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Punjab: सूबे को जल्द मिल सकता है स्थायी डीजीपी, UPSC ने मुख्य सचिव को भेजा पत्र; मांगा अफसरों का पैनल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 25 Feb 2026 02:58 PM IST
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सार

मार्च 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद जुलाई में साल 1992 बैच के आईपीएस अफसर गौरव यादव को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया था। उस वक्त यूपीएससी को स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए कोई पैनल नहीं भेजा गया था। 

Punjab may soon get permanent DGP UPSC sent letter to Chief Secretary
डीजीपी गाैरव यादव। - फोटो : X @DGPPunjabPolice
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विस्तार

पंजाब में करीब साढ़े तीन साल से पुलिस की कमान संभाल रहे कार्यवाहक डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। यूपीएससी ने पंजाब सरकार ने स्थायी डीजीपी की व्यवस्था के लिए सीनियर अफसरों का पैनल भेजने के लिए कहा है। 
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इस संदर्भ में मुख्य सचिव को पत्र भेजा गया है, जिसे गृह विभाग को आगामी कार्यवाही के लिए भेज दिया गया है। गृह विभाग ने इस पर डीजीपी कार्यालय को सीनियर अफसरों का पैनल बनाने को कहा है।
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बताया जा रहा है कि 10 दिन के भीतर यह पैनल और प्रस्ताव यूपीएससी को भेजना है। मार्च 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद जुलाई में साल 1992 बैच के आईपीएस अफसर गौरव यादव को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया था। उस वक्त यूपीएससी को स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए कोई पैनल नहीं भेजा गया था। 

इस संबंध में सरकार ने विधानसभा पंजाब पुलिस संशोधन बिल-2023 पेश कर कार्यकारी डीजीपी की नियुक्ति के लिए रास्ता निकाल लिया था। यही व्यवस्था अभी तक चलती आ रही है। गौरव यादव पहले मुख्यमंत्री मान के विशेष प्रिंसिपल सेक्रेटरी का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे थे। इससे पहले यादव 2016-17 के दौरान पंजाब पुलिस के खुफिया विभाग के मुखिया भी रह चुके थे। सीनियर आईपीएस वीके भावरा पंजाब के स्थायी डीजीपी थे मगर केंद्र में डेपुटेशन पर जाने के बाद पंजाब में गाैरव यादव को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया था।

बढ़ती गईं चुनाैतियां

पंजाब में गाैरव यादव की बताैर कार्यकारी डीजीपी पद पर नियुक्ति के बाद कई ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिसके चलते उनके लिए चुनाैतियां बढ़ती चली गई। सिद्धू मूसेवाला मर्डर केस, अमृतपाल सिंह केस, चाैकियों-थानों पर आतंकी हमले जैसे बड़े मामलों के साथ-साथ वर्तमान में बढ़ता गैंगस्टरवाद और नशा तस्करी के मामलों ने उनके समक्ष चुनाैतियों को और बढ़ा कर दिया। हालांकि सरकार के निर्देशों पर उनके कार्यकाल में ही नशा तस्करों के खिलाफ ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ और गैंगस्टरों के खिलाफ ‘ऑपरेशन प्रहार-गैंगस्टरों पर वार’ भी शुरू किया गए मगर प्रदेश में आप नेताओं की खुले आम हत्या के मामलों ने सियासी विरोधियों को डीजीपी पद की कार्यवाहक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने का एक बड़ा माैका दे दिया है।

17 डीजीपी रैंक के अफसर माैजूद

पंजाब पुलिस में 17 अफसर डीजीपी रैंक के हैं। गाैरव यादव के साथ-साथ शरद सत्य चाैहान, हरप्रीत सिंह सिद्धू और कुलदीप सिंह भी साल 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए पंजाब सरकार द्वारा यूपीएससी को तीन सीनियर आईपीएस अफसरों का पैनल उनकी सीनियोरिटी, अनुभव व सर्विस रिकाॅर्ड के आधार पर भेजना है। सीनियर आईपीएस संजीव कालड़ा साल 1989 बैच के अधिकारी हैं मगर बताया जा रहा है कि वे इसी माह सेवानिवृत हो जाएंगे। इनमें से एक स्थायी डीजीपी चुना जाएगा। पंजाब में विधानसभा चुनाव को एक साल का वक्त रह गया है, उम्मीद जताई जा रही है, उससे पहले पंजाब को स्थायी डीजीपी मिल जाएगा।

नेता खड़े कर रहे सवाल

पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बिक्रम सिंह मजीठिया, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव व विधायक परगट सिंह, विधायक सुखपाल सिंह खैरा, पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा समेत कई अन्य नेता सूबे में कार्यकारी डीजीपी की व्यवस्था पर सरकार की घेराबंदी में जुटे हुए हैं। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट भी राज्यों में कार्यकारी डीजीपी की प्रथा पर चिंता जता चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों टिप्पणी की थी कि यह प्रथा उचित नहीं है, जिन राज्यों में ऐसी व्यवस्था है, वहां यूपीएससी संबंधित राज्य सरकारों से स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए पैनल मंगवाए।
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