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राजस्थान में खनन नियमों में बड़ा बदलाव; मेजर मिनरल की लीज में अब शामिल होंगे माइनर मिनरल

Fri, 21 Aug 2026 07:15 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Fri, 21 Aug 2026 07:15 AM IST
सार

राजस्थान में अब मेजर मिनरल लीज धारक उसी लीज में माइनर मिनरल को शामिल कर पाएंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत (तृतीय संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी कर दी है-

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Rajasthan Amends Mining Rules, Allows Minor Minerals to Be Added to Major Mineral Leases
राजस्थान में पत्थर की खान - फोटो : खनिज विभाग

विस्तार

राजस्थान सरकार ने खनन क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए मेजर मिनरल की माइनिंग लीज वाले क्षेत्रों में मिलने वाले माइनर मिनरल को भी उसी लीज में शामिल करने का प्रावधान किया है। इसके लिए संबंधित लीजधारक को सरकार की मंजूरी लेनी होगी और निर्धारित शुल्क एवं अन्य देय राशि का भुगतान करना होगा।
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खान एवं पेट्रोलियम विभाग ने बुधवार को राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत (तृतीय संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी की। नए नियम राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होंगे।
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30 दिन में देनी होगी जानकारी

नए प्रावधान के तहत यदि किसी मेजर मिनरल की माइनिंग लीज वाले क्षेत्र में कोई माइनर मिनरल मिलता है तो लीजधारक को इसकी जानकारी 30 दिन के भीतर संबंधित खनन अभियंता या सहायक खनन अभियंता को देनी होगी। जब तक उस माइनर मिनरल को औपचारिक रूप से लीज में शामिल नहीं किया जाता, तब तक लीजधारक को उसका खनन या बिक्री करने की अनुमति नहीं होगी।
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ऑनलाइन करना होगा आवेदन

माइनर मिनरल को अपनी लीज में शामिल कराने के लिए लीजधारक को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। संबंधित खनन अभियंता या सहायक खनन अभियंता आवेदन की जांच के बाद उसे एक महीने के भीतर निदेशालय को भेजेंगे। निदेशालय भारतीय खान ब्यूरो (IBM) से परामर्श के बाद प्रस्ताव को अगले एक महीने के भीतर राज्य सरकार के पास भेजेगा। राज्य सरकार प्रस्ताव प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर इस पर निर्णय लेगी। सरकार जरूरत पड़ने पर आवेदक से अतिरिक्त दस्तावेज या स्पष्टीकरण भी मांग सकती है। आवेदन खारिज करने की स्थिति में सरकार को इसके कारण लिखित रूप में दर्ज करने होंगे।


माइनर मिनरल जोड़ने पर बढ़ेगा वित्तीय भार

नए मिनरल को लीज में शामिल कराने पर लीजधारक को अतिरिक्त वित्तीय देनदारियां भी पूरी करनी होंगी। उसे मेजर या माइनर मिनरल में लागू जो डेड रेंट अधिक होगा, उसका भुगतान करना होगा। इसके अलावा लागू डेड रेंट की दो गुना राशि के बराबर वन टाइम प्रीमियम भी देना होगा। साथ ही रॉयल्टी, डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) और राजस्थान स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट के लिए निर्धारित अंशदान भी देना होगा। नियमों में स्पष्ट किया गया है कि एक बार जमा किया गया वन टाइम प्रीमियम बाद में रॉयल्टी या डेड रेंट में समायोजित नहीं किया जा सकेगा।

नियम 12 और 52 में भी बदलाव

संशोधन के तहत सरकार ने राजस्थान माइनर मिनरल कन्सेशन नियमों के नियम 12 और 52 के मौजूदा प्रावधानों को भी हटा दिया है। नए प्रावधान का उद्देश्य एक ही खनन क्षेत्र में मेजर मिनरल के साथ मिलने वाले माइनर मिनरल के खनन को अलग प्रक्रिया के बजाय मौजूदा लीज व्यवस्था के तहत लाने की व्यवस्था करना है। हालांकि, इसके लिए सरकारी मंजूरी और सभी निर्धारित वित्तीय देनदारियों की पूर्ति अनिवार्य होगी।
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