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राजस्थान: बाल विवाह रोकने के लिए बड़ा बदलाव, प्रधानाचार्य-पटवारी संभालेंगे निगरानी की जिम्मेदारी

Thu, 15 Oct 2026 01:40 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Thu, 15 Oct 2026 01:40 PM IST
सार

राजस्थान में बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने नई निगरानी व्यवस्था लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों, ग्राम विकास अधिकारियों और पटवारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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rajasthan child marriage prevention school principals patwaris new government order
(प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एआई

विस्तार

राजस्थान में बाल विवाह की कुप्रथा पर रोक लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव किया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार ने प्रदेश में बाल विवाह पर प्रभावी रोक लगाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों, ग्राम विकास अधिकारियों और पटवारियों को आधिकारिक तौर पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बाल विवाह की सूचना मिलने पर समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित करना है, ताकि हर मामले में पुलिस के पहुंचने का इंतजार न करना पड़े।

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नए आदेश में अधिकारियों की शक्तियों का प्रावधान

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन से मिले निर्देशों के बाद बाल विवाह रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था में बदलाव किया गया है। आदेश में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए संबंधित अधिकारियों को बाल विवाह के मामलों में जांच और आवश्यक कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई है।

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इस व्यवस्था के तहत अधिकारी अपने निर्धारित क्षेत्र में बाल विवाह से जुड़ी शिकायतों और सूचनाओं पर कार्रवाई कर सकेंगे। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों में देरी रोकना और समय रहते बाल विवाह को रोकने के लिए कदम उठाना है।

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ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में तय किया कार्यक्षेत्र

शिक्षा विभाग ने नए दिशा-निर्देशों में अधिकारियों के कार्यक्षेत्र भी तय कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल के प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक को अपने विद्यालय की ग्राम पंचायत की सीमा में बाल विवाह पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है।

वहीं, शहरी क्षेत्रों में कार्यरत प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक अपने संबंधित नगरपालिका वार्ड में निगरानी करेंगे। ग्राम विकास अधिकारी अपनी पूरी ग्राम पंचायत के क्षेत्र में बाल विवाह से जुड़े मामलों पर नजर रखेंगे, जबकि पटवारी को अपने पटवार मंडल के अंतर्गत ऐसे मामलों की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है।

आदेश का सख्ती से पालन कराने के निर्देश

शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों ने प्रदेश के सभी संभागीय संयुक्त निदेशकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश का सख्ती से और लगातार पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य बाल विवाह के मामलों की निगरानी को मजबूत करना और संबंधित क्षेत्रों में समय पर कार्रवाई करना है।

नई जिम्मेदारी से शिक्षक संगठन नाराज

सरकार के इस फैसले को लेकर कई शिक्षक संगठनों ने नाराजगी जताई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षण कर्मचारियों को बाल विवाह की निगरानी और जांच की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपने से स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। उनका मानना है कि शिक्षकों पर पहले से ही शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ है। ऐसे में नई जिम्मेदारी मिलने से पठन-पाठन और शिक्षण कार्य पर असर पड़ने की आशंका है।

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