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Bhilwara: एमजी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत मामले पर प्रशासन और सरकार ने दी सफाई, जानें क्या कहा

Sat, 11 Jul 2026 09:27 PM IST
भीलवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा Published by: भीलवाड़ा ब्यूरो Updated Sat, 11 Jul 2026 09:27 PM IST
सार

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में छह दिनों के भीतर हुई पांच महिलाओं की मौत के मामले में जिला प्रशासन और राज्य सरकार ने सफाई दी है। प्रारंभिक जांच में अस्पताल जनित संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है और विशेषज्ञ टीम भी जांच करेगी।
 

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MG Hospital Maternal Deaths
प्रसूताओं की मौत पर प्रशासन ने दी सफाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में छह दिनों के दौरान हुई महिलाओं की मौत के मामले को लेकर जिला प्रशासन और राज्य सरकार ने विस्तृत तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट की है। जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने शनिवार को अस्पताल का निरीक्षण कर ऑपरेशन थिएटर और उपचार व्यवस्थाओं की समीक्षा की तथा अस्पताल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
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ओटी की जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया?
जिला कलेक्टर ने बताया कि पीएमओ और मेडिकल कॉलेज प्राचार्य के साथ सभी पांच मामलों तथा लैब रिपोर्ट का अलग-अलग विश्लेषण किया गया है। उन्होंने कहा कि 29 जून को ओटी-2 के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे, जिनकी कल्चर रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसी दिन से ओटी-2 को एहतियातन बंद कर दिया गया। ओटी-1 की रिपोर्ट निर्धारित मानकों के अनुरूप आने से वहां नियमित कार्य जारी है तथा फ्यूमिगेशन सहित सभी आवश्यक संक्रमण नियंत्रण उपाय किए गए हैं।
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मौतों की वजह पर प्रशासन का दावा
कलेक्टर ने कहा कि प्रारंभिक मेडिकल विश्लेषण में सभी मौतों के कारण अलग-अलग चिकित्सीय जटिलताएं सामने आई हैं। इनमें एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस, मायोकार्डियल इंफार्क्शन (हार्ट अटैक), पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म, गंभीर पीआईएच, हेल्प सिंड्रोम और अन्य गंभीर स्थितियां शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शुरुआती जांच में इन मौतों को अस्पताल जनित संक्रमण से जोड़ने के प्रमाण नहीं मिले हैं। साथ ही दोबारा नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और मेडिकल गाइडलाइन की पूर्ण पालना सुनिश्चित की जा रही है। राज्य स्तरीय विशेषज्ञ टीम भी मामले की जांच करेगी।
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स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा?
इस बीच चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में हुई महिलाओं की मौतों को राज्य सरकार अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशालय से विशेषज्ञ अधिकारियों की टीम दोनों जिलों में भेजी गई है तथा सोमवार को प्रदेश के वरिष्ठ गायनिक विशेषज्ञों के साथ बैठक कर आवश्यक सुधारात्मक उपायों पर चर्चा की जाएगी।

संक्रमण से मौत नहीं, सरकार का दावा
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि भीलवाड़ा अस्पताल की प्रारंभिक रिपोर्ट में ऑपरेशन थिएटर संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। छह दिनों में हुई पांच महिलाओं की मौत अलग-अलग तिथियों पर हुई और प्रत्येक मामले में मृत्यु का कारण अलग-अलग चिकित्सीय जटिलताएं रहीं। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में ऑपरेशन थिएटर संक्रमण मृत्यु का कारण नहीं पाया गया।

पीएमओ ने पांचों मौतों की अलग-अलग वजह बताई
मंत्री ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन थिएटर का माइक्रो-बायोलॉजिकल कल्चर संक्रमण नियंत्रण की नियमित प्रक्रिया है। 29 जून 2026 को ओटी-2 का नियमित कल्चर कराया गया था। 30 जून को रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद संबंधित ओटी का उपयोग तत्काल बंद कर दिया गया और उसके बाद वहां कोई ऑपरेशन नहीं किया गया।

महात्मा गांधी चिकित्सालय के पीएमओ डॉ. अरुण गौड़ ने बताया कि पांचों मामलों में मृत्यु के कारण अलग-अलग रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि फोरी देवी प्रसूता नहीं थीं, बल्कि बच्चेदानी के ऑपरेशन के लिए भर्ती थीं और उनकी मृत्यु हृदयाघात से हुई। वहीं, शिमला गुर्जर को गंभीर स्थिति में गुलाबपुरा से रेफर किया गया था तथा उनका अस्पताल में कोई ऑपरेशन नहीं किया गया।

पांचों महिलाओं की मौत की वजह क्या रही?
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, फोरी देवी (गायने केस) की मृत्यु मायोकार्डियल इंफार्क्शन से हुई। शिमला गुर्जर की मृत्यु हाइपोवोलेमिक शॉक, तीव्र गैस्ट्रोएंटेराइटिस, सेप्टीसीमिया, आईयूडी एवं एनीमिया जैसी जटिलताओं के कारण हुई। ईशा पाण्डेय की मृत्यु पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म से हुई। दिव्या सेन की मृत्यु हेल्प सिंड्रोम एवं एक्लेम्प्सिया के कारण हुई। संगीता जीनगर की मृत्यु प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हुई।

उच्चस्तरीय समिति करेगी पूरी जांच
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि किसी भी मरीज की मृत्यु का कारण ऑपरेशन थिएटर संक्रमण नहीं पाया गया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि अस्पताल में केवल पांच नहीं, बल्कि 22 स्टेराइल सर्जिकल सेट उपलब्ध हैं और प्रतिदिन औसतन 15 से 20 सीजेरियन ऑपरेशन किए जाते हैं।


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जिला कलेक्टर के निर्देश पर पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति उपचार प्रक्रिया, दवाओं की गुणवत्ता, संक्रमण नियंत्रण, ऑपरेशन थिएटर की स्थिति तथा अन्य सभी पहलुओं की वैज्ञानिक जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक प्रशासनिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
 
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