अलवर: नगर निगम में चालकों की हड़ताल, छह महीने से भुगतान नहीं; निजी गाड़ियों से दफ्तर पहुंच रहे अधिकारी
अलवर नगर निगम में बकाया भुगतान नहीं मिलने से पांच अधिकारियों की गाड़ियों के चालक तीन दिनों से हड़ताल पर हैं। अतिक्रमण दस्ते का चालक भी 10 दिनों से हड़ताल पर है। इससे अधिकारियों की आवाजाही और अतिक्रमण निरोधक कार्रवाई प्रभावित हो रही है।
विस्तार
नगर निगम में वाहनों का बकाया भुगतान नहीं होने से चालकों की हड़ताल जारी है। पांच अधिकारियों की गाड़ियों के चालक पिछले तीन दिनों से काम बंद कर हड़ताल पर हैं। वहीं, अतिक्रमण निरोधक दस्ते में इस्तेमाल होने वाली बोलेरो का चालक भी पिछले 10 दिनों से वाहन खड़ा कर हड़ताल पर बैठा है। चालकों के गाड़ियां खड़ी कर देने से नगर निगम का दैनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।
निजी वाहनों का इस्तेमाल करने को मजबूर अधिकारी
चालकों की हड़ताल के कारण नगर निगम के चार अधिकारियों को अपने निजी वाहनों से दफ्तर पहुंचना पड़ रहा है। सफाई निरीक्षक सुरेश शर्मा की एक कार, अधिशासी अभियंता दिनेश चंद और नोहिन खानम की दो कारें तथा लेखा अधिकारी राजेश खंडारा की एक कार खड़ी हो चुकी है। इसके अलावा अतिक्रमण अधिकारी राजीव लोचन के दस्ते में इस्तेमाल होने वाली बोलेरो भी पिछले 10 दिनों से खड़ी है। अतिक्रमण दस्ते का वाहन बंद होने से निगम की टीम बाजारों में अतिक्रमण की निगरानी नहीं कर पा रही है। इससे शहर में अतिक्रमण निरोधक कार्रवाई प्रभावित हो रही है।
भुगतान की फाइलें तैयार, आयुक्त के हस्ताक्षर का इंतजार
हड़ताल पर बैठे चालकों का कहना है कि बकाया भुगतान से संबंधित सभी जरूरी फाइलें तैयार हैं, लेकिन नगर निगम आयुक्त इन पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं। वहीं, निगम प्रशासन बजट नहीं होने की बात कह रहा है।
पढे़ं: 'अरुणाचल में भारत-चीन सैनिकों के बीच तनाव बरकरार': आईटीबीपी के डीजी ने बताई स्थिति, और क्या-क्या कहा?
बोलेरो चालक सोनू ने बताया कि उनकी गाड़ी का पिछले छह महीने से भुगतान नहीं हुआ है। अन्य गाड़ियों का भी दो से तीन महीने का भुगतान बकाया है। नगर निगम प्रत्येक गाड़ी के लिए 28,900 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से भुगतान करता है। समय पर पैसा नहीं मिलने के कारण चालकों को अपनी जेब से डीजल भरवाना पड़ रहा है। गाड़ियों के रखरखाव का खर्च भी उन्हें खुद उठाना पड़ रहा है।
बकाया भुगतान नहीं मिलने पर खड़ी की गाड़ियां
चालकों के अनुसार, कई महीनों तक भुगतान का इंतजार करने और अपनी जेब से खर्च उठाने के बाद उन्होंने गाड़ियां खड़ी करने का फैसला लिया। अब उनके लिए डीजल और रखरखाव का खर्च उठाना संभव नहीं रह गया है। गाड़ियों के खड़े होने से अधिकारियों की आवाजाही के साथ ही बाजारों में अतिक्रमण की निगरानी भी प्रभावित हो रही है। इस मामले में नगर निगम आयुक्त माधव भारद्वाज ने कहा कि वे अधिकारियों की गाड़ियों के बकाया भुगतान से संबंधित मामले को दिखवा रहे हैं।