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पेड़ों की बिना अनुमति कटाई पर रोक: हाईकोर्ट का सवाल-क्या आप नहीं चाहते हैं कि आपके बच्चे जिंदा रहें?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 24 Jan 2026 09:22 AM IST
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सार

हाईकोर्ट ने मोहाली में प्रस्तावित राउंडअबाउट (गोलचक्कर) परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतंत्र आयोग का गठन कर दिया है।

Punjab Haryana High Court refused to lift ban on cutting trees without its permission punjab
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिना हाईकोर्ट की अनुमति के पेड़ों को काटने पर लगी रोक हटाने से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इन्कार कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में जान जाना गंभीर विषय है लेकिन पर्यावरण का विनाश भी उतना ही बड़ा संकट है। हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या आप चाहते हैं कि आपके बच्चे और पोते-पोती जिंदा रहें या नहीं?
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हालांकि किसानों को बड़ी राहत देते हुए पॉपुलर व सफेदे के पेड़ों की कटाई को अंतरिम आदेश से बाहर करते हुए इसकी अनुमति दे दी है। 

मोहाली में प्रस्तावित राउंडअबाउट (गोलचक्कर) परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतंत्र आयोग का गठन कर दिया है। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी ने ट्रैफिक जाम, घातक सड़क दुर्घटनाओं की दलील देकर मोहाली के पीआर-7 रोड पर तीन राउंडअबाउट बनाने के लिए 251 पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी थी।
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अदालत ने मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए गठित आयोग में पंजाब के एडवोकेट जनरल, गमाडा, वन विभाग और याचिकाकर्ताओं के वकीलों को शामिल करने का आदेश दिया है। आयोग को चार दिन में स्थल का निरीक्षण कर अगली सुनवाई से पहले एक विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी।

आयोग को आदेश दिया गया कि हर उस पेड़ का सटीक स्थान दर्शाने वाला नक्शा और बर्ड्स-आई व्यू तैयार करे, जिसे काटा जाना प्रस्तावित है। यह स्पष्ट रूप से बताए कि उनमें से कौन-कौन से पेड़ हेरिटेज यानी पीपल, बरगद और नीम जैसी दीर्घायु प्रजातियों के हैं तथा क्या उनकी कटाई वास्तव में जरूरी है। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल सरकारी मंजूरी होना काफी नहीं है, खासकर शहरी क्षेत्रों में पुराने पेड़ों के नुकसान का स्वतंत्र और न्यायिक मूल्यांकन जरूरी है।

अहम टिप्पणी

गमाडा ने दलील दी कि पंजाब ट्री प्रिजर्वेशन पॉलिसी, 2024 के तहत पेड़ काटने की सभी वैधानिक मंजूरियां ली जा चुकी हैं और कटने वाले पेड़ों के मुकाबले पांच गुना पौधे लगाए जाएंगे। कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि क्या आप चाहते हैं कि आपके बच्चे और पोते-पोती जिंदा रहें या नहीं?

इस बीच हाईकोर्ट ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया कि उसकी यह रोक निजी भूमि पर की जा रही एग्रो-फॉरेस्ट्री पर लागू नहीं होगी। अदालत ने यह भी कहा कि यदि कोई पेड़ सड़ चुका है या मानव जीवन के लिए तत्काल खतरा बन गया है, तो सक्षम प्राधिकारी के प्रमाणन के बाद उसे हटाया जा सकता है।
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