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Mohali News: रैन बसेरे विरान, खुले में रात गुजार रहे परिवार
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जीरकपुर। शहर में कड़ाके की ठंड के बावजूद जरूरतमंदों को रैन बसेरों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। नगर परिषद के शहर में बनाए दो रैन बसेरों में एक लोहगढ़ रोड पर सेवा केंद्र और दूसरा ढकोली के सामुदायिक केंद्र पर पूरी तरह खाली पड़े हैं। हालात यह है कि फुटपाथों, बस स्टैंड, फ्लाईओवर और दुकानों के बाहर छोटे-छोटे नौनिहाल खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। जानकारी के अभाव और उचित व्यवस्था न होने के चलते जरूरतमंद रैन बसेरों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। जीरकपुर फ्लाईओवर के नीचे खुले में सर्द रात बिताने वाले करीब दस परिवारों से हमारे प्रतिनिधि ने बात की। इसमें पता चला कि अधिकतर लोग अपने छोटे बच्चों के साथ रहते हैं, जो कि उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं। सभी लोग शहर में दिहाड़ी-मजदूरी करके अपना पेट पाल रहे हैं। यहां रहने वाली महिलाएं भी मजदूरी करती हैं। इनके पास रहने के लिए कोई पक्का ठिकाना नहीं है। इनमें कई परिवार ऐसे हैं जिनके बच्चों की उम्र तीन साल से लेकर 6 साल के बीच में हैं। ठंड से बचाव के लिए ये लोग आग जलाकर या पतले कंबलों में सिमटकर रात काटते हैं। खासकर नौनिहालों की स्थिति बेहद चिंताजनक है, जो ठंड, भूख और बीमारियों के खतरे में जी रहे हैं। संवाद
किराए के लिए नहीं है पैसे
प्रवासी महिला सुनीता से पूछा कि खुले आसमां के नीचे रात क्यों बिता रही हो? छोटे बच्चे हैं बीमार हो जाएंगे? नगर परिषद ने शहर में दो रैन बसेरे बनाए हैं वहां जाकर रहिए? तो जवाब मिला कि किराए पर रहने के लिए पैसा नहीं है। तीन हजार से नीचे शहर में कहीं भी कमरा नहीं मिल रहा है। मजदूरी करके पेट पाल रहे हैं। तीन छोटे बच्चे हैं। मजदूरी का काम भी कभी मिलता है कभी नहीं। शहर में रैन बसेरे कहां बनाए गए हैं इसकी जानकारी नहीं है।
रात को कंबल से भी ठंड नहीं रुकती
दूसरे परिवार से भी यही प्रश्न किया तो परिवार के मुख्य सदस्य राजेश ने कहा कि हम पढ़े- लिखे नहीं हैं। किसी तरह बच्चों का पेट पाल रहे हैं। शहर में रैन बसेरे कहां हैं इसकी जानकारी हमें किसी ने नहीं दी है। रैन बसेरों की जानकारी मिल जाती तो वहीं रहने लगते। रात को हवा चलती है तो कंबल में भी ठंड नहीं रुकती है।
यह है व्यवस्था
नगर परिषद ने शहर में दो रैन बसेरे बनाए हैं। यहां ठहरने के लिए कंबल और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था है। रैन बसेरों में प्रवासियों और खुले में रात बिताने वालों को लिए बेड, कंबल से लेकर हीटर और खाना बनाने के लिए इंडेक्सन चूल्हे तक की व्यवस्था की गई है। दोनों रैन बसेरे रात को खुले रहते हैं।
नगर परिषद थोड़ी सक्रियता दिखाए तो कई जिंदगियां सुरक्षित हो सकती हैं। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, प्रमुख चौराहों और श्रमिक अड्डों पर रैन बसेरों की जानकारी देने वाले बोर्ड लगाए जाने चाहिए। इसके अलावा एमसी को पब्लिक अनाउंसमेंट करानी चाहिए क्योंकि जो लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं वह बोर्ड लगाने से भी रैन बसेरों तक नहीं पहुंच पाएंगे। साथ ही रात के समय फील्ड में जाकर जरूरतमंदों को रैन बसेरों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। खासकर बच्चों और महिलाओं को प्राथमिकता दी जाए। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो ठंड का यह मौसम गरीब और बेसहारा परिवारों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। - कुलभूषण शर्मा, समाजसेवी जीरकपुर
