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बेअदबी कानून: पंजाब सरकार को एक माह में दूर करनी होंगी सभी आपत्तियां, श्री अकाल तख्त साहिब ने दिए आदेश

Mon, 29 Jun 2026 04:49 PM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Mon, 29 Jun 2026 04:49 PM IST
सार

पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि जत्थेदार के साथ लंबी और सकारात्मक चर्चा हुई।  

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Punjab government Sri Akal Takht 49 MLA nine minister sacrilege law bhagwant mann kuldeep singh gargaj update
श्री अकाल तख्त पर पेश हुए आप के मंत्री और विधायक - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पंजाब सरकार द्वारा पारित नए बेअदबी कानून को लेकर सोमवार को श्री अकाल तख्त साहिब में सुनवाई हुई। आप के सिख मंत्री और विधायक तीन बड़ी गाड़ियों के काफिले में पहुंचे। सभी नेता नंगे पैर श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे और लिखित स्पष्टीकरण सौंपा।

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सुनवाई के बाद जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंजाब सरकार को एक माह का समय दिया है। जत्थेदार ने कहा कि इस दाैरान बेअदबी कानून की सभी आपत्तियों को दूर किया जाए। जत्थेदार ने कहा कि जब तक कानून में संशोधन नहीं हो जाता, तब तक इस कानून को लागू न किया जाए।  
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पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि जत्थेदार के साथ लंबी और सकारात्मक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की गरिमा और मर्यादा को ध्यान में रखते हुए बैठक के अंदर हुई चर्चा का सार्वजनिक खुलासा करना उचित नहीं है। 
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वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि जथेदार की ओर से प्रस्तावित संशोधन पंजाब विधानसभा के स्पीकर के माध्यम से भेजे जाएंगे। संशोधन प्राप्त होने के बाद सरकार और विधायक उनका विस्तृत अध्ययन करेंगे और एक महीने के भीतर अपना निर्णय लेंगे।

बैठक के बाद आप के मंत्रियों और विधायकों ने श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि वे जत्थेदार द्वारा दिए गए सुझावों का पूरा सम्मान करेंगे और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखकर आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

सीएम के दो सार्वजनिक बयानों पर उठाए सवाल

इससे पहले जत्थेदार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के दो सार्वजनिक बयानों का हवाला देते हुए सवाल उठाए। पहला, मुख्यमंत्री के उस बयान पर जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि बेअदबी करने वाला मानसिक रूप से बीमार हो तो उसके माता-पिता या अभिभावक को सजा मिलेगी। जत्थेदार ने पूछा कि क्या ऐसी कोई व्यवस्था कानून में दर्ज है। इस पर कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। 

विधायक इंद्रबीर सिंह निज्जर ने मामले की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए सुनवाई का लाइव टेलीकास्ट न करने की बात कही, जिस पर जत्थेदार ने याद दिलाया कि स्वयं मुख्यमंत्री पहले सरकारी कार्यवाही के लाइव प्रसारण की बात कह चुके हैं।

दूसरे सवाल में जत्थेदार ने कहा कि सरकार को कानून बनाने का अधिकार है, लेकिन सिख समुदाय से जुड़े मामलों में अकाल तख्त, शिरोमणि कमेटी और अन्य सिख संस्थाओं से औपचारिक सलाह ली जानी चाहिए थी। कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने भी कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था।

पेशी से पहले जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने आरोप लगाया कि सरकार ने खालसा पंथ और सिख संस्थाओं की राय लिए बिना कानून में संशोधन कर धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप किया है।  

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