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Delhi NCR News: एमसीडी बजट के प्रावधानों पर अमल नहीं, डीबीसी कर्मचारी परेशान
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एमसीडी बजट के प्रावधानों पर अमल नहीं, डीबीसी कर्मचारी परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमसीडी के जन स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत डीबीसी (डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर्स) कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर इन दिनों उसकी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। एमसीडी के बजट में डीबीसी कर्मचारियों को एक समान वेतन देने का प्रावधान किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पूर्ण पालन नहीं हो पा रहा है, जिससे कर्मचारियों के बीच असंतोष का माहौल है। गत दिनों एमसीडी के बजट को पास करने के दौरान स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा और नेता सदन प्रवेश वाही ने घोषणा की गई थी कि साढ़े तीन हजार से अधिक डीबीसी कर्मचारियों को समान रूप से करीब 27 हजार रुपये मासिक वेतन मिलेगा। दरअसल कुछ कर्मचारियों को करीब 27 हजार रुपये वेतन मिल रहा है, जबकि कई कर्मचारी करीब 18 हजार रुपये के आसपास वेतन पर काम कर रहे हैं। इस संबंध में अभी कोई पहल नहीं हुए हैं।
उधर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इन कर्मचारियों से सेवा विस्तार के दौरान न्यूनतम वेतन के आधार पर एफिडेविट लेने की प्रक्रिया शुरूकी है। न्यूनतम वेतन करीब 18 हजार रुपये होने के कारण कर्मचारियों को आशंका है कि इससे भविष्य में उन्हें उसी वेतन सीमा तक सीमित किया जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर डीबीसी कर्मचारी पिछले कई दिनों से एमसीडी के नेताओं व अधिकारियों के पास लगातार चक्कर लगा रहे हैं। वे अपनी समस्याएं और मांगें नेताओं के सामने रख रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हो पाई है। इससे कर्मचारियों में काफी नाराजगी और हताशा देखने को मिल रही है और वे खुद को बेहद परेशान महसूस कर रहे हैं।
कर्मचारियों के अनुसार, वे पिछले लगभग 30 वर्षों से जन स्वास्थ्य विभाग में कार्य कर रहे हैं और हर साल एक अप्रैल को उनका सेवा विस्तार बिना किसी ब्रेक के किया जाता रहा है। मगर वर्ष 2023 से पहले तक उनसे किसी प्रकार का एग्रीमेंट या एफिडेविट नहीं लिया जाता था, लेकिन 2023 में एमटीएस (मल्टी टास्किंग स्टाफ) पद बनने के बाद प्रशासन ने उनसे एग्रीमेंट लेना शुरू कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि यह एग्रीमेंट उनके मौलिक अधिकारों का हनन करता है और इससे उनमें असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमसीडी के जन स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत डीबीसी (डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर्स) कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर इन दिनों उसकी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। एमसीडी के बजट में डीबीसी कर्मचारियों को एक समान वेतन देने का प्रावधान किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पूर्ण पालन नहीं हो पा रहा है, जिससे कर्मचारियों के बीच असंतोष का माहौल है। गत दिनों एमसीडी के बजट को पास करने के दौरान स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा और नेता सदन प्रवेश वाही ने घोषणा की गई थी कि साढ़े तीन हजार से अधिक डीबीसी कर्मचारियों को समान रूप से करीब 27 हजार रुपये मासिक वेतन मिलेगा। दरअसल कुछ कर्मचारियों को करीब 27 हजार रुपये वेतन मिल रहा है, जबकि कई कर्मचारी करीब 18 हजार रुपये के आसपास वेतन पर काम कर रहे हैं। इस संबंध में अभी कोई पहल नहीं हुए हैं।
उधर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इन कर्मचारियों से सेवा विस्तार के दौरान न्यूनतम वेतन के आधार पर एफिडेविट लेने की प्रक्रिया शुरूकी है। न्यूनतम वेतन करीब 18 हजार रुपये होने के कारण कर्मचारियों को आशंका है कि इससे भविष्य में उन्हें उसी वेतन सीमा तक सीमित किया जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर डीबीसी कर्मचारी पिछले कई दिनों से एमसीडी के नेताओं व अधिकारियों के पास लगातार चक्कर लगा रहे हैं। वे अपनी समस्याएं और मांगें नेताओं के सामने रख रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हो पाई है। इससे कर्मचारियों में काफी नाराजगी और हताशा देखने को मिल रही है और वे खुद को बेहद परेशान महसूस कर रहे हैं।
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कर्मचारियों के अनुसार, वे पिछले लगभग 30 वर्षों से जन स्वास्थ्य विभाग में कार्य कर रहे हैं और हर साल एक अप्रैल को उनका सेवा विस्तार बिना किसी ब्रेक के किया जाता रहा है। मगर वर्ष 2023 से पहले तक उनसे किसी प्रकार का एग्रीमेंट या एफिडेविट नहीं लिया जाता था, लेकिन 2023 में एमटीएस (मल्टी टास्किंग स्टाफ) पद बनने के बाद प्रशासन ने उनसे एग्रीमेंट लेना शुरू कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि यह एग्रीमेंट उनके मौलिक अधिकारों का हनन करता है और इससे उनमें असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है।