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पंजाब निवेशक सम्मेलन: पंजाब पोर्ट से दूर, चीन को टक्कर देने के लिए प्लाईवुड उद्योग मांग रहा सब्सिडी

राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Mon, 16 Mar 2026 11:17 AM IST
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सार

कारोबारियों का कहना है कि गुजरात के कच्छ जिले के कांडला बंदरगाह तक प्लाईवुड ले जाने के लिए उद्योगपतियों को सब्सिडी चाहिए ताकि निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके। भविष्य में प्लाईवुड उद्योग के पास निर्यात ही एकमात्र विकल्प है।

Punjab Investor Summit plywood industry in Punjab seeks subsidies to compete with China
पंजाब निवेशक सम्मेलन में माैजूद सीएम भगवंत मान और कारोबारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पोर्ट से दूर होने के कारण पंजाब के उद्योगपति निर्यात में चीन का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण उद्योगपतियों ने सरकार से सब्सिडी मांगी है ताकि प्लाईवुड उद्योग के आगे विस्तार में मदद मिल सके।
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पंजाब निवेशक सम्मेलन के दौरान फर्नीचर और प्लाईवुड उद्योग पर सत्र के दौरान उद्योगपतियों ने स्पष्ट किया कि देश में प्लाईवुड की मांग को पूरा करने में उद्योग समक्ष है। अब उद्योग के आगे विस्तार के लिए सिर्फ निर्यात ही मात्रा विकल्प है। 
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क्षेत्रीय समिति ने भी नई नीति में सिफारिश की है कि निर्यात इकाई को माल ढुलाई सब्सिडी के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जानी चाहिए जो कि परिवहन लागत का 1 प्रतिशत और प्रति वर्ष अधिकतम 30 लाख रुपये तक होनी चाहिए।

उद्योगपति अमरजीत सिंह सोहल ने कहा कि चीन में सभी प्लाईवुड उद्योग पोर्ट के पास हैं। इस कारण निर्यात में उन्हें काफी फायदा होता है जबकि पंजाब में स्थिति उलट है। यही कारण है कि परिवहन लागत को वहन करने में उद्योगपति समक्ष नहीं हैं। गुजरात के कच्छ जिले के कांडला बंदरगाह तक प्लाईवुड ले जाने के लिए उद्योगपतियों को सब्सिडी चाहिए ताकि निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके। भविष्य में प्लाईवुड उद्योग के पास निर्यात ही एकमात्र विकल्प है।

धान के चक्कर से निकालने के लिए कृषि वानिकी को बढ़ावा देने की जरूरत

उद्योगपतियों ने कहा कि पंजाब के किसानों को धान और गेहूं के चक्कर से निकालने के लिए कृषि वानिकी को बढ़ावा देने की जरूरत है। पॉपुलर और सफेदा लगाने से ही किसान और उद्योग दोनों खुशहाल हो सकते हैं। उद्योग नीति को लेकर बनाई गई क्षेत्रीय समिति के चेयरमैन नरेश तिवारी ने कहा कि पहले कृषि वानिकी में किसानों की आय में समय लगता था लेकिन अब कई विकल्प मौजूद हैं। वह साथ में हल्दी समेत अन्य फसलों की खेती कर सकते हैं जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी होती जाएगी।

प्लाईवुड उद्योग के सामने ये बड़ी चुनौतियां

सत्र में सामने आया कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश व गुजरात समेत सभी राज्यों में प्लाईवुड उद्योग का बड़े सतर पर विस्तार हो रहा है जिसका मुकाबला करना उद्योगपतियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। हरियाणा में 400 से ज्यादा फैक्टरी एक जगह लग चुकी हैं। नरेश तिवारी ने कहा कि हालांकि वह तरह की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं लेकिन उन्होंने मार्केट फीस वसूली का विरोध किया। इस पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए क्योंकि मार्केट फीस लगाने से प्लाईवुड उद्योग सबसे अधिक प्रभावित है।

आपूर्ति में भारत में नंबर 1 बन सकता पंजाब

पर्यावरण सचिव प्रियांक भारती ने कहा कि प्लाईवुड की आपूर्ति में पंजाब देश में नंबर सकता है जिसके लिए सरकार को उद्योगपतियों के सहयोग की जरूरत है। सरकार कई कदम उठा रही है। नए ट्री एक्ट को ग्रामीण क्षेत्रों में फिलहाल नहीं लगाया जाएगा क्योंकि यह कृषि वानिकी में बड़ा वादा सकता था। इससे किसानों को कटाई से पहले अनुमति के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्र को इस एक्ट से बाहर रखा गया है।
 
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