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कुत्तों का आतंक : टेंडर प्रक्रिया तीन बार पूरी, नसबंदी एक बार भी नहीं
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जीरकपुर। शहर में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, इससे आमजन में दहशत का माहौल बना हुआ है। शहर की हर गली, मोहल्ले, पार्क और चौराहों पर कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आते हैं। खासकर सुबह और शाम के समय कुत्ते बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सर्वाधिक हमला करते हैं। कई इलाकों में कुत्तों के झुंड अचानक बाइक सवारों पर हमला कर देते हैं। इससे दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए नगर परिषद अब तक तीन बार टेंडर प्रक्रिया पूरी कर चुका है, मगर हर बार टेंडर अलॉट होने के बावजूद काम शुरू नहीं हो सका।
इसका नतीजा यह रहा कि शहर में कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। अब एक बार फिर नया टेंडर लगाया गया है। कम्युनिटी स्वास्थ्य केंद्र ढकोली में अक्तूबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक केवल चार माह में 285 कुत्ते के काटने के मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग पंचकूला, चंडीगढ़, डेराबस्सी के सरकारी व निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं। अनुमान है कि यदि प्राइवेट अस्पतालों के आंकड़े जोड़ दिए जाएं, तो हर महीने 400 से 500 लोगों को कुत्तों ने काटा है। स्थानीय सिमरनजीत सिंह, सलमान, हरमेल सिंह, पुनीत, सतपाल का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
शहरवासियों की नजरें नगर परिषद पर टिकी हैं। उन्होंने न्यायालय के 13 जनवरी 2026 के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि अगर आवारा कुत्तों के काटने पर नगर परिषद को भारी जुर्माना देना पड़ेगा तब ही नगर परिषद लोगों की इस समस्या की ओर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने यह भी मांग की है कि आवारा कुत्ते के काटने पर मिलने वाले क्लेम की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि आम लोग भी आसानी से अपना क्लेम ले सकें।
टेंडर लगा दिया गया है। टेंडर अलॉट होने के तुरंत बाद ही कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू कर दिया जाएगा। - अमनदीप शर्मा, जेई, नगर परिषद
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इसका नतीजा यह रहा कि शहर में कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। अब एक बार फिर नया टेंडर लगाया गया है। कम्युनिटी स्वास्थ्य केंद्र ढकोली में अक्तूबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक केवल चार माह में 285 कुत्ते के काटने के मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग पंचकूला, चंडीगढ़, डेराबस्सी के सरकारी व निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं। अनुमान है कि यदि प्राइवेट अस्पतालों के आंकड़े जोड़ दिए जाएं, तो हर महीने 400 से 500 लोगों को कुत्तों ने काटा है। स्थानीय सिमरनजीत सिंह, सलमान, हरमेल सिंह, पुनीत, सतपाल का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
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शहरवासियों की नजरें नगर परिषद पर टिकी हैं। उन्होंने न्यायालय के 13 जनवरी 2026 के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि अगर आवारा कुत्तों के काटने पर नगर परिषद को भारी जुर्माना देना पड़ेगा तब ही नगर परिषद लोगों की इस समस्या की ओर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने यह भी मांग की है कि आवारा कुत्ते के काटने पर मिलने वाले क्लेम की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि आम लोग भी आसानी से अपना क्लेम ले सकें।
टेंडर लगा दिया गया है। टेंडर अलॉट होने के तुरंत बाद ही कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू कर दिया जाएगा। - अमनदीप शर्मा, जेई, नगर परिषद