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Mohali News: सड़क हादसों का भयावह आंकड़ा, हर 1.45 दिन में औसतन एक मौत<bha>;</bha> 59 फीसदी शाम को
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मोहाली। जिले में सड़क हादसों से होने वाली मौतों का आंकड़ा चिंताजनक है। पिछले सात साल में करीब 1700 लोगों की जान जा चुकी है, जिसमें औसतन हर 1.45 दिन में एक मौत दर्ज हुई है। सबसे अधिक 59 फीसदी हादसे दोपहर तीन बजे से रात बारह बजे के बीच होते हैं। जिले में 92 ब्लैक स्पॉट होने के बावजूद दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी है। वर्ष 2020 से 10 सितंबर 2026 तक कुल 2,947 सड़क हादसे हुए। इनमें 2,584 लोग घायल हुए और 1700 लोगों की मौत हुई।
इस अवधि में औसतन हर दिन 1.2 सड़क हादसे और करीब 0.69 मौतें हुईं। दूसरे शब्दों में, जिले में लगभग 35 घंटे में एक व्यक्ति सड़क हादसे में जान गंवा रहा है। चालू वर्ष 2026 में भी स्थिति गंभीर है। 10 सितंबर तक 324 हादसों में 180 लोगों की मौत हो चुकी है। इस साल मौतों का औसत हर 1.4 दिन में एक है, जो सात साल के औसत से अधिक है। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, ओवरस्पीडिंग हादसों का प्रमुख कारण है।
शाम के समय सबसे ज्यादा खतरा
सात साल के आंकड़ों के अनुसार, शाम छह से रात नौ बजे के बीच 24 फीसदी हादसे हुए। यह कुल 2,947 हादसों में से करीब 707 दुर्घटनाएं हैं। इस तीन घंटे की अवधि में औसतन हर 3.5 दिन में एक हादसा हुआ। रात नौ से बारह बजे के बीच 21 फीसदी यानी करीब 619 हादसे दर्ज किए गए। दोपहर तीन से छह बजे के बीच भी करीब 14 फीसदी यानी 413 हादसे हुए। कुल मिलाकर, दोपहर तीन बजे से आधी रात तक के नौ घंटों में करीब 1,739 हादसे हुए।
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2025 रहा सबसे घातक साल
वर्ष 2025 सड़क हादसों के लिहाज से जिले का सबसे घातक साल रहा। इस साल 570 हादसों में 363 लोगों की मौत हुई। सात साल में हुई कुल 1,687 मौतों में से 2025 की हिस्सेदारी करीब 21.5 फीसदी थी। वर्ष 2024 में 266 हादसों में 119 मौतें हुई थीं। 2025 में हादसों और मौतों दोनों में बड़ा उछाल दर्ज हुआ। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में 92 ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं। इन स्थानों पर सुधार कार्य जारी हैं, पर नए दुर्घटना संभावित क्षेत्र सामने आ रहे हैं। पुलिस के पास फिलहाल केवल दो स्पीड गन हैं।
लोगों को यातायात कानून व्यवस्था के लिए जागरूक किया जा रहा है। ओवर स्पीडिंग पर काबू पाने के लिए गति पहचान सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस, ट्रैफिक विभाग और प्रशासन को संवेदनशील समय और स्थानों पर संयुक्त निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। - करनैल सिंह, डीएसपी ट्रैफिक
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इस अवधि में औसतन हर दिन 1.2 सड़क हादसे और करीब 0.69 मौतें हुईं। दूसरे शब्दों में, जिले में लगभग 35 घंटे में एक व्यक्ति सड़क हादसे में जान गंवा रहा है। चालू वर्ष 2026 में भी स्थिति गंभीर है। 10 सितंबर तक 324 हादसों में 180 लोगों की मौत हो चुकी है। इस साल मौतों का औसत हर 1.4 दिन में एक है, जो सात साल के औसत से अधिक है। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, ओवरस्पीडिंग हादसों का प्रमुख कारण है।
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शाम के समय सबसे ज्यादा खतरा
सात साल के आंकड़ों के अनुसार, शाम छह से रात नौ बजे के बीच 24 फीसदी हादसे हुए। यह कुल 2,947 हादसों में से करीब 707 दुर्घटनाएं हैं। इस तीन घंटे की अवधि में औसतन हर 3.5 दिन में एक हादसा हुआ। रात नौ से बारह बजे के बीच 21 फीसदी यानी करीब 619 हादसे दर्ज किए गए। दोपहर तीन से छह बजे के बीच भी करीब 14 फीसदी यानी 413 हादसे हुए। कुल मिलाकर, दोपहर तीन बजे से आधी रात तक के नौ घंटों में करीब 1,739 हादसे हुए।
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2025 रहा सबसे घातक साल
वर्ष 2025 सड़क हादसों के लिहाज से जिले का सबसे घातक साल रहा। इस साल 570 हादसों में 363 लोगों की मौत हुई। सात साल में हुई कुल 1,687 मौतों में से 2025 की हिस्सेदारी करीब 21.5 फीसदी थी। वर्ष 2024 में 266 हादसों में 119 मौतें हुई थीं। 2025 में हादसों और मौतों दोनों में बड़ा उछाल दर्ज हुआ। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में 92 ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं। इन स्थानों पर सुधार कार्य जारी हैं, पर नए दुर्घटना संभावित क्षेत्र सामने आ रहे हैं। पुलिस के पास फिलहाल केवल दो स्पीड गन हैं।
लोगों को यातायात कानून व्यवस्था के लिए जागरूक किया जा रहा है। ओवर स्पीडिंग पर काबू पाने के लिए गति पहचान सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस, ट्रैफिक विभाग और प्रशासन को संवेदनशील समय और स्थानों पर संयुक्त निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। - करनैल सिंह, डीएसपी ट्रैफिक