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Dausa News: सरकारी स्कूलों में वित्तीय संकट गहराया, 1576 विद्यालयों की 3.91 करोड़ की कंपोजिट ग्रांट अटकी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा Published by: दौसा ब्यूरो Updated Wed, 11 Mar 2026 06:07 PM IST
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सार

Dausa News: दौसा जिले के 1576 सरकारी स्कूलों को मिलने वाली 3.91 करोड़ की कंपोजिट ग्रांट अब तक जारी नहीं हुई है। बजट के अभाव में मरम्मत, बिल भुगतान और शैक्षिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में करीब 20 दिन शेष हैं।

Dausa News: Financial crisis deepens in govt schools, composite grant of Rs 3.91 crore for 1576 schools stuck
दौसा मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दौसा जिले के सरकारी स्कूल इन दिनों गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं। पानी और बिजली के बिल, भवन की छोटी-मोटी मरम्मत, स्टेशनरी की व्यवस्था, शौचालयों की सफाई और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए बजट उपलब्ध नहीं होने से स्कूलों में कामकाज प्रभावित हो रहा है। इन परिस्थितियों में कई विद्यालयों के शिक्षकों को जरूरी व्यवस्थाएं बनाए रखने के लिए उधार के सहारे काम करवाना पड़ रहा है। इस स्थिति का मुख्य कारण राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से कंपोजिट ग्रांट की राशि अब तक जारी नहीं होना बताया जा रहा है। जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में लगभग 20 दिन शेष हैं और अधिकांश स्कूल इस बजट का इंतजार कर रहे हैं।

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माध्यमिक और प्रारंभिक शिक्षा के स्कूलों को भी नहीं मिला पूरा बजट
माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन संचालित 477 स्कूलों के लिए लगभग 2.77 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई जा रही है, लेकिन अभी तक इन विद्यालयों को एक रुपये की भी राशि जारी नहीं की गई है। इसके कारण कई स्कूलों में भवन मरम्मत और अन्य जरूरी कार्य लंबित पड़े हुए हैं। वहीं प्रारंभिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित 1 हजार 99 स्कूलों को भी कंपोजिट ग्रांट दी जाती है, लेकिन इनमें से केवल लगभग 50 प्रतिशत राशि ही अब तक जारी हुई है। शेष करीब 1.14 करोड़ रुपये अभी भी बकाया हैं। उल्लेखनीय है कि राजकीय विद्यालयों की सामान्य शैक्षिक, सह-शैक्षिक और भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति, पुराने उपकरणों के प्रतिस्थापन तथा विद्यालय स्वच्छता एक्शन प्लान के लिए कंपोजिट ग्रांट प्रदान की जाती है। इस राशि का उपयोग विद्यार्थियों के हित में विद्यालय की मूलभूत सुविधाओं को बनाए रखने के लिए किया जाता है।
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दीपावली पर कराए गए कार्यों का भुगतान भी लंबित
सरकार की ओर से इस सत्र में सभी विद्यालयों को दीपावली के अवसर पर रंग-रोगन, मरम्मत और लाइटिंग कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए स्कूलों को अपने विकास कोष से 15 हजार से लेकर 2 लाख रुपये तक खर्च करने की अनुमति दी गई थी। हालांकि अधिकांश विद्यालयों के पास सीमित संसाधन होने और कंपोजिट ग्रांट समय पर जारी नहीं होने के कारण इन कार्यों का भुगतान भी अब तक नहीं हो पाया है।

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रेमेडियल बजट और अन्य खर्चों की राशि भी लंबित
विद्यालयों को मिलने वाला रेमेडियल बजट भी अब तक जारी नहीं हुआ है। इस बजट का उद्देश्य कमजोर विद्यार्थियों के सीखने के अंतर को कम करना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है। इसके तहत विशेष उपचारात्मक कक्षाएं, कार्य पुस्तिकाएं और शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। पिछले वर्ष भी यह बजट मार्च के अंतिम सप्ताह में जारी हुआ था और इस बार भी विद्यालय उसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त 23 जनवरी को आयोजित मेगा पीटीएम के साथ निपुण मेले पर प्रति स्कूल लगभग 10 हजार रुपये खर्च किए गए थे। यह राशि विद्यालयों ने अपने स्तर पर खर्च की, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ है। संस्था प्रधानों को आशंका है कि कहीं इस मद में भी पूर्व की तरह बजट कटौती न कर दी जाए, जैसा कि वार्षिकोत्सव के बाद केवल 50 प्रतिशत राशि जारी होने के मामले में हुआ था।
 
पिछले सत्र की तरह इस बार भी देर से बजट मिलने की आशंका
गत शिक्षण सत्र में भी कई विद्यालयों को कंपोजिट ग्रांट सहित अन्य मदों का बजट वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में जारी हुआ था, जिसके कारण कई विकास कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाए थे। इस बार भी परिस्थितियां लगभग वैसी ही बनती दिखाई दे रही हैं और कई स्कूलों में मरम्मत सहित अन्य आवश्यक कार्य अभी अधूरे पड़े हैं। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी इंद्रा गुप्ता ने भी स्वीकार किया कि स्कूलों में खर्च के लिए ग्रांट नहीं मिलने के कारण समस्या बनी हुई है।

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