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Balotra: पर्यावरण से समझौता नहीं चलेगा, रामकी प्लांट पर भड़के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा
Published by: बालोतरा ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jan 2026 07:32 PM IST
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सार
Balotra: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के उच्चस्तरीय जांच दल ने सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल के साथ बालोतरा स्थित रामकी प्लांट का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने रामकी अपशिष्ट उपचार प्लांट की तकनीकी खामियों और संचालन में बरती जा रही लापरवाहियों की ओर सीपीसीबी अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट किया।
सांसद बेनीवाल और सीपीसीबी का निरीक्षण
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विस्तार
पश्चिमी राजस्थान के बालोतरा-बाड़मेर क्षेत्र में लंबे समय से गहराते जा रहे गंभीर पर्यावरणीय संकट को लेकर एक अहम कदम उठाया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के उच्चस्तरीय जांच दल ने स्थानीय सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल के साथ बालोतरा स्थित रामकी औद्योगिक अपशिष्ट उपचार संयंत्र (टीएसडीएफ प्लांट) का विस्तृत और तकनीकी निरीक्षण किया। इस दौरान प्लांट की कार्यप्रणाली, उपचार क्षमता, सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय प्रभावों की बारीकी से जांच की गई।
निरीक्षण के बाद हुई अहम बैठक
निरीक्षण के उपरांत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरपीसीबी) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित हुई, जिसमें क्षेत्र में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण, रासायनिक अपशिष्ट के निस्तारण और उसके दुष्परिणामों पर गंभीर चर्चा की गई।
उच्चस्तरीय जांच की मांग के बाद सीपीसीबी की कार्रवाई
गौरतलब है कि सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने हाल ही में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पत्र लिखकर बालोतरा-बाड़मेर क्षेत्र में फैले प्रदूषण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। उन्होंने औद्योगिक इकाइयों और बाड़मेर के क्रूड ऑयल दोहन क्षेत्रों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट को आमजन के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए अत्यंत घातक बताया था। इसी के तहत सीपीसीबी का जांच दल क्षेत्रीय दौरे पर पहुंचा है।
रामकी प्लांट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
निरीक्षण के दौरान सांसद बेनीवाल ने रामकी अपशिष्ट उपचार प्लांट की तकनीकी खामियों और संचालन में बरती जा रही लापरवाहियों की ओर सीपीसीबी अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्लांट की वर्तमान उपचार क्षमता क्षेत्र की औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप नहीं है। कई औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक कचरा बिना समुचित उपचार के बाहर छोड़ा जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय असंतुलन पैदा हो रहा है। सांसद ने कहा कि रासायनिक अपशिष्ट बरसात के दिनों में बहकर आसपास की कृषि भूमि में फैल जाता है, जिससे खेतों की उपजाऊ शक्ति समाप्त हो रही है और भूजल जहरीला होता जा रहा है। यह स्थिति किसानों, पशुधन और आमजन के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
ग्रीन बेल्ट और जल भंडारण की भारी कमी
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि प्लांट परिसर में न तो पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ग्रीन बेल्ट विकसित की गई है और न ही पर्याप्त जल भंडारण टैंकों की व्यवस्था है। सांसद ने इन खामियों को गंभीर लापरवाही करार देते हुए कहा कि नियमों का खुला उल्लंघन होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा आंखें मूंदी जा रही हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि इन अनियमितताओं के लिए केवल कंपनी ही नहीं, बल्कि संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
बड़ी इकाइयों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
बैठक के दौरान सांसद बेनीवाल ने आरपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी दीपक तंवर से सीधे और तीखे सवाल किए। उन्होंने कहा कि छोटी औद्योगिक इकाइयों पर तो त्वरित कार्रवाई कर दी जाती है, लेकिन बड़ी और प्रभावशाली इकाइयों के खिलाफ नियमों के उल्लंघन के बावजूद नरमी क्यों बरती जा रही है? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई औद्योगिक इकाइयां रासायनिक अपशिष्ट युक्त पानी सीधे लूणी नदी और किसानों के खेतों में छोड़ रही हैं, जिसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही।
निष्पक्ष रिपोर्ट और स्थायी समाधान की मांग
सांसद बेनीवाल ने सीपीसीबी के अधिकारियों से आग्रह किया कि वे किसी भी दबाव से मुक्त होकर तथ्यात्मक, निष्पक्ष और जमीनी सच्चाई पर आधारित जांच रिपोर्ट तैयार करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्योगों को बंद करना समाधान नहीं है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आमजन के स्वास्थ्य, किसानों की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों ने सुनाई पीड़ा
निरीक्षण के दौरान आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने भी जांच दल के समक्ष अपने अनुभव साझा किए। ग्रामीणों ने बताया कि प्रदूषण के कारण खेत बंजर हो रहे हैं, पानी पीने योग्य नहीं रहा और पशुओं में अजीब बीमारियां फैल रही हैं। कई गांवों में त्वचा रोग, सांस संबंधी समस्याएं और अन्य गंभीर बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं।
