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राजस्थान: रिश्वतखोर एएसआई को तीन साल का कठोर कारावास, 10 हजार जुर्माना भी
Tue, 20 Oct 2026 11:12 AM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Tue, 20 Oct 2026 11:12 AM IST
सार
जयपुर की भ्रष्टाचार निरोधक मामलों की विशेष अदालत ने श्याम नगर थाने के तत्कालीन ASI लक्ष्मीनारायण मीणा को रिश्वत मांगने के मामले में तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। परिवादी सत्यनारायण शर्मा ने 20 जुलाई 2020 को ACB में शिकायत दी थी। ब्यूरो ने 28 जुलाई को आरोपी को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा था।
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अपराध
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भ्रष्टाचार निरोधक मामलों की विशेष अदालत महानगर द्वितीय ने श्याम नगर थाने के तत्कालीन सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) लक्ष्मीनारायण मीणा को रिश्वत मांगने के मामले में तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, अदालत ने दोषी पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अंतिम रिपोर्ट लगाने के लिए मांगी थी एक लाख की घूस
विशेष लोक अभियोजक शालिनी गौतम ने न्यायालय में बताया कि वाणिज्य कर विभाग ने परिवादी सत्यनारायण शर्मा के विरुद्ध श्याम नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले की जांच तत्कालीन सहायक उपनिरीक्षक लक्ष्मीनारायण मीणा कर रहा था। उसने मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगाने के नाम पर परिवादी से एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। रिश्वत देने से मना करने पर परिवादी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी जांच अधिकारी ने मुकदमा कमजोर करने के एवज में खुद के लिए तथा थानाधिकारी के नाम पर 10,000 रुपये की रिश्वत पुनः मांगी थी।
यह भी पढ़ें: जयपुर: विभागीय जांच किए बिना सहायक अभियंता से वसूली पर उच्च न्यायालय की रोक
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कर्मचारी चयन बोर्ड और राज्य सरकार से जवाब
परिवादी सत्यनारायण शर्मा ने 20 जुलाई, 2020 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। ब्यूरो ने शिकायत का सत्यापन करवाकर 28 जुलाई, 2020 को आरोपी , लक्ष्मीनारायण मीणा को परिवादी से 10,000 रुपये की रिश्वत राशि लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था।
यह भी पढ़ें: उदयपुर पहुंचीं डिप्टी सीएम दिया कुमारी: बाल सुधार गृह का किया निरीक्षण; राहुल गांधी पर साधा निशाना
जांच पूर्ण होने पर ब्यूरो ने अदालत में आरोप पत्र पेश किया, जिसके आधार पर न्यायालय ने दोषी को सजा सुनाई। दूसरी ओर, उच्च न्यायालय ने आयुष भर्ती प्रक्रिया और बिना विभागीय जांच वसूली से जुड़े मामलों में अधिकारियों से विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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अंतिम रिपोर्ट लगाने के लिए मांगी थी एक लाख की घूस
विशेष लोक अभियोजक शालिनी गौतम ने न्यायालय में बताया कि वाणिज्य कर विभाग ने परिवादी सत्यनारायण शर्मा के विरुद्ध श्याम नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले की जांच तत्कालीन सहायक उपनिरीक्षक लक्ष्मीनारायण मीणा कर रहा था। उसने मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगाने के नाम पर परिवादी से एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। रिश्वत देने से मना करने पर परिवादी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी जांच अधिकारी ने मुकदमा कमजोर करने के एवज में खुद के लिए तथा थानाधिकारी के नाम पर 10,000 रुपये की रिश्वत पुनः मांगी थी।
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कर्मचारी चयन बोर्ड और राज्य सरकार से जवाब
परिवादी सत्यनारायण शर्मा ने 20 जुलाई, 2020 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। ब्यूरो ने शिकायत का सत्यापन करवाकर 28 जुलाई, 2020 को आरोपी , लक्ष्मीनारायण मीणा को परिवादी से 10,000 रुपये की रिश्वत राशि लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था।
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जांच पूर्ण होने पर ब्यूरो ने अदालत में आरोप पत्र पेश किया, जिसके आधार पर न्यायालय ने दोषी को सजा सुनाई। दूसरी ओर, उच्च न्यायालय ने आयुष भर्ती प्रक्रिया और बिना विभागीय जांच वसूली से जुड़े मामलों में अधिकारियों से विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।