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पंजाब के किसानों का दालों से मोहभंग: नहीं छूट रहा गेहूं-धान का मोह, सिर्फ 32 हजार टन तक सिमट गई दाल की पैदावार
Mon, 10 Aug 2026 10:23 AM IST
Nivedita
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 10 Aug 2026 10:23 AM IST
सार
पंजाब के किसानों का चावल और गेहूं उगाने पर अधिक जोर है। दोनों फसलों पर किसानों को एमएसपी की गारंटी मिलती है। यही कारण है कि जो किसान पहले दालों की खेती करते थे वो भी अब चावल और गेहूं की फसलों का ही रुख कर रहे हैं।
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दाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब के किसानों का दालों की खेती से मोहभंग होता जा रहा है जिस कारण हर साल दालों की पैदावार कम होती जा रही है। कटाई के समय और बाद में दालों का अधिक नुकसान होता है। साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) न मिलने के कारण किसान दालों की खेती छोड़ते जा रहे हैं।
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने इस संबंध में संसद में एक रिपोर्ट पेश की है। इसके अनुसार वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में 35 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में दालों की खेती हुई है जिससे 32 हजार टन पैदावार हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर दालों की पैदावार में पहले से वृद्धि हुई है लेकिन सूबे में यह कम होती जा रही है।
वर्ष 2024-25 में भी मात्र 37 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खेती हुई जबकि सिर्फ 34 हजार टन दालों की पैदावार हुई। सूबे के किसानों का चावल और गेहूं उगाने पर अधिक जोर है। दोनों फसलों पर किसानों को एमएसपी की गारंटी मिलती है। यही कारण है कि जो किसान पहले दालों की खेती करते थे वो भी अब चावल और गेहूं की फसलों का ही रुख कर रहे हैं।
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केंद्र सरकार ने अक्तूबर 2025 में दालों की खेती बढ़ाने के लिए एक मिशन शुरू किया है। 11,440 करोड़ रुपये के वित्तीय आवंटन वाले इस मिशन का लक्ष्य 2025-26 से 2030-31 तक छह साल की अवधि में दालों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना और दालों की खेती में आत्मनिर्भर बनना है। पंजाब में राज्य में 3 से 4 लाख टन से ज्यादा दालों की खपत है जिसके लिए दूसरे देशों से इनका आयात किया जाता है।
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कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने इस संबंध में संसद में एक रिपोर्ट पेश की है। इसके अनुसार वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में 35 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में दालों की खेती हुई है जिससे 32 हजार टन पैदावार हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर दालों की पैदावार में पहले से वृद्धि हुई है लेकिन सूबे में यह कम होती जा रही है।
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वर्ष 2024-25 में भी मात्र 37 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खेती हुई जबकि सिर्फ 34 हजार टन दालों की पैदावार हुई। सूबे के किसानों का चावल और गेहूं उगाने पर अधिक जोर है। दोनों फसलों पर किसानों को एमएसपी की गारंटी मिलती है। यही कारण है कि जो किसान पहले दालों की खेती करते थे वो भी अब चावल और गेहूं की फसलों का ही रुख कर रहे हैं।
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केंद्र सरकार ने अक्तूबर 2025 में दालों की खेती बढ़ाने के लिए एक मिशन शुरू किया है। 11,440 करोड़ रुपये के वित्तीय आवंटन वाले इस मिशन का लक्ष्य 2025-26 से 2030-31 तक छह साल की अवधि में दालों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना और दालों की खेती में आत्मनिर्भर बनना है। पंजाब में राज्य में 3 से 4 लाख टन से ज्यादा दालों की खपत है जिसके लिए दूसरे देशों से इनका आयात किया जाता है।
