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राजस्थान: करवा चौथ पर कब निकलेगा चांद, कैसे करें पूजा और किस समय खोलें व्रत? जानें पूरी विधि
Mon, 26 Oct 2026 06:47 PM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक कुमार पाण्डेय
Updated Mon, 26 Oct 2026 06:47 PM IST
सार
करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखेंगी। शाम को पूजा और व्रत कथा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाएगा। जयपुर, अजमेर, अलवर, कोटा, बीकानेर, जोधपुर और उदयपुर में चंद्रोदय का समय अलग-अलग रहेगा। जानिए राजस्थान के प्रमुख शहरों में चांद निकलने का संभावित समय और पूजा की विधि।
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करवा चौथ का शुभ मुहूर्त
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
करवा चौथ के व्रत की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस साल यह पर्व गुरुवार, 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के साथ दिनभर व्रत रखेंगी। शाम को करवा माता की पूजा और व्रत कथा के बाद चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद व्रत खोला जाएगा। ऐसे में पूजा की तैयारी के साथ अपने शहर में चंद्रोदय का समय जानना भी जरूरी है। राजस्थान के अलग-अलग शहरों में चांद निकलने के समय में कुछ मिनट का अंतर रहेगा।
जयपुर से उदयपुर तक कब निकलेगा चांद?
करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार अलग-अलग होता है। उपलब्ध पंचांग-आधारित समय के अनुसार राजस्थान के प्रमुख शहरों में चांद निकलने का संभावित समय इस प्रकार है।
चंद्रोदय के समय में पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। मौसम, बादलों और स्थानीय परिस्थितियों के कारण चांद दिखाई देने में भी देरी हो सकती है।
लाल कपड़े पर स्थापित करें करवा माता की प्रतिमा
धर्माचार्य प्रोफेसर विनोद शास्त्री के अनुसार, करवा चौथ की पूजा के लिए सबसे पहले चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता पार्वती यानी करवा माता, भगवान शिव, गणेश जी और स्वामी कार्तिकेय की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। पूजा स्थल को साफ रखें और सभी आवश्यक सामग्री पहले से तैयार कर लें।
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कलश स्थापना के लिए तांबे या मिट्टी के कलश में गंगाजल, सिक्का, सुपारी, हल्दी की गांठ और अक्षत रखें। कलश के ऊपर आम के पत्ते लगाएं। इसके बाद ढक्कन में चावल रखकर घी का दीपक जलाएं। पूजा के दौरान परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग का ध्यान रखें।
करवे में जल और बायना रखकर करें पूजा
पूजा के लिए मिट्टी या धातु के दो करवे तैयार करें। एक करवे में जल, गंगाजल, सिक्का और अक्षत रखें। दूसरे करवे में बायना यानी पूड़ी, मिठाई आदि रखें। इसके बाद माता पार्वती और गणेश जी को रोली, चंदन, अक्षत, फूल और कलावा अर्पित करें।
पूजन के दौरान करवा चौथ की व्रत कथा सुनें या पढ़ें। इस अवसर पर पति की लंबी उम्र, परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली की कामना की जाती है। पूजा की विधि में क्षेत्र और परिवार की परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद खोलें व्रत
दिनभर उपवास रखने के बाद रात में चंद्रमा के निकलने का इंतजार किया जाता है। चंद्र दर्शन होने पर जल से अर्घ्य दें। इसके बाद परंपरा के अनुसार छलनी से चंद्रमा और पति का चेहरा देखकर पति के हाथों से जल ग्रहण करें और भोजन करके व्रत खोलें। फिर घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
करवा चौथ की पूजा और व्रत खोलने के समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें। चंद्रमा दिखाई देने का वास्तविक समय मौसम और आसपास की परिस्थितियों से प्रभावित हो सकता है।
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जयपुर से उदयपुर तक कब निकलेगा चांद?
करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार अलग-अलग होता है। उपलब्ध पंचांग-आधारित समय के अनुसार राजस्थान के प्रमुख शहरों में चांद निकलने का संभावित समय इस प्रकार है।
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- जयपुर: रात 8:28 बजे
- अजमेर: रात 8:34 बजे
- अलवर: रात 8:22 बजे
- कोटा: रात 8:32 बजे
- बीकानेर: रात 8:35 बजे
- जोधपुर: रात 8:41 बजे
- उदयपुर: रात 8:43 बजे
चंद्रोदय के समय में पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। मौसम, बादलों और स्थानीय परिस्थितियों के कारण चांद दिखाई देने में भी देरी हो सकती है।
लाल कपड़े पर स्थापित करें करवा माता की प्रतिमा
धर्माचार्य प्रोफेसर विनोद शास्त्री के अनुसार, करवा चौथ की पूजा के लिए सबसे पहले चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता पार्वती यानी करवा माता, भगवान शिव, गणेश जी और स्वामी कार्तिकेय की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। पूजा स्थल को साफ रखें और सभी आवश्यक सामग्री पहले से तैयार कर लें।
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कलश स्थापना के लिए तांबे या मिट्टी के कलश में गंगाजल, सिक्का, सुपारी, हल्दी की गांठ और अक्षत रखें। कलश के ऊपर आम के पत्ते लगाएं। इसके बाद ढक्कन में चावल रखकर घी का दीपक जलाएं। पूजा के दौरान परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग का ध्यान रखें।
करवे में जल और बायना रखकर करें पूजा
पूजा के लिए मिट्टी या धातु के दो करवे तैयार करें। एक करवे में जल, गंगाजल, सिक्का और अक्षत रखें। दूसरे करवे में बायना यानी पूड़ी, मिठाई आदि रखें। इसके बाद माता पार्वती और गणेश जी को रोली, चंदन, अक्षत, फूल और कलावा अर्पित करें।
पूजन के दौरान करवा चौथ की व्रत कथा सुनें या पढ़ें। इस अवसर पर पति की लंबी उम्र, परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली की कामना की जाती है। पूजा की विधि में क्षेत्र और परिवार की परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद खोलें व्रत
दिनभर उपवास रखने के बाद रात में चंद्रमा के निकलने का इंतजार किया जाता है। चंद्र दर्शन होने पर जल से अर्घ्य दें। इसके बाद परंपरा के अनुसार छलनी से चंद्रमा और पति का चेहरा देखकर पति के हाथों से जल ग्रहण करें और भोजन करके व्रत खोलें। फिर घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
करवा चौथ की पूजा और व्रत खोलने के समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें। चंद्रमा दिखाई देने का वास्तविक समय मौसम और आसपास की परिस्थितियों से प्रभावित हो सकता है।