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Rajasthan News: बॉर्डर पर बुलडोजर से बढ़ा सियासी बवाल, धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई को लेकर घमासान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर/ बालोतरा Published by: बाड़मेर ब्यूरो Updated Tue, 23 Jun 2026 04:13 PM IST
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सार

सीमाई क्षेत्रों में अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ ने राजस्थान की राजनीति गरमा दी है। कार्रवाई को लेकर विपक्ष और स्थानीय लोग धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगा रहे हैं।

Rajasthan News: Operation Clean Sweep Triggers Political Battle Over Demolition of Religious Structures
अतिक्रमण हटाओ अभियान पर मचा बवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजस्थान के भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे इलाकों में चल रहा ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ अब प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण हटाने के अभियान के तहत कई निर्माणों और कुछ धार्मिक स्थलों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई है। प्रशासन इसे सीमा सुरक्षा और सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कवायद बता रहा है, जबकि विपक्षी दल और स्थानीय लोग कार्रवाई में भेदभाव के आरोप लगा रहे हैं।



बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और फलौदी सहित भारत-पाक सीमा से सटे क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। अभियान के तहत सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माणों और धार्मिक स्थलों को हटाया जा रहा है। रामसर, गडरारोड, मालाणा, नाचना और नोख सहित कई क्षेत्रों में बुलडोजर कार्रवाई की गई है। प्रशासन का कहना है कि अभियान का उद्देश्य सीमा क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त बनाना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। अधिकारियों के अनुसार सारी कार्रवाई राजस्व रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर की जा रही है।
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स्थानीय लोगों ने लगाए भेदभाव के आरोप
इधर सीमावर्ती गांवों के कई लोगों ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। केलन का पार गांव के ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पुरानी मस्जिद को नोटिस देकर ध्वस्त कर दिया गया। उनका आरोप है कि विशेष समुदाय से जुड़े धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाना ही उद्देश्य है तो सभी प्रकार के अवैध निर्माणों पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। कई स्थानों पर लोगों ने प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ नाराजगी भी जताई है।
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मामले में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि सीमावर्ती जिलों में धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई में भेदभाव बरता जा रहा है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है और सरकार को संवेदनशील मामलों में संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।

नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी कार्रवाई को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए जाने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा महत्वपूर्ण है लेकिन किसी भी कार्रवाई में भेदभाव की आशंका नहीं होनी चाहिए।

सांसद और विधायक पहुंचे गांव
भारत-पाक सीमा से सटे भलगांव और दहेवा गांव में कार्रवाई के बाद बायतु विधायक हरीश चौधरी और बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी शिकायतें सुनीं। सांसद बेनीवाल ने कहा कि थार क्षेत्र की पहचान हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और सामाजिक सद्भाव से रही है। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी विवाद का समाधान संवाद और कानून सम्मत प्रक्रिया से होना चाहिए। विधायक हरीश चौधरी ने कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई पारदर्शी, न्यायसंगत और मानवीय होनी चाहिए। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी चिंताओं को उचित मंचों तक पहुंचाया जाएगा।
 
भाजपा का पलटवार
अतिक्रमण को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने दरकिनार करते हुए कहा कि प्रशासन केवल अपना कर्तव्य निभा रहा है। उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण या संदिग्ध गतिविधि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। चौधरी ने कहा कि कार्रवाई किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है बल्कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

अमित शाह के दौरे के बाद बढ़ी कार्रवाई
गौरतलब है कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा कर सीमा सुरक्षा की समीक्षा की थी। इसके बाद सीमा क्षेत्रों में अवैध कब्जों की पहचान और उन्हें हटाने की प्रक्रिया में तेजी आई है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सीमा के निकट बने अवैध ढांचे कई बार सुरक्षा चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। प्रशासन का दावा है कि अभियान पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेजों के आधार पर संचालित किया जा रहा है।

प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में भी सीमाई क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं विपक्षी दल और स्थानीय संगठन इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं। ऐसे में ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि सीमा सुरक्षा, राजनीति और सामाजिक संतुलन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।

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