राष्ट्रीय स्तर पर दालों की खेती में वृद्धि
राष्ट्रीय स्तर पर दालों का उत्पादन 2024-25 में 256.83 लाख टन से बढ़कर 2025-26 में 274.09 लाख टन हो गया है। इसी तरह दालों की खेती का रकबा भी 277.20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 286.46 लाख हेक्टेयर हो गया है।
हरियाणा, हिमाचल में भी खेती सिमट रही
पड़ोसी राज्यों हरियाणा में भी दालों की अधिक पैदावार नहीं हो रही है। वर्ष 2025-26 के दौरान 1.04 लाख हेक्टेयर में खेती हुई है जबकि सिर्फ 9 हजार टन ही पैदावार हुई। अगर हिमाचल प्रदेश की बात करें तो सिर्फ 29 हजार हेक्टेयर में दालों की खेती हुई जबकि 48 हजार टन में पैदावार सिमट गई। राजस्थान में सबसे अधिक 60.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती हुई है और पैदावार 44.73 लाख टन तक रही है।
धान की बढ़ती जा रही खेती
प्रदेश में धान की पैदावार बढ़ती जा रही है। वर्ष 2020 में करीब 162 लाख मीट्रिक टन की पैदावार हुई थी। वर्ष 2021 में यह बढ़कर 187 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई। इसी तरह वर्ष 2022 में 183, वर्ष 2023 में 188 और वर्ष 2024 में 175 लाख मीट्रिक टन धान की पैदावार हुई। वर्ष 2025 में बाढ़ से नुकसान के बावजूद 156 लाख मीट्रिक टन धान की पैदावार रही।
सही लागत मिलने तक किसान दालें नहीं उगाएंगे : प्रो. चौधरी
पंजाब विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं कृषि विशेषज्ञ विनोद कुमार चौधरी ने बताया कि किसानों को जब तक फसल की सही लागत नहीं मिलेगी तब तक किसान दालों की फसल में रुचि नहीं दिखाएंगे। साथ ही दालों की खेती में संभाल बहुत जरूरी होती है। फसल का नुकसान अधिक रहता है। अगर किसानों को उचित दाम मिलेंगे तो वे इस नुकसान से भी नहीं डरेंगे।
राष्ट्रीय स्तर पर दालों का उत्पादन 2024-25 में 256.83 लाख टन से बढ़कर 2025-26 में 274.09 लाख टन हो गया है। इसी तरह दालों की खेती का रकबा भी 277.20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 286.46 लाख हेक्टेयर हो गया है।
हरियाणा, हिमाचल में भी खेती सिमट रही
पड़ोसी राज्यों हरियाणा में भी दालों की अधिक पैदावार नहीं हो रही है। वर्ष 2025-26 के दौरान 1.04 लाख हेक्टेयर में खेती हुई है जबकि सिर्फ 9 हजार टन ही पैदावार हुई। अगर हिमाचल प्रदेश की बात करें तो सिर्फ 29 हजार हेक्टेयर में दालों की खेती हुई जबकि 48 हजार टन में पैदावार सिमट गई। राजस्थान में सबसे अधिक 60.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती हुई है और पैदावार 44.73 लाख टन तक रही है।
धान की बढ़ती जा रही खेती
प्रदेश में धान की पैदावार बढ़ती जा रही है। वर्ष 2020 में करीब 162 लाख मीट्रिक टन की पैदावार हुई थी। वर्ष 2021 में यह बढ़कर 187 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई। इसी तरह वर्ष 2022 में 183, वर्ष 2023 में 188 और वर्ष 2024 में 175 लाख मीट्रिक टन धान की पैदावार हुई। वर्ष 2025 में बाढ़ से नुकसान के बावजूद 156 लाख मीट्रिक टन धान की पैदावार रही।
सही लागत मिलने तक किसान दालें नहीं उगाएंगे : प्रो. चौधरी
पंजाब विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं कृषि विशेषज्ञ विनोद कुमार चौधरी ने बताया कि किसानों को जब तक फसल की सही लागत नहीं मिलेगी तब तक किसान दालों की फसल में रुचि नहीं दिखाएंगे। साथ ही दालों की खेती में संभाल बहुत जरूरी होती है। फसल का नुकसान अधिक रहता है। अगर किसानों को उचित दाम मिलेंगे तो वे इस नुकसान से भी नहीं डरेंगे।