Rajasthan: वादाखिलाफी के आरोपों के साथ डीएनटी समाजों का विधानसभा घेराव, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
Rajasthan: जयपुर में डीएनटी समाजों ने लंबित मांगों को लेकर विधानसभा घेराव किया। सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए 10 प्रतिशत आरक्षण, भूमि-आवास, मुकदमे वापस लेने सहित सात मांगें दोहराईं और आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
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राजस्थान के विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्ध-घुमंतू (डीएनटी) समाजों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मंगलवार को राजधानी जयपुर में विधानसभा घेराव किया। 53 डीएनटी समाजों के हजारों लोग बाईस गोदाम क्षेत्र में एकत्रित हुए और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य की लगभग 15 प्रतिशत आबादी, यानी करीब 1.23 करोड़ लोग डीएनटी और घुमंतू वर्ग से आते हैं, लेकिन आज भी यह वर्ग बुनियादी अधिकारों से वंचित है।
राष्ट्रीय पशुपालक संघ और डीएनटी संघर्ष समिति के नेतृत्व में यह आंदोलन पिछले एक वर्ष से लगातार चल रहा है। पाली, जोधपुर, जयपुर और भीलवाड़ा में आंदोलनों के बाद पाली जिले के बालराई में एक बड़ा महा-पड़ाव आयोजित किया गया था, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया। राष्ट्रीय पशुपालक संघ एवं डीएनटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लालजी राईका ने बताया कि बालराई आंदोलन के बाद सरकार वार्ता के लिए तैयार हुई थी।
उन्होंने बताया कि 5 दिसंबर 2025 को सरकार और डीएनटी संघर्ष समिति के बीच वार्ता हुई थी, जिसमें दस सूत्री मांगों पर चर्चा की गई। पहली मांग बालराई आंदोलन के दौरान 78 आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की थी, जिस पर सरकार ने सहमति जताई थी। इसके बावजूद 17 जनवरी को सरकार ने 9 आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर लिया और 6 लोगों को जेल भेज दिया। बाद में राजस्थान उच्च न्यायालय से जमानत मिलने पर सभी को रिहा किया गया।
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विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्ध-घुमंतू जाति परिषद के प्रदेशाध्यक्ष रतन नाथ कालबेलिया ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डीएनटी समाजों के साथ विश्वासघात किया गया है। उन्होंने कहा कि वार्ता में किए गए वादों को सरकार भूल चुकी है। दूसरे दौर की वार्ता के लिए सरकार ने दो माह का समय मांगा था, जिसकी अवधि 5 फरवरी को समाप्त हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
विधानसभा घेराव के दौरान डीएनटी समाजों ने 10 प्रतिशत अलग आरक्षण, भूमि-आवास एवं पट्टे, पंचायतों में 10 प्रतिशत आरक्षण, आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, स्वर्गीय लक्ष्मणनाथ जोगी को शहीद का दर्जा देने सहित सात प्रमुख मांगें दोहराईं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि बजट सत्र से पहले मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।