राजस्थान कांग्रेस में बगावत: दो पूर्व विधायकों की घर वापसी आखिरी वक्त पर टली, डोटासरा के सामने क्या खेल हुआ?
Rajasthan Congress Crisis: राजस्थान कांग्रेस में दो बागी पूर्व विधायकों खिलाड़ी लाल बैरवा और रामचंद्र सराधना की घर वापसी फिलहाल टल गई है। स्थानीय नेताओं के विरोध के चलते प्रदेश नेतृत्व ने फैसला रोक दिया है। अब पहले संगठन में सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से बगावत करने वाले दो पूर्व विधायक खिलाड़ी लाल बैरवा और रामचंद्र सराधना की पार्टी में वापसी फिलहाल टल गई है। पार्टी की अनुशासन समिति ने दोनों नेताओं की वापसी को हरी झंडी दे दी है, लेकिन स्थानीय स्तर पर विरोध के चलते उनकी औपचारिक री-जॉइनिंग रोक दी गई है।
मंगलवार को दोनों नेताओं ने जयपुर स्थित राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (आरपीसीसी) के वॉर रूम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने दोबारा कांग्रेस के लिए काम करने की इच्छा जताई। मुलाकात के बाद दोनों की जल्द पार्टी में वापसी की चर्चा तेज हो गई थी, लेकिन स्थानीय नेताओं के विरोध के बाद प्रदेश नेतृत्व ने फिलहाल फैसला टाल दिया।
स्थानीय नेताओं ने खोला मोर्चा
विराटनगर के पूर्व विधायक रामचंद्र सराधना की वापसी का कांग्रेस नेता इंद्राज गुर्जर और उनके समर्थक विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में सराधना की बगावत से पार्टी को नुकसान हुआ था। वहीं, पूर्व विधायक खिलाड़ी लाल बैरवा की वापसी का धौलपुर और बसेड़ी क्षेत्र में कांग्रेस जिलाध्यक्ष संजय जाटव और उनके समर्थक विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि बागी नेताओं को वापस लेने से कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाएगा।
पढे़ं: हरभजन की पोस्ट पर पंजाब पुलिस का फैक्ट-चेक, राजस्थान का निकला वायरल वीडियो, AAP ने निशाने पर लिया
टिकट कटने के बाद छोड़ी थी कांग्रेस
2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर दोनों नेताओं ने कांग्रेस छोड़ दी थी। खिलाड़ी लाल बैरवा मार्च 2024 में भाजपा में शामिल हुए थे, लेकिन विचारधारा का हवाला देते हुए जुलाई 2024 में उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। वहीं, रामचंद्र सराधना टिकट कटने के बाद चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी में शामिल हो गए थे और उसी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। अब दोनों नेताओं ने कांग्रेस में लौटने की इच्छा जताई है।
सहमति बनने के बाद होगा फैसला
प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि स्थानीय नेताओं को विश्वास में लिए बिना दोनों की वापसी कराने से संगठन में नया विवाद खड़ा हो सकता है। निकाय और आगामी चुनावों को देखते हुए पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। यही वजह है कि गोविंद सिंह डोटासरा और वरिष्ठ नेता पहले नाराज गुटों से बातचीत कर सहमति बनाने में जुटे हैं। जब तक स्थानीय स्तर पर सहमति नहीं बनती, दोनों नेताओं की आधिकारिक घर वापसी पर रोक रहेगी।