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सुलझेगा मसला: चुनाव से पहले बड़े पंथक विवाद से बचना चाहती है सरकार, बेअदबी रोधी कानून के संशोधन में फंसा पेच
Sat, 31 Oct 2026 01:05 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: Sharukh Khan
Updated Sat, 31 Oct 2026 01:05 PM IST
सार
पंजाब में चुनाव से पहले आप सरकार बड़े पंथक विवाद से बचना चाहती है। संशोधन विधेयक के कुछ प्रावधानों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बरकरार हैं। विशेष कमेटी अकाल तख्त के संपर्क में है।
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पंजाब में पंथक विवाद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों में सख्त सजा के प्रावधान वाले दि जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन विधेयक-2026 के कुछ प्रावधानों के संदर्भ में पंजाब सरकार और श्री अकाल तख्त साहिब के बीच अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। संशोधन पर पेच फंसा हुआ है और इसके समाधान के लिए सरकार की ओर से गठित कमेटी श्री अकाल तख्त के संपर्क में है।
दरअसल, सरकार इस मामले में बीच का रास्ता निकालना चाहती है ताकि चुनाव से पहले इस पंथक विवाद को ज्यादा तूल न दिया जाए। पंजाब सरकार ने इस संशोधन कानून पर अकाल तख्त की आपत्तियों के बाद बदलाव के लिए विशेष कमेटी गठित की है। सरकारी कमेटी अकाल तख्त की ओर से गठित विशेषज्ञ कमेटी के साथ समन्वय बनाकर जल्द इस विवाद का हल ढूंढने में जुटी है। हालांकि, कानून की मूल भावना और सजा के सख्त प्रावधानों में बदलाव नहीं करने के सरकार के रुख के कारण पेच फंसा हुआ है।
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दरअसल, सरकार इस मामले में बीच का रास्ता निकालना चाहती है ताकि चुनाव से पहले इस पंथक विवाद को ज्यादा तूल न दिया जाए। पंजाब सरकार ने इस संशोधन कानून पर अकाल तख्त की आपत्तियों के बाद बदलाव के लिए विशेष कमेटी गठित की है। सरकारी कमेटी अकाल तख्त की ओर से गठित विशेषज्ञ कमेटी के साथ समन्वय बनाकर जल्द इस विवाद का हल ढूंढने में जुटी है। हालांकि, कानून की मूल भावना और सजा के सख्त प्रावधानों में बदलाव नहीं करने के सरकार के रुख के कारण पेच फंसा हुआ है।
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सूत्रों के मुताबिक, सरकार चाहती थी कि यदि इस मामले में अकाल तख्त के साथ सहमति बन जाती, तो संशोधन विधेयक को हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया जा सकता था। अब दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने पर सरकार दोबारा विशेष सत्र बुलाकर संशोधन विधेयक लाने पर विचार कर सकती है।
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राजनीतिक मामलों के जानकार जगतार सिंह कहते हैं कि पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी की सरकार इस संवेदनशील पंथक मुद्दे पर नया विवाद खड़ा करने से बचना चाहेगी। उनके अनुसार, सरकार के सामने चुनौती यह है कि बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून बनाए रखने की अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता भी कायम रखे और सिख धार्मिक संस्थाओं की आपत्तियों का समाधान भी निकाले।
अप्रैल में बना कानून, जून में बढ़ा विवाद
पंजाब विधानसभा ने 13 अप्रैल 2026 को बैसाखी के अवसर पर आयोजित विशेष सत्र में इस संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया था। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह कानून बन गया। इसमें बेअदबी के दोषियों के लिए 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और पांच लाख से 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया।
पंजाब विधानसभा ने 13 अप्रैल 2026 को बैसाखी के अवसर पर आयोजित विशेष सत्र में इस संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया था। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह कानून बन गया। इसमें बेअदबी के दोषियों के लिए 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और पांच लाख से 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया।
विवाद केवल कानून में सख्त सजा के प्रावधानों को लेकर ही नहीं, बल्कि इसे तैयार करने और लागू करने की प्रक्रिया को लेकर भी है। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने आरोप लगाया था कि कानून बनाने से पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी), अकाल तख्त और सिख संस्थाओं से उचित विचार-विमर्श नहीं किया गया।
अकाल तख्त पर रखा था पक्ष
इसी मसले पर 29 जून को सिख विधायकों और मंत्रियों को अकाल तख्त के समक्ष अपना पक्ष रखना पड़ा था। अकाल तख्त ने कानून में बदलाव के लिए सुझाव दिए। इनमें गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों के रखरखाव से जुड़े प्रावधानों, सरकारी हस्तक्षेप की आशंका और धार्मिक संस्थाओं के अधिकारों से संबंधित आपत्तियां शामिल हैं।
इसी मसले पर 29 जून को सिख विधायकों और मंत्रियों को अकाल तख्त के समक्ष अपना पक्ष रखना पड़ा था। अकाल तख्त ने कानून में बदलाव के लिए सुझाव दिए। इनमें गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों के रखरखाव से जुड़े प्रावधानों, सरकारी हस्तक्षेप की आशंका और धार्मिक संस्थाओं के अधिकारों से संबंधित आपत्तियां शामिल हैं।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट किया था कि कानून की मूल भावना और बेअदबी के लिए सख्त सजा के प्रावधानों को कमजोर नहीं किया जा सकता।