ये भी पढ़ें: बिजली विभाग की लापरवाही से हुई थी संविदाकर्मी की मौत, 20 लाख का मिलेगा मुआवजा
निर्णायक कार्रवाई का आश्वासन
बैठक में प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण, रामकी प्लांट की उपचार क्षमता बढ़ाने, नियमित और पारदर्शी मॉनिटरिंग, ग्रीन बेल्ट विकास तथा दोषी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई को लेकर विस्तृत मंथन किया गया। अंत में सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बालोतरा की जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। इस गंभीर पर्यावरणीय संकट के स्थायी समाधान के लिए प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत स्तर पर कठोर और निर्णायक कदम उठाए जाएंगे।
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निरीक्षण के बाद हुई अहम बैठक
निरीक्षण के उपरांत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरपीसीबी) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित हुई, जिसमें क्षेत्र में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण, रासायनिक अपशिष्ट के निस्तारण और उसके दुष्परिणामों पर गंभीर चर्चा की गई।
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उच्चस्तरीय जांच की मांग के बाद सीपीसीबी की कार्रवाई
गौरतलब है कि सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने हाल ही में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पत्र लिखकर बालोतरा-बाड़मेर क्षेत्र में फैले प्रदूषण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। उन्होंने औद्योगिक इकाइयों और बाड़मेर के क्रूड ऑयल दोहन क्षेत्रों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट को आमजन के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए अत्यंत घातक बताया था। इसी के तहत सीपीसीबी का जांच दल क्षेत्रीय दौरे पर पहुंचा है।
रामकी प्लांट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
निरीक्षण के दौरान सांसद बेनीवाल ने रामकी अपशिष्ट उपचार प्लांट की तकनीकी खामियों और संचालन में बरती जा रही लापरवाहियों की ओर सीपीसीबी अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्लांट की वर्तमान उपचार क्षमता क्षेत्र की औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप नहीं है। कई औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक कचरा बिना समुचित उपचार के बाहर छोड़ा जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय असंतुलन पैदा हो रहा है। सांसद ने कहा कि रासायनिक अपशिष्ट बरसात के दिनों में बहकर आसपास की कृषि भूमि में फैल जाता है, जिससे खेतों की उपजाऊ शक्ति समाप्त हो रही है और भूजल जहरीला होता जा रहा है। यह स्थिति किसानों, पशुधन और आमजन के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
ग्रीन बेल्ट और जल भंडारण की भारी कमी
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि प्लांट परिसर में न तो पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ग्रीन बेल्ट विकसित की गई है और न ही पर्याप्त जल भंडारण टैंकों की व्यवस्था है। सांसद ने इन खामियों को गंभीर लापरवाही करार देते हुए कहा कि नियमों का खुला उल्लंघन होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा आंखें मूंदी जा रही हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि इन अनियमितताओं के लिए केवल कंपनी ही नहीं, बल्कि संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
बड़ी इकाइयों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
बैठक के दौरान सांसद बेनीवाल ने आरपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी दीपक तंवर से सीधे और तीखे सवाल किए। उन्होंने कहा कि छोटी औद्योगिक इकाइयों पर तो त्वरित कार्रवाई कर दी जाती है, लेकिन बड़ी और प्रभावशाली इकाइयों के खिलाफ नियमों के उल्लंघन के बावजूद नरमी क्यों बरती जा रही है? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई औद्योगिक इकाइयां रासायनिक अपशिष्ट युक्त पानी सीधे लूणी नदी और किसानों के खेतों में छोड़ रही हैं, जिसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही।
निष्पक्ष रिपोर्ट और स्थायी समाधान की मांग
सांसद बेनीवाल ने सीपीसीबी के अधिकारियों से आग्रह किया कि वे किसी भी दबाव से मुक्त होकर तथ्यात्मक, निष्पक्ष और जमीनी सच्चाई पर आधारित जांच रिपोर्ट तैयार करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्योगों को बंद करना समाधान नहीं है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आमजन के स्वास्थ्य, किसानों की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों ने सुनाई पीड़ा
निरीक्षण के दौरान आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने भी जांच दल के समक्ष अपने अनुभव साझा किए। ग्रामीणों ने बताया कि प्रदूषण के कारण खेत बंजर हो रहे हैं, पानी पीने योग्य नहीं रहा और पशुओं में अजीब बीमारियां फैल रही हैं। कई गांवों में त्वचा रोग, सांस संबंधी समस्याएं और अन्य गंभीर बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं।
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निर्णायक कार्रवाई का आश्वासन
बैठक में प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण, रामकी प्लांट की उपचार क्षमता बढ़ाने, नियमित और पारदर्शी मॉनिटरिंग, ग्रीन बेल्ट विकास तथा दोषी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई को लेकर विस्तृत मंथन किया गया। अंत में सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बालोतरा की जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। इस गंभीर पर्यावरणीय संकट के स्थायी समाधान के लिए प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत स्तर पर कठोर और निर्णायक कदम उठाए जाएंगे।