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Rajasthan Panchayat Election : फंड अटका, चुनाव लटका; राजस्थान में पंचायत इलेक्शन पर छिड़ा सियासी घमासान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Wed, 18 Mar 2026 07:58 AM IST
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सार

राजस्थान में पंचायत चुनाव, फंड और कर्ज को लेकर सियासत तेज है। टीकाराम जूली ने सरकार पर चुनाव टालने, 1900 करोड़ फंड संकट और बढ़ते कर्ज के आरोप लगाए, वहीं जनता गैस किल्लत और महंगाई से जूझ रही है।

“Delay Elections, Raise Debt?”: Opposition Slams Government Over Panchayat Polls, Funds and Financial Crisis
पंचायत चुनाव की सांकेतिक फोटो - फोटो : AI
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विस्तार

राजस्थान की सियासत में पंचायत चुनाव, फंड और वित्तीय हालात को लेकर नया सियासी घमासान शुरू हो चुका है। एक तरफ पंचायतों के चुनावों में हो रही देरी का मुद्दा है तो दूसरी तरफ इस देरी की वजह से केंद्र से पंचायतों को मिलने वाली 1900 करोड़ रुपए की ग्रांट अटकने का खतरा भी मंडराने लगा है। विपक्ष हमलावर है। 

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पंचायत चुनावों में देरी को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग को याचिका कर्ता पूर्व विधायक संयम लोढा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट कंटेंप्ट का नोटिस दिया गया है। आयोग ने इस नोटिस के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा दिया। वहीं सरकार की तरफ से इस मामले में आयोग की चिट्ठी का अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया है। सिर्फ यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा का बयान है कि सरकार चुनावों के लिए तैयार है। 
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1900 करोड़ का फंड अटका 
इस बीच राजस्थान में अब इन मुद्दों को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो चुकी है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पंचायत चुनाव में देरी से प्रदेश के ग्रामीण विकास पर संकट मंडरा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद चुनाव की तैयारी नहीं हो रही है, जिससे केंद्र से मिलने वाले करीब 1900 करोड़ रुपये के फंड पर खतरा है। उनके अनुसार इस फंड के अटकने से स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन और मनरेगा जैसी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।  जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार चुनाव से बचने के लिए ग्रामीण विकास को दांव पर लगा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि केंद्र से फंड नहीं मिला तो राज्य इसकी भरपाई कैसे करेगा, जबकि प्रदेश पहले से कर्ज के बोझ तले दबा है।
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जूली ने कहा पहले ही केंद्र ने 8 हजार करोड़ की कटौती की
वित्तीय मुद्दों पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा। जूली के अनुसार केंद्र से मिलने वाली राशि में 8,000 करोड़ रुपये से अधिक की कटौती हुई है। विभिन्न मदों में अपेक्षा से कम फंड मिलने के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार कम समय में ही रिकॉर्ड स्तर का कर्ज ले रही है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। इसके साथ ही उन्होंने आम जनता की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में गैस की किल्लत और महंगाई से लोग परेशान हैं। कुल मिलाकर, पंचायत चुनाव, फंड संकट और बढ़ते कर्ज को लेकर राजस्थान की राजनीति में टकराव और तेज हो गया है।

'तीन साल में ही सवाल दो लाख करोड़ का कर्ज लिया'
 जूली ने सरकार के सुशासन के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘2 साल बनाम 5 साल’ की तुलना करने वाली भाजपा सरकार खुद कर्ज के मामले में रिकॉर्ड तोड़ रही है। उन्होंने कहा कि जहां पिछली कांग्रेस सरकार ने पांच वर्षों में 2.26 लाख करोड़ रुपए का कर्ज लिया, वहीं मौजूदा सरकार महज तीन साल में ही 2.22 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने वाली है। जूली ने तंज कसते हुए पूछा कि जब 5 साल का कर्ज 3 साल में लिया जा रहा है, तो सरकार किस आधार पर बेहतर वित्तीय प्रबंधन का दावा कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था (GSDP) करीब 1.13 लाख करोड़ रुपए (लगभग 6%) तक सिकुड़ना गंभीर चिंता का विषय है।

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