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Bharatpur News: बाघों का शिकार बनेंगे घना के चीतल
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घना में घूमता चीतल
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मनीष कुमार
भरतपुर। बाघों के लिए प्राकृतिक शिकार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजस्थान के प्रमुख टाइगर रिजर्व में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान से चीतलों का स्थानांतरण किया जा रहा है। मुकुंदरा के लिए 100 और चीतल भेजने की अनुमति मिल चुकी है। बरसात के मौसम में कई माह से शिफ्टिंग रुकी हुई थी। मार्च में फिर से शिफ्टिंग की प्रक्रिया में तेज लाई जाएगी।
घना के निदेशक मानस सिंह ने बताया कि अगले महीने से चीतलों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया को फिर से तेज करने जा रहे हैं। इसके लिए आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बताया कि जंगलों में जैव विविधता को बनाए रखने के लिए अफ्रीकी बोमा तकनीक के इस्तेमाल से यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और सफल रही है। अब तक 543 चीतलों की शिफ्टिंग हो चुकी है। बताया कि घना से करीब 800 चीतलों को तीन प्रमुख टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित करने की योजना है। इनमें मुकुंदरा को 400, रामगढ़ विषधारी को 143 और कैलादेवी टाइगर रिजर्व को 250 चीतल मिलेंगे।
ये है बोमा तकनीक
निदेशक मानस सिंह ने बताया कि चीतल बेहद संवेदनशील और सतर्क वन्यजीव है। इन्हें पारंपरिक तरीकों से पकड़ना मुश्किल होता है। इसलिए अफ्रीकी बोमा तकनीक अपनाई गई है। इस के तहत जंगल में झाड़ियों और पेड़ों के बीच प्राकृतिक घेराबंदी कर बाड़े बनाए जाते हैं। इनमें चीतलों के लिए चारे की विशेष व्यवस्था की जाती है।
चीतल इन बाड़ों में प्रवेश करते हैं और बिना किसी जबरदस्ती के अंतिम घेरे तक पहुंच जाते हैं। अंतिम बाड़े में एक छोटा सा दरवाजा होता है, जहां पिंजरे वाले ट्रक को रात में खड़ा किया जाता है। ट्रक के अंदर भी चारा और झाड़ियों का इंतजाम किया जाता है, जिससे चीतल सहज रूप से उसमें प्रवेश कर जाते हैं। पूरी प्रक्रिया में किसी चीतल को चोट नहीं पहुंचती और स्थानांतरण पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
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भरतपुर। बाघों के लिए प्राकृतिक शिकार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजस्थान के प्रमुख टाइगर रिजर्व में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान से चीतलों का स्थानांतरण किया जा रहा है। मुकुंदरा के लिए 100 और चीतल भेजने की अनुमति मिल चुकी है। बरसात के मौसम में कई माह से शिफ्टिंग रुकी हुई थी। मार्च में फिर से शिफ्टिंग की प्रक्रिया में तेज लाई जाएगी।
घना के निदेशक मानस सिंह ने बताया कि अगले महीने से चीतलों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया को फिर से तेज करने जा रहे हैं। इसके लिए आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बताया कि जंगलों में जैव विविधता को बनाए रखने के लिए अफ्रीकी बोमा तकनीक के इस्तेमाल से यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और सफल रही है। अब तक 543 चीतलों की शिफ्टिंग हो चुकी है। बताया कि घना से करीब 800 चीतलों को तीन प्रमुख टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित करने की योजना है। इनमें मुकुंदरा को 400, रामगढ़ विषधारी को 143 और कैलादेवी टाइगर रिजर्व को 250 चीतल मिलेंगे।
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ये है बोमा तकनीक
निदेशक मानस सिंह ने बताया कि चीतल बेहद संवेदनशील और सतर्क वन्यजीव है। इन्हें पारंपरिक तरीकों से पकड़ना मुश्किल होता है। इसलिए अफ्रीकी बोमा तकनीक अपनाई गई है। इस के तहत जंगल में झाड़ियों और पेड़ों के बीच प्राकृतिक घेराबंदी कर बाड़े बनाए जाते हैं। इनमें चीतलों के लिए चारे की विशेष व्यवस्था की जाती है।
चीतल इन बाड़ों में प्रवेश करते हैं और बिना किसी जबरदस्ती के अंतिम घेरे तक पहुंच जाते हैं। अंतिम बाड़े में एक छोटा सा दरवाजा होता है, जहां पिंजरे वाले ट्रक को रात में खड़ा किया जाता है। ट्रक के अंदर भी चारा और झाड़ियों का इंतजाम किया जाता है, जिससे चीतल सहज रूप से उसमें प्रवेश कर जाते हैं। पूरी प्रक्रिया में किसी चीतल को चोट नहीं पहुंचती और स्थानांतरण पूरी तरह सुरक्षित रहता है।