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Mohali News: शव वाहन को पंजीकरण के इंतजार, छह माह से बलौंगी श्मशान घाट में है खड़ी
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मोहाली। प्रशासनिक सुस्ती और प्रशासनिक उदासीनता के कारण शहर के बलौंगी श्मशान घाट में दो नई फ्यूनरल वैन (शव वाहन) पिछले छह माह से बेकार खड़ी धूल फांक रही हैं। लगभग 50 लाख रुपये की लागत से खरीदी गई इन गाड़ियों का इस्तेमाल अब तक इसलिए शुरू नहीं हो सका है क्योंकि विभाग ने अभी तक इनके पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। इन गाड़ियों को डेढ़ साल की लंबी नौकरशाही खींचतान के बाद खरीदा गया था। 14 अगस्त 2025 को इन्हें बलौंगी श्मशान घाट लाया गया था। तब से ये गाड़ियां एक इंच भी नहीं हिली हैं। स्थानीय निवासियों और पार्षदों ने इस पर कड़ा रोष जताया है। उनका कहना है कि जहां आम आदमी को तुरंत पंजीकरण की जरूरत होती है, वहीं सरकारी विभाग को अपनी ही गाड़ियों के कागजात पूरे करने में छह महीने से अधिक का समय लग रहा है।
पुरानी गाड़ियां भी बनीं सिरदर्द
श्मशान घाट की बदहाली का आलम यह है कि दो और पुरानी कंडम हो चुकी फ्यूनरल वैन पिछले पांच सालों से एक तरफ खड़ी हैं। विभाग ने न तो इन्हें स्क्रैप किया है और न ही इनका निपटारा किया है, जिससे परिसर में जगह की बर्बादी हो रही है। नगर निगम डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने कहा कि यह शहर के दो मुख्य श्मशान घाटों में से एक है, जहां रोजाना औसतन 10 से 12 अंतिम संस्कार होते हैं। सर्दियों में जब संख्या बढ़ जाती है, तब लोगों को शव वाहन मिलने में भारी परेशानी होती है। मजबूरी में लोग एम्बुलेंस के जरिए शव लाने को मजबूर हैं। शहरवासियों का आरोप है कि अगर समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं। लोगों ने इस मुद्दे पर जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि आम जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
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श्मशान घाट की बदहाली का आलम यह है कि दो और पुरानी कंडम हो चुकी फ्यूनरल वैन पिछले पांच सालों से एक तरफ खड़ी हैं। विभाग ने न तो इन्हें स्क्रैप किया है और न ही इनका निपटारा किया है, जिससे परिसर में जगह की बर्बादी हो रही है। नगर निगम डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने कहा कि यह शहर के दो मुख्य श्मशान घाटों में से एक है, जहां रोजाना औसतन 10 से 12 अंतिम संस्कार होते हैं। सर्दियों में जब संख्या बढ़ जाती है, तब लोगों को शव वाहन मिलने में भारी परेशानी होती है। मजबूरी में लोग एम्बुलेंस के जरिए शव लाने को मजबूर हैं। शहरवासियों का आरोप है कि अगर समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं। लोगों ने इस मुद्दे पर जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि आम जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
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