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जयपुर फैमिली कोर्ट का बड़ा फैसला: सोशल मीडिया पर पत्नी का व्यवहार बना मानसिक क्रूरता, पति को मिला तलाक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Fri, 01 May 2026 10:14 PM IST
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सार

Jaipur News: जयपुर फैमिली कोर्ट ने एक अहम फैसले में पत्नी द्वारा अन्य पुरुष के साथ फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने, गाली-गलौज, माता-पिता से अलग होने के दबाव और सहमति वापस लेने को मानसिक क्रूरता मानते हुए पति को तलाक की डिक्री दे दी।

Jaipur Family Court Grants Divorce, Calls Wife’s Social Media Conduct Mental Cruelty
अदालत। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

जयपुर फैमिली कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए डिजिटल युग में रिश्तों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि पत्नी द्वारा किसी अन्य पुरुष के साथ आपत्तिजनक फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर साझा करना पति के प्रति मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर कोर्ट ने पति को तलाक की डिक्री प्रदान कर दी।

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यह मामला एक दंपति के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद से जुड़ा था। पति ने अदालत में याचिका दायर कर पत्नी के व्यवहार को मानसिक उत्पीड़न बताते हुए विवाह विच्छेद की मांग की थी। पति की ओर से अधिवक्ता डी.एस. शेखावत ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि पत्नी का आचरण वैवाहिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं था और इससे पति की सामाजिक प्रतिष्ठा तथा आत्मसम्मान को ठेस पहुंची।
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अदालत ने साक्ष्यों और दस्तावेजों का गहन अध्ययन करने के बाद पाया कि पति के आरोप निराधार नहीं हैं। विशेष रूप से सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों को अदालत ने गंभीरता से लिया और कहा कि सार्वजनिक मंच पर इस प्रकार की गतिविधियां रिश्तों में विश्वास को कमजोर करती हैं।

इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी पाया कि पत्नी लगातार पति पर उसके माता-पिता से अलग रहने का दबाव बना रही थी। अदालत ने इसे भारतीय पारिवारिक व्यवस्था के संदर्भ में अनुचित बताते हुए मानसिक क्रूरता का एक रूप माना। साथ ही, पति और उसके परिवार के प्रति अपमानजनक भाषा और गाली-गलौज को भी गंभीर मानसिक उत्पीड़न माना गया।

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मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि दोनों पक्षों ने पहले आपसी सहमति से याचिका दायर की थी, लेकिन बाद में पत्नी ने बिना पर्याप्त कारण के अपनी सहमति वापस ले ली। अदालत ने इसे भी दूसरे पक्ष के साथ अन्याय और मानसिक क्रूरता के रूप में देखा।

अपने फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मानसिक क्रूरता केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवहार, शब्दों और डिजिटल गतिविधियों के माध्यम से भी उत्पन्न हो सकती है। अंततः सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने पति के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए उसे तलाक की अनुमति दे दी।

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