{"_id":"698b13ae5bf70c32240abfad","slug":"rajasthan-budget-2026-rajasthan-employee-organizations-made-this-appeal-to-the-government-2026-02-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rajasthan Budget 2026: 'बजट सिर्फ घोषणा न बने, आदेश भी हों', राजस्थान के कर्मचारी संगठनों की सरकार से अपील","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rajasthan Budget 2026: 'बजट सिर्फ घोषणा न बने, आदेश भी हों', राजस्थान के कर्मचारी संगठनों की सरकार से अपील
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Tue, 10 Feb 2026 04:47 PM IST
विज्ञापन
सार
Rajasthan Budget 2026: भजनलाल सरकार के तीसरे बजट से राजस्थान के कर्मचारियों को बड़ी उम्मीदें हैं। आंगनबाड़ी, मंत्रालयिक और तकनीकी कर्मचारियों ने अधूरी घोषणाओं के क्रियान्वयन, वेतन विसंगति दूर करने, भर्तियों और ग्रेच्युटी जैसी मांगों पर ठोस निर्णय की अपेक्षा जताई है।
राजस्थान बजट 2026
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
भजनलाल सरकार बुधवार को अपने कार्यकाल का तीसरा बजट पेश करने जा रही है। वित्त मंत्री दीया कुमारी विधानसभा में आय-व्यय का अनुमान रखेंगी। इस बजट से अगले वित्तीय वर्ष में राजस्थान को क्या मिलने वाला है और सरकार किन क्षेत्रों को प्राथमिकता देगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अब तक के तीन बजटों में भजनलाल सरकार 2700 से अधिक घोषणाएं कर चुका है। यानी औसतन हर बजट में 900 घोषणाएं हो रही हैं।
Trending Videos
राजस्थान में करीब सवा 11 लाख कर्मचारी और अफसर सरकार में काम कर रहे हैं। इसके अलावा बोर्ड,निगम, पंचायती राज संस्थाओं व सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में करीब 3 लाख कर्मचारी और हैं। इन्हें सरकार की रीढ़ की हड्डी भी कहा जाता है। इसके अलावा सरकारी योजनाओं को गांवों में घर-घर तक पहुंचाने वाली लाखों आंगनबाड़ी सहायिकाएं भी हैं। इन सबकी नजरें नए बजट पर हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने पिछले बजटों में उनके लिए जो घोषणाएं की हैं उनमें से ज्यादातर पर अब तक काम ही शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार को यह देखना चाहिए कि घोषणाएं सिर्फ घोषणा बन कर न रह जाए बल्कि उनके आदेश भी जारी किए जाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन
मधुबाला शर्मा
अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ एकीकृत की प्रदेशाध्यक्ष मधुबाला शर्मा ने कहा कि महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तरफ से मैं यह कहती हूं कि हमें बजट से बहुत सारी आशाएं हैं। वर्ष 2023 के बजट आया उसे मौजूदा सरकार ने कांग्रेस का बजट कह दिया। आंगनबाड़ी में 60 साल तक काम करने वाली हमारी बहनें खाली हाथ जा रही हैं। वर्ष 2024 के बजट में घोषणा सिर्फ घोषणा बन कर रह गई। इसी तरह 2025 में यही हुआ। हम यह चालते हैं कि महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सेवानिवृत्ति की जो एक मुश्त राशि मिलने वाली है उसकी सिर्फ घोषणा नहीं हो, उसके आदेश भी हों। गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के बाद गुजरात सरकार ने महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ग्रेच्युटी लागू की गई। हम यह चाहते हैं कि यहां पर भी सीएम इसे लागू करें।
मनोज सक्सेना
राजस्थान राज्य मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष मनोज सक्सेना का कहना है कि मंत्रालयिक कर्मचारियों की बहुत सी मांगें सरकार के पास विचाराधीन हैं लेकिन सरकार ने उन पर कोई एक्शन लिया नहीं है। सरकार ने पिछले बजट में मंत्रालियक कर्मचारी निदेशालय की घोषणा की थी लेकिन बड़ा खेद का विषय है कि उसे अब तक पूरा नहीं किया गया है। हमारी 3600 ग्रेड पे समाप्त कर अगली ग्रेड पे 4200 रुपए लागू करने की मांग, सचिवालय पेटर्न की मांग भी है। अब तक सरकार से उम्मीद करते हैं कि मुख्यमंत्री के स्तर पर बजट से पहले चर्चाओं में जो वादे किए हैं उनमें से कुछ तो पूरे किए जाएंगे।
पढे़ं: कल पेश होगा राजस्थान सरकार का बजट, शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने क्या उम्मीदें जताईं?
गजेंद्र राठौड़
राजस्थान राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेशअध्यक्ष गजेंद्र राठौड़ ने कहा कि इस बजट से कर्मचारियों को बहुत बड़ी आशा है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बजट में वेतन विसंगतियों को दूर करने का कोई ऐलान करेगी। जितने विभाग हैं उनमें भी नई भर्तियों का प्रावधान भी होनी चाहिए। अपने सरकार से बजट संवाद में सरकार से मांग की है कि तकनीकी कर्मचारियों की भर्तियां कई वर्षों से नहीं हुई। गवर्नेंट प्रेस में भी 1992 से भर्तियां नहीं हुई, बंद के कगार पर है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बजट में सरकार इन्हें लेकर कोई घोषणा करेगी।
देवेंद्र सिंह नरूका
हाल में राजस्थान राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री देवेंद्र सिंह नरूका ने बताया कि उनके संगठन ने सीएम ऑफिस, मुख्य सचिव और वित्त सचिव को ज्ञापन देकर वित्त विभाग के आदेश दिनांक 2 दिसंबर 2025 की विसंगति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। वस्तुत: कई बार कार्यालय से व्यक्तिगत दुर्भावना के तहत भी तबादला भी कर दिया जाता है। मजबूरन कर्मचारी को कोर्ट का संरक्षण लेना पड़ता है। लेकिन वित्त विभाग ने अपने इस आदेश में कहा है कि जो कर्मचारी जिस आहरण अधिकारी से भत्ता लेगा उसे उसी स्थान वहीं पर लागू दर से शहरी क्षतिपूर्ती भत्ता व मकान किराया भत्ता दिया जाएगा।
जबकि न्यायिक प्रकरणों में स्थानांतरण पर रोक के मामले में कर्मचारी उसी स्थान पर रहता है। ऐसे में वेतन उठाने की समस्याएं बड़ी संख्या में देखने को मिलती है। वर्तमान में इस आदेश के तहत कर्मचारियों के वेतन से वसूली की जा रही है। अत: राजस्थान राज्य कर्मचारी संघ मांग करता है कि न्यायिक प्रकरणों में वित्त विभाग को इसकी समीक्षा कर इस आदेश को वापस लेना चाहिए।