कौन हैं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा?: केजरीवाल-सिसोदिया को नहीं इन पर भरोसा, आप ने भाजपा से जोड़ दिया लिंक
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में बीए (ऑनर्स) की उपाधि प्राप्त की, जहां उन्हें दौलत राम कॉलेज द्वारा वर्ष की सर्वश्रेष्ठ सर्वांगीण छात्रा घोषित किया गया। उन्होंने 1991 में एलएलबी की उपाधि और 2004 में एलएलएम की उपाधि प्राप्त की।
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दिल्ली की उच्च न्यायालय की न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा को लेकर दिल्ली की राजनीति गलियारों में इन दिनों चर्चा तेज हो गई है। दरअसल स्वर्ण कांता शर्मा इन दिनों दिल्ली की कथित शराब नीति घोटाले पर सुनवाई कर रही हैं। इस बीच आम आदमी पार्टी ने उनकी निष्पता पर सवाल खड़े किए हैं। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और नेता मनीष सिसोदिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस केस में जज बदलने की मांग की है।
आप ने पूछा भाजपा से क्या रिश्ता?
इस पूरे विवाद से एक दिन पहले आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भाजपा नेताओं के बयानों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब मामला अभी अदालत में है और हाईकोर्ट में सुनवाई बाकी है, तब भाजपा नेताओं को कैसे पता है कि आगे क्या फैसला आने वाला है। सौरभ भारद्वाज ने सीधे तौर पर सवाल किया कि क्या भाजपा और जज के बीच कोई रिश्ता है। उन्होंने कहा कि भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा के बयान कई सवाल खड़े करते हैं।
भारद्वाज ने कहा कि वीरेंद्र सचदेवा ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक अपराधी हैं और अदालत की आगे की प्रक्रिया में उन्हें सजा जरूर मिलेगी। सवाल ये उठता है कि यह बात कैसे कही जा सकती है जब अदालत में अभी सुनवाई जारी है। उन्होंने कपिल मिश्रा के उस ट्वीट का भी जिक्र किया जिसमें लिखा गया था कि ‘पिक्चर अभी बाकी है’। सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाया कि यह पिक्चर क्या है और भाजपा नेताओं को कैसे पता है कि आगे क्या होने वाला है।
आइए जानते हैं कौन हैं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा?
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में बीए (ऑनर्स) की उपाधि प्राप्त की, जहां उन्हें दौलत राम कॉलेज द्वारा वर्ष की सर्वश्रेष्ठ सर्वांगीण छात्रा घोषित किया गया। उन्होंने 1991 में एलएलबी की उपाधि और 2004 में एलएलएम की उपाधि प्राप्त की। उनके पास विपणन प्रबंधन, विज्ञापन और जनसंपर्क में डिप्लोमा भी है। 2025 में, चार वर्षों के गहन शोध के बाद, उन्हें "न्यायिक शिक्षा के माध्यम से न्याय की संवैधानिक दृष्टि को प्राप्त करना: यूके, यूएसए, सिंगापुर और कनाडा में सर्वोत्तम प्रथाओं का तुलनात्मक अध्ययन" शीर्षक वाले अपने शोध प्रबंध के लिए पीएचडी से सम्मानित किया गया।
24 की उम्र में मजिस्ट्रेट, 35 में सत्र न्यायाधीश बनीं
जज स्वर्ण कांता शर्मा 24 वर्ष की आयु में मजिस्ट्रेट बनीं और 35 वर्ष की आयु में सत्र न्यायाधीश बन गईं। वे एक प्रशिक्षित न्यायिक मध्यस्थ हैं और उन्होंने मध्यस्थता के माध्यम से कई मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया है। उन्होंने तीस हजारी, पटियाला हाउस और रोहिणी न्यायालयों में महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के लिए गठित समितियों की अध्यक्ष के रूप में समय-समय पर कार्य किया है। दिल्ली जिला न्यायालयों में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने विशेष न्यायाधीश (सीबीआई), परिवार न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण, महिला न्यायालय और विशेष न्यायालय (महिलाओं के खिलाफ यौन अपराध) सहित विभिन्न दीवानी और आपराधिक न्यायालयों की अध्यक्षता की।
नवंबर 2019 में, उन्हें प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (उत्तर जिला) नियुक्त किया गया और मार्च 2022 में, उन्होंने राउज़ एवेन्यू न्यायालय में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) के रूप में कार्यभार संभाला।