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Mohali News: कड़ाके की ठंड में खुले स्कूल, मोहाली के सरकारी स्कूलों में खाली पड़ी कक्षाएं
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मोहाली। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच मोहाली में बुधवार को स्कूल तो खोल दिए लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अधिकांश सरकारी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति बेहद कम दर्ज की गई। सरकारी हाई स्कूल फेज-5 में कुल 400 छात्र नामांकित हैं, लेकिन ठंड के चलते केवल 30 से 40 प्रतिशत छात्र ही स्कूल पहुंचे। इसके बाद संख्या बढ़ाने के लिए मंदिर से अनाउंसमेंट तक करवानी पड़ी, ताकि अधिक से अधिक बच्चे स्कूल आएं। इसी तरह मौली बैदवान स्थित सरकारी स्कूल में कुल 500 छात्र पंजीकृत हैं, लेकिन यहां भी सिर्फ 30–40 प्रतिशत बच्चे ही स्कूल पहुंचे। वहीं फेज-3बी1 स्थित स्कूल ऑफ एमिनेंस, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल फेज-11, सरकारी एलिमेंट्री स्कूल फेज-9 और अन्य सरकारी स्कूलों में भी छात्रों की उपस्थिति सामान्य से काफी कम रही। कई स्कूलों में कक्षाएं लगभग खाली नजर आईं।
डबल शिफ्ट स्कूलों पर ज्यादा मार
हालांकि सिंगल शिफ्ट में चल रहे स्कूलों का समय सुबह 9 बजे रखा गया है, लेकिन डबल शिफ्ट वाले स्कूलों के छात्र अब भी सुबह 7:30 बजे कड़ाके की ठंड और कम दृश्यता के बीच स्कूल जाने को मजबूर हैं। डबल शिफ्ट में सरकारी हाई स्कूल, फेज-5, सरकारी हाई स्कूल, मौली बैदवान, स्कूल ऑफ एमिनेंस, फेज-3बी1, सरकारी हाई स्कूल, फेज-6, सरकारी हाई स्कूल, ढकोली, खरड़ स्थित मॉडल स्कूल शामिल हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब सिंगल शिफ्ट स्कूलों को राहत दी जा सकती है, तो डबल शिफ्ट स्कूलों के बच्चों के साथ ऐसा भेदभाव क्यों किया जा रहा है। ठंड और कोहरे में बच्चों को सुबह-सुबह भेजना सीधे तौर पर उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ है।
डीईओ का बयान
इस पूरे मामले में जब जिला शिक्षा अधिकारी (एलिमेंट्री) गिन्नी दुग्गल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह सरकार के हाथ में है अभी तक कोई आदेश नहीं आया है। हम कुछ नहीं कर सकते। अगर सरकार के आदेश आते हैं तो छुट्टियां भी बढ़ सकती हैं और स्कूलों के समय में भी बदलाव हो सकता है।
सुबह 7-7:30 बजे इतना ज्यादा कोहरा और ठंड होती है कि बच्चों को स्कूल भेजते समय डर लगता है। छोटे बच्चों की तबीयत बिगड़ने का खतरा रहता है, लेकिन हमारी बात सुनने वाला कोई नहीं है। - मनीष शर्मा, पिता
जब आधे से ज्यादा बच्चे स्कूल नहीं आ रहे, तो साफ है कि फैसला सही नहीं है। पढ़ाई जरूरी है, लेकिन बच्चों की सेहत उससे भी ज्यादा जरूरी है। सरकार को कम से कम समय में बदलाव करना चाहिए। - मानव पूरी, पिता
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डबल शिफ्ट स्कूलों पर ज्यादा मार
हालांकि सिंगल शिफ्ट में चल रहे स्कूलों का समय सुबह 9 बजे रखा गया है, लेकिन डबल शिफ्ट वाले स्कूलों के छात्र अब भी सुबह 7:30 बजे कड़ाके की ठंड और कम दृश्यता के बीच स्कूल जाने को मजबूर हैं। डबल शिफ्ट में सरकारी हाई स्कूल, फेज-5, सरकारी हाई स्कूल, मौली बैदवान, स्कूल ऑफ एमिनेंस, फेज-3बी1, सरकारी हाई स्कूल, फेज-6, सरकारी हाई स्कूल, ढकोली, खरड़ स्थित मॉडल स्कूल शामिल हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब सिंगल शिफ्ट स्कूलों को राहत दी जा सकती है, तो डबल शिफ्ट स्कूलों के बच्चों के साथ ऐसा भेदभाव क्यों किया जा रहा है। ठंड और कोहरे में बच्चों को सुबह-सुबह भेजना सीधे तौर पर उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ है।
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डीईओ का बयान
इस पूरे मामले में जब जिला शिक्षा अधिकारी (एलिमेंट्री) गिन्नी दुग्गल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह सरकार के हाथ में है अभी तक कोई आदेश नहीं आया है। हम कुछ नहीं कर सकते। अगर सरकार के आदेश आते हैं तो छुट्टियां भी बढ़ सकती हैं और स्कूलों के समय में भी बदलाव हो सकता है।
सुबह 7-7:30 बजे इतना ज्यादा कोहरा और ठंड होती है कि बच्चों को स्कूल भेजते समय डर लगता है। छोटे बच्चों की तबीयत बिगड़ने का खतरा रहता है, लेकिन हमारी बात सुनने वाला कोई नहीं है। - मनीष शर्मा, पिता
जब आधे से ज्यादा बच्चे स्कूल नहीं आ रहे, तो साफ है कि फैसला सही नहीं है। पढ़ाई जरूरी है, लेकिन बच्चों की सेहत उससे भी ज्यादा जरूरी है। सरकार को कम से कम समय में बदलाव करना चाहिए। - मानव पूरी, पिता