फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Rajasthan HC Probes Two Suspected Fake Bail Orders Uploaded on Official Website

राजस्थान: हाईकोर्ट का फर्जी जमानत आदेश दिखाकर जेल से छूटा आरोपी फरार, दो संदिग्ध आदेशों की जांच शुरू

Wed, 04 Nov 2026 10:08 AM IST
सौरभ भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सौरभ भट्ट Updated Wed, 04 Nov 2026 10:08 AM IST
सार

राजस्थान हाईकोर्ट की वेबसाइट पर एनडीपीएस मामले के आरोपी को नियमित जमानत देने वाले दो संदिग्ध आदेश मिले हैं। रजिस्ट्रेशन नंबर और सरकारी वकील के नाम में गड़बड़ी के बाद हाईकोर्ट प्रशासन ने जांच शुरू की है। वकील के अनुसार, आरोपी अंतरिम जमानत खत्म होने के बाद से फरार है।

विज्ञापन
Rajasthan HC Probes Two Suspected Fake Bail Orders Uploaded on Official Website
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राजस्थान हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर एक आरोपी को नियमित जमानत देने से जुड़े दो संदिग्ध न्यायिक आदेश सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। दोनों आदेशों के रजिस्ट्रेशन नंबर और अन्य जानकारियों में अंतर मिलने से उनकी प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हुए हैं। हाईकोर्ट प्रशासन ने न्यायिक शाखा से रिपोर्ट मांगी है कि ये आदेश वेबसाइट पर कैसे अपलोड हुए।

विज्ञापन

मामला पंजाब निवासी 53 वर्षीय कलविंदर सिंह पानेसर से जुड़ा है। उसे श्रीगंगानगर जिले में 8.061 किलो अफीम की कथित बरामदगी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। राजियासर थाने में उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 8/18, 25 और 29 के तहत मामला दर्ज है।

विज्ञापन

इस प्रकरण में 15 अक्टूबर और 26 अक्टूबर 2026 की तारीख वाले दो आदेश सामने आए हैं। 26 अक्टूबर के कथित आदेश में जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा का नाम है। इसमें पानेसर की नियमित जमानत अर्जी मंजूर करने और उसकी अंतरिम जमानत को नियमित जमानत में बदलने की बात कही गई है। वहीं, 15 अक्टूबर के दूसरे कथित आदेश में नियमित जमानत अर्जी को वकील की ओर से पैरवी नहीं किए जाने के आधार पर निस्तारित बताया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढें- राजस्थान: कुलपति की नियुक्ति को चुनौती देना पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर लगाया एक लाख रुपये जुर्माना

वकील बोले- अंतरिम जमानत के बाद फरार है आरोपी

पानेसर की ओर से 6 मई को अंतरिम जमानत की पैरवी करने वाले अधिवक्ता कैलाश खिलेरिया ने बताया कि उन्होंने बाद में नियमित जमानत की अर्जी भी लगाई थी, ताकि 30 दिन की अंतरिम जमानत अवधि पूरी होने के बाद उस पर सुनवाई हो सके। लेकिन अंतरिम जमानत की अवधि खत्म होने के बाद पानेसर ने सरेंडर नहीं किया। ऐसे में उन्होंने नियमित जमानत की अर्जी पर पैरवी नहीं करने का फैसला किया।

खिलेरिया के अनुसार, अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद से पानेसर फरार है। उन्होंने बताया कि इस बात से उसका बेटा मनप्रीत सिंह नाराज था, जो कनाडा से आया था। बाद में उसने एनओसी लेकर केस की फाइल उनसे ले ली।

खिलेरिया ने बताया कि इसके बाद उन्हें मामले में हुई किसी आगे की कार्रवाई की जानकारी नहीं थी। एक दिन पहले सूरतगढ़ के एक वकील ने उन्हें बताया कि हाईकोर्ट से पानेसर को नियमित जमानत मिल गई है। कथित आदेश की जानकारी मिलने पर उन्हें संदेह हुआ और उन्होंने मंगलवार को जस्टिस शर्मा की एकलपीठ के स्टाफ से इसकी पुष्टि करने के लिए संपर्क किया।

रजिस्ट्रेशन नंबर से सामने आया फर्जीवाड़ा

अधिवक्ता खिलेरिया के मुताबिक, मंगलवार को जस्टिस शर्मा खंडपीठ में बैठ रहे थे और उस दिन उनकी एकलपीठ की ऐसी कोई कॉज लिस्ट उपलब्ध नहीं थी, जिसमें यह मामला दर्ज हो। इसके बावजूद कथित जमानत आदेश मंगलवार शाम तक हाईकोर्ट की वेबसाइट पर देखने और डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध था।

मामले में रजिस्ट्रेशन नंबरों का अंतर भी संदेह बढ़ाने वाला है। हाईकोर्ट के एक कर्मचारी के अनुसार, मंगलवार शाम तक वर्ष 2026 में आपराधिक जमानत अर्जियों के रजिस्ट्रेशन नंबर 15,047 तक पहुंचे थे। जबकि 26 अक्टूबर के कथित जमानत आदेश पर 15,786 नंबर दर्ज है।

वहीं, 15 अक्टूबर के कथित आदेश पर 18,756 रजिस्ट्रेशन नंबर लिखा है। इसमें कहा गया है कि अधिवक्ता ने उस समय नियमित जमानत अर्जी पर पैरवी नहीं करने का फैसला किया, इसलिए उसे 'नॉट प्रेस्ड' आधार पर निस्तारित किया गया। यह नंबर भी वर्ष के दौरान आपराधिक जमानत अर्जियों के लिए पहुंचे नंबर से काफी अधिक बताया जा रहा है।

सरकारी वकील के नाम पर भी सवाल

अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी ने भी 26 अक्टूबर के कथित आदेश की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आदेश में सरकारी पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले सरकारी अधिवक्ता के रूप में ए. शर्मा का नाम दर्ज है, जबकि वर्तमान में इस नाम का कोई व्यक्ति हाईकोर्ट में सरकारी अधिवक्ता के पद पर कार्यरत नहीं है।

रजिस्ट्रार बोले- जांच चल रही है

हाईकोर्ट प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि न्यायिक शाखा से रिपोर्ट मांगी गई है। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि दोनों कथित आदेश आधिकारिक वेबसाइट पर कैसे अपलोड हुए। रजिस्ट्रार (न्यायिक) नरेंद्र कुमार ने बताया कि मामले में जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि उचित कार्रवाई होने के बाद ही इस पर विस्तार से टिप्पणी की जा सकेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed