंबाकू का सेवन करते हैं।
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राज्य में वर्ष 2019-2021 के दौरान 12.8% लोग तंबाकू का सेवन करते थे। गांवों के मुकाबले शहरों में तंबाकू का सेवन करने वाले लोग अधिक हैं। जहां शहरों में 14.2% लोग तंबाकू की गिरफ्त में हैं वहीं गांवों में लोगों का प्रतिशत 13.7 है। केंद्र और राज्य सरकार लोगों को तंबाकू के प्रभावों के बारे में जागरूक कर रही है बावजूद इसके तंबाकू सेवन करने वाले लोगों का प्रतिशत बढ़ रहा है। यह कई बीमारियों को भी न्योत दे रहा है। तंबाकू के सेवन से कैंसर होने का खतरा है।
पड़ोसी राज्यों की यह है स्थिति
अगर हरियाणा की बात करें तो राज्य में 17.5% लोग शराब का सेवन करते हैं और पहले से शराब पीने वाले लोगों का प्रतिशत बढ़ा है। वर्ष 2019–2021 के दौरान 16% लोग शराब पीते थे। इसी तरह अब गांवों में शराब पीने वाले लोगों का प्रतिशत 17.7 है जबकि शहरों में 17.2% लोग शराब पीते हैं।हरियाणा में तंबाकू का सेवन पहले से कम हुआ है लेकिन पंजाब के मुकाबले यह अधिक है। हरियाणा में 27.5% लोग तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। गांवों में 31.4% और शहरों में 21.6% लोग तंबाकू का उपभोग कर रहे हैं। इसी तरह अगर हिमाचल प्रदेश की बात करें तो वहां 30.2% लोग शराब पीते हैं। पहले के मुकाबले इसमें काफी आई है लेकिन अभी भी यह प्रतिशत अधिक है। गांवों में 30.6% और शहरों में 27.6% लोग शराब का उपभोग कर रहे हैं।
जानलेवा हो सकता तंबाकू का सेवन
तंबाकू स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। इसमें मौजूद निकोटीन और अन्य जहरीले रसायन न केवल फेफड़ों और हृदय को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि कैंसर, स्ट्रोक और सांस की गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। गुटखा, खैनी, जर्दा या धूम्रपान करने से मुंह, जीभ, होंठ और गले का कैंसर होने का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। वहीं धूम्रपान से फेफड़ों के कैंसर का खतरा होता है। शराब के अधिक सेवन से लिवर संबंधित बीमारियों का खतरा रहता है। साथ ही इससे उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा भी होता है।पंजाब में पहले से तंबाकू का सेवन बढ़ा है इसलिए नीति में बदलाव की जरूरत है ताकि सख्ती से खतरनाक तंबाकू पदार्थों पर प्रतिबंध लगाया जा सके और लोगों को जागरूक किया जा सके। साथ ही हुक्का और निकोटीन पाउच को लेकर भी सख्ती करने की जरूरत है जो कई तरह की बीमारियों को न्योता दे रहा है। - प्रोफेसर सोनू गोयल, सामुदायिक चिकित्सा विभाग, पीजीआई चंडीगढ़