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Dausa News: ट्रक हादसे में पैर कटने का दावा निकला फर्जी, 20.50 लाख का बीमा क्लेम कोर्ट ने किया खारिज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा Published by: दौसा ब्यूरो Updated Mon, 16 Mar 2026 11:53 AM IST
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सार

ट्रक हादसे में पैर कटने का दावा कर 20.50 लाख रुपये का बीमा क्लेम मांगने का मामला कोर्ट में फर्जी साबित हुआ। सबूत नहीं मिलने पर लेबर कोर्ट जयपुर ने याचिका खारिज कर दी और दोनों पक्षों पर 1 लाख रुपये हर्जाना लगाया।

Claims sought after fake accident, driver dies, wife and owner have to pay money
सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

न्यायालय में ट्रक हादसे में पैर कटने का हवाला देकर करीब 20.50 लाख रुपये के बीमा क्लेम की मांग करने का मामला आखिरकार अदालत में टिक नहीं पाया। लेबर कोर्ट-1 जयपुर एवं कर्मचारी क्षतिपूर्ति आयुक्त दौसा ने जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने पर याचिका खारिज कर दी।

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कोर्ट ने माना कि दुर्घटना से जुड़े दस्तावेज, नौकरी का प्रमाण और अन्य जरूरी सबूत पेश नहीं किए गए। साथ ही दुर्घटना की रिपोर्ट भी काफी देर से दर्ज कराई गई थी। इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता पक्ष और ट्रक मालिक पर 1 लाख रुपये का विशेष हर्जाना लगाया है, जिसे आर्मी वेलफेयर युद्ध हताहत कल्याण फंड में जमा करना होगा। 
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यह था पूरा मामला
दौसा के अयोध्या नगर निवासी अजय सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत लेबर कोर्ट में क्लेम याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान अजय सिंह की मौत हो गई, जिसके बाद उनकी पत्नी पुष्पा कंवर को पक्षकार बनाया गया और उन्होंने ही आगे मुकदमे की पैरवी की। याचिका में दावा किया गया था कि अजय सिंह, दौसा में रेलवे स्टेशन के सामने रहने वाले ट्रक मालिक राजेश कुमार के यहां ड्राइवर के रूप में काम करता था।

ट्रक हादसे में पैर कटने का किया था दावा
याचिका के अनुसार 11 दिसंबर 2009 को अजय सिंह सीकर से जयपुर ट्रक लेकर आ रहा था। रास्ते में ग्राम अणतपुरा मोड़ के पास नीलगाय को बचाने की कोशिश में ट्रक पेड़ से टकरा गया। इस हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया और इलाज के दौरान उसका बायां पैर घुटने के पास से काटना पड़ा। क्लेम में अजय सिंह की उम्र करीब 40 साल बताई गई और मासिक आय 9 हजार रुपये होने का दावा किया गया। इसी आधार पर ट्रक मालिक और बीमा कंपनी से 20 लाख 50 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की गई थी।

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जांच में कई बातें संदिग्ध मिलीं
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने कई ऐसे तथ्य आए, जिनसे पूरे क्लेम पर सवाल खड़े हो गए। अदालत ने पाया कि दावा झूठे और मनगढ़ंत तथ्यों पर आधारित है। कोर्ट के सामने यह भी सामने आया कि कथित दुर्घटना की रिपोर्ट करीब डेढ़ महीने बाद दर्ज कराई गई, जबकि इसके पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया गया।

हादसे से जुड़े सबूत भी पेश नहीं किए गए
सुनवाई के दौरान ट्रक को हुए नुकसान से जुड़ा कोई दस्तावेज या सबूत भी कोर्ट में पेश नहीं किया गया। बीमा कंपनी की ओर से बताया गया कि थाने के रोजनामचे में भी इस तरह की किसी दुर्घटना का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके अलावा ट्रक मालिक राजेश कुमार भी गवाही के लिए कोर्ट में पेश नहीं हुआ। वहीं प्रार्थी पक्ष यह भी साबित नहीं कर सका कि अजय सिंह वास्तव में ट्रक पर ड्राइवर के रूप में काम करता था। इन सभी तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने क्लेम को आधारहीन मानते हुए याचिका खारिज कर दी।

आर्मी वेलफेयर फंड में जमा होगा जुर्माना
कोर्ट ने इस मामले में 1 लाख रुपये का विशेष हर्जाना भी लगाया है। आदेश के अनुसार इस राशि में से 50-50 हजार रुपये अजय सिंह की पत्नी पुष्पा कंवर और ट्रक मालिक राजेश कुमार को जमा कराने होंगे। यह राशि 6 अप्रैल 2026 तक आर्मी वेलफेयर युद्ध हताहत कल्याण फंड में जमा करनी होगी। तय समय तक राशि जमा नहीं होने पर इसे राजस्व बकाया की तरह वसूला जाएगा।

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