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कनाडा के दो गुरुद्वारे ऋण विवाद में: 130 लाख डॉलर का है कर्ज, वकील पर आरोप; कोर्ट ने बिक्री रोकी

Mon, 21 Sep 2026 09:25 AM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, हलवारा
संवाद न्यूज एजेंसी, हलवारा Published by: Nivedita Updated Mon, 21 Sep 2026 09:25 AM IST
सार

विवाद 25 अप्रैल 2025 को सिख स्पिरिचुअल सेंटर टोरंटो की संपत्ति के खिलाफ 100 लाख कनाडाई डॉलर के ऋण के साथ शुरू हुआ। 20 मई 2025 को ऋण प्रतिबद्धता बढ़ाकर 150 लाख कनाडाई डॉलर की गई जिसकी सुरक्षा ब्रैम्पटन स्थित नानकसर गुरुद्वारे की संपत्ति पर दर्ज होनी थी। 

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Two Canadian gurdwaras embroiled in debt dispute $13 million owed lawyer accused court halts sale
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik

विस्तार

कनाडा के ओंटारियो में दो सिख गुरुद्वारे 130 लाख कनाडाई डॉलर से अधिक के ऋण विवाद में कानूनी लड़ाई में घिर गए हैं। यह मामला राजविंदर ग्रेवाल की फर्म आरएसजी लॉ प्रोफेशनल कॉरपोरेशन से जुड़ा है। निजी ऋणदाताओं ने ऋण वापसी के लिए ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट में दावा दायर किया है।
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अदालती दावे के अनुसार, विवाद 25 अप्रैल 2025 को सिख स्पिरिचुअल सेंटर टोरंटो की संपत्ति के खिलाफ 100 लाख कनाडाई डॉलर के ऋण के साथ शुरू हुआ। 20 मई 2025 को ऋण प्रतिबद्धता बढ़ाकर 150 लाख कनाडाई डॉलर की गई जिसकी सुरक्षा ब्रैम्पटन स्थित नानकसर गुरुद्वारे की संपत्ति पर दर्ज होनी थी। 
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ऋणदाताओं का दावा है कि करीब 120 लाख कनाडाई डॉलर की राशि जारी हुई, जबकि ब्याज समेत 130 लाख कनाडाई डॉलर से अधिक बकाया है। ऋण पर शुरुआती छह महीने के लिए 15 फीसदी ब्याज और उसके बाद 24 फीसदी ब्याज दर लागू होने की बात कही गई है। 
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ऋणदाताओं का आरोप है कि आरएसजी लॉ से जुड़े वकील दविंदर खत्रा ने ब्रैम्पटन संपत्ति पर दूसरी मॉर्गेज सुरक्षा दर्ज नहीं की। 11 सितंबर 2026 को ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ने आदेश दिया कि ब्रैम्पटन संपत्ति को अगली सुनवाई तक बेचा या उस पर नया भार नहीं डाला जा सकता। अगली सुनवाई जनवरी में प्रस्तावित है। ग्रेवाल के वकील साइमन बीबर के अनुसार मामला सुलझ चुका है लेकिन ऋणदाता की वकील मारिया नैमार्क ने कहा कि मामला अभी सुलझा नहीं है।


यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें धार्मिक और सामुदायिक केंद्र शामिल हैं। सिख स्पिरिचुअल सेंटर टोरंटो कनाडा में पंजीकृत चैरिटी है। इतने बड़े निजी ऋण और धार्मिक संपत्ति के बीच पारदर्शिता तथा ट्रस्ट व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, ऋण की रकम का उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया गया, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
 
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