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Mohali News: जीरकपुर में दूषित वातावरण में बन रही थीं दवाइयां, एक फैक्टरी सील दूसरे के सैंपल जांच को भेजे
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जीरकपुर। पभात गोडाउन एरिया में वीरवार देर रात करीब छह घंटे चली संयुक्त कार्रवाई में संदिग्ध दवाइयां बनाने का एक बड़ा और संगठित नेटवर्क बेनकाब हुआ है। पुलिस ने ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट और फूड सेफ्टी विभाग की टीम के साथ दो फार्मा फैक्टरियों पर छापा मारा। इसमें गंभीर अनियमितताएं मिलने पर एक फैक्टरी को मौके पर ही सील कर दिया, जबकि दूसरी फैक्टरी से दवाइयों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिया है। अधिकारियों ने पाया कि बीमारी में इस्तेमाल की जाने वाली दवाइयां बेहद गंदे और अस्वच्छ हालात में तैयार की जा रहीं थीं। फैक्टरी परिसर में साफ-सफाई का पूरी तरह अभाव था। कच्चा माल खुले में पड़ा था, फर्श पर गंदगी फैली थी। दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की हालत भी बेहद खराब मिली। अधिकारियों के अनुसार ऐसे माहौल में बनी दवाइयां लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।
ड्रग कंट्रोल विभाग ने रेनोस्ट केयर फार्मा नामक फैक्टरी में लाइसेंस और दस्तावेजों की भारी कमी मिली तो उसे तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। जांच में सामने आया कि यहां टैबलेट, इंजेक्शन, कफ सिरप, पेडियाट्रिक दवाइयां, प्रोटीन सप्लीमेंट सहित कई मेडिकल उत्पाद संदिग्ध तरीके से तैयार किए जा रहे थे। फैक्टरी के बाहर न तो कोई साइन बोर्ड था और न ही संचालक वैध लाइसेंस दिखा सके। वहीं दूसरी फैक्टरी वातावे हेल्थकेयर फार्मा से करीब 20 प्रकार की दवाइयों और मेडिकल उत्पादों के सैंपल लिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अन्य उत्पाद भी बनाए जा रहे थे
छापे के दौरान स्टैंप पैड और फर्जी पैकिंग सामग्री भी बरामद की गई। इसमें मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और एमआरपी खुद ही लगाए जा रहे थे। एलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक दवाइयों, फेस क्रीम, माउथवॉश और पेन रिलीफ बाम जैसे उत्पाद भी बनाए जा रहे थे। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह नेटवर्क करीब पांच वर्षों से सक्रिय था और दवाइयों की सप्लाई पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों तक की जा रही थी। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला देशभर में लोगों की सेहत के साथ बड़े स्तर पर खिलवाड़ का है। पुलिस रेड के दौरान सामने आया कि फैक्टरी में खुली दवाइयां डिब्बों में स्टोर की गई थी, जब वह उसकी पैकिंग करते थे तो वह खुद अपने तौर पर उसकी एक्सपॉयरी और मैन्युफैक्चरिंग डेट स्टैंप कर देते थे।
फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारी रवि गोयल ने बताया कि वातावे हेल्थकेयर फार्मा पर पहले भी करीब 16 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। यदि दोबारा खराब दवाइयां बनाते पाया गया, तो इस बार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और अगर लाइसेंस वैध हुए तो उन्हें भी निरस्त किया जाएगा। फिलहाल सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. ज्योति बब्बर ने बताया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की गई है। कई बिंदुओं पर गंभीर संदेह पाए गए हैं, जिसके चलते एक कंपनी को सील किया गया है, जबकि दूसरी कंपनी के सैंपल लिए गए हैं। रिकॉर्ड के अनुसार इन कंपनियों के लाइसेंस भी स्पष्ट रूप से वैध नहीं पाए गए हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
काफी दिनों से संदिग्ध दवाइयां बनने की सूचना मिल रही थी। ड्रग कंट्रोल और फूड सेफ्टी विभाग को सूचना देने उपरांत दवाइयों की फैक्टरी पर देर रात छापा मारा गया। ड्रग कंट्रोल टीम ने दोनों फैक्टरियों को सील कर दवाइयां कब्जे में लेकर टेस्टिंग के लिए लैब भेजी हैं। लैब रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी और मामला दर्ज किया जाएगा। -गजलप्रीत कौर, एएसपी जीरकपुर
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ड्रग कंट्रोल विभाग ने रेनोस्ट केयर फार्मा नामक फैक्टरी में लाइसेंस और दस्तावेजों की भारी कमी मिली तो उसे तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। जांच में सामने आया कि यहां टैबलेट, इंजेक्शन, कफ सिरप, पेडियाट्रिक दवाइयां, प्रोटीन सप्लीमेंट सहित कई मेडिकल उत्पाद संदिग्ध तरीके से तैयार किए जा रहे थे। फैक्टरी के बाहर न तो कोई साइन बोर्ड था और न ही संचालक वैध लाइसेंस दिखा सके। वहीं दूसरी फैक्टरी वातावे हेल्थकेयर फार्मा से करीब 20 प्रकार की दवाइयों और मेडिकल उत्पादों के सैंपल लिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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अन्य उत्पाद भी बनाए जा रहे थे
छापे के दौरान स्टैंप पैड और फर्जी पैकिंग सामग्री भी बरामद की गई। इसमें मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और एमआरपी खुद ही लगाए जा रहे थे। एलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक दवाइयों, फेस क्रीम, माउथवॉश और पेन रिलीफ बाम जैसे उत्पाद भी बनाए जा रहे थे। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह नेटवर्क करीब पांच वर्षों से सक्रिय था और दवाइयों की सप्लाई पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों तक की जा रही थी। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला देशभर में लोगों की सेहत के साथ बड़े स्तर पर खिलवाड़ का है। पुलिस रेड के दौरान सामने आया कि फैक्टरी में खुली दवाइयां डिब्बों में स्टोर की गई थी, जब वह उसकी पैकिंग करते थे तो वह खुद अपने तौर पर उसकी एक्सपॉयरी और मैन्युफैक्चरिंग डेट स्टैंप कर देते थे।
फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारी रवि गोयल ने बताया कि वातावे हेल्थकेयर फार्मा पर पहले भी करीब 16 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। यदि दोबारा खराब दवाइयां बनाते पाया गया, तो इस बार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और अगर लाइसेंस वैध हुए तो उन्हें भी निरस्त किया जाएगा। फिलहाल सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. ज्योति बब्बर ने बताया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की गई है। कई बिंदुओं पर गंभीर संदेह पाए गए हैं, जिसके चलते एक कंपनी को सील किया गया है, जबकि दूसरी कंपनी के सैंपल लिए गए हैं। रिकॉर्ड के अनुसार इन कंपनियों के लाइसेंस भी स्पष्ट रूप से वैध नहीं पाए गए हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
काफी दिनों से संदिग्ध दवाइयां बनने की सूचना मिल रही थी। ड्रग कंट्रोल और फूड सेफ्टी विभाग को सूचना देने उपरांत दवाइयों की फैक्टरी पर देर रात छापा मारा गया। ड्रग कंट्रोल टीम ने दोनों फैक्टरियों को सील कर दवाइयां कब्जे में लेकर टेस्टिंग के लिए लैब भेजी हैं। लैब रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी और मामला दर्ज किया जाएगा। -गजलप्रीत कौर, एएसपी जीरकपुर