लोहगढ़ सेवा केंद्र और ढकोली सामुदायिक केंद्र में रात को एमसी के कर्मचारी ड्यूटी पर रहते हैं। शहर के सभी चौक चौराहे और बस स्टैंड पर रैन बसेरे की जानकारी के लिए पोस्टर लगाए जा रहे हैं। हमारी टीम रात में जाकर खुले में रात बिताने वाले लोगों को रैन बसेरों की जानकारी भी दे रही हैं। - मनोज कुमार सेनेटरी इंस्पेक्टर जीरकपुर
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किराए के लिए नहीं है पैसे
प्रवासी महिला सुनीता से पूछा कि खुले आसमां के नीचे रात क्यों बिता रही हो? छोटे बच्चे हैं बीमार हो जाएंगे? नगर परिषद ने शहर में दो रैन बसेरे बनाए हैं वहां जाकर रहिए? तो जवाब मिला कि किराए पर रहने के लिए पैसा नहीं है। तीन हजार से नीचे शहर में कहीं भी कमरा नहीं मिल रहा है। मजदूरी करके पेट पाल रहे हैं। तीन छोटे बच्चे हैं। मजदूरी का काम भी कभी मिलता है कभी नहीं। शहर में रैन बसेरे कहां बनाए गए हैं इसकी जानकारी नहीं है।
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रात को कंबल से भी ठंड नहीं रुकती
दूसरे परिवार से भी यही प्रश्न किया तो परिवार के मुख्य सदस्य राजेश ने कहा कि हम पढ़े- लिखे नहीं हैं। किसी तरह बच्चों का पेट पाल रहे हैं। शहर में रैन बसेरे कहां हैं इसकी जानकारी हमें किसी ने नहीं दी है। रैन बसेरों की जानकारी मिल जाती तो वहीं रहने लगते। रात को हवा चलती है तो कंबल में भी ठंड नहीं रुकती है।
यह है व्यवस्था
नगर परिषद ने शहर में दो रैन बसेरे बनाए हैं। यहां ठहरने के लिए कंबल और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था है। रैन बसेरों में प्रवासियों और खुले में रात बिताने वालों को लिए बेड, कंबल से लेकर हीटर और खाना बनाने के लिए इंडेक्सन चूल्हे तक की व्यवस्था की गई है। दोनों रैन बसेरे रात को खुले रहते हैं।
नगर परिषद थोड़ी सक्रियता दिखाए तो कई जिंदगियां सुरक्षित हो सकती हैं। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, प्रमुख चौराहों और श्रमिक अड्डों पर रैन बसेरों की जानकारी देने वाले बोर्ड लगाए जाने चाहिए। इसके अलावा एमसी को पब्लिक अनाउंसमेंट करानी चाहिए क्योंकि जो लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं वह बोर्ड लगाने से भी रैन बसेरों तक नहीं पहुंच पाएंगे। साथ ही रात के समय फील्ड में जाकर जरूरतमंदों को रैन बसेरों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। खासकर बच्चों और महिलाओं को प्राथमिकता दी जाए। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो ठंड का यह मौसम गरीब और बेसहारा परिवारों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। - कुलभूषण शर्मा, समाजसेवी जीरकपुर
लोहगढ़ सेवा केंद्र और ढकोली सामुदायिक केंद्र में रात को एमसी के कर्मचारी ड्यूटी पर रहते हैं। शहर के सभी चौक चौराहे और बस स्टैंड पर रैन बसेरे की जानकारी के लिए पोस्टर लगाए जा रहे हैं। हमारी टीम रात में जाकर खुले में रात बिताने वाले लोगों को रैन बसेरों की जानकारी भी दे रही हैं। - मनोज कुमार सेनेटरी इंस्पेक्टर जीरकपुर