एसओजी की बड़ी कार्रवाई: फर्जी एफएमजी प्रमाण पत्र से राजस्थान में इंटर्नशिप करने वाले तीन डॉक्टर गिरफ्तार
राजस्थान एसओजी ने फर्जी एफएमजी प्रमाण पत्र से मेडिकल पंजीयन और इंटर्नशिप कराने के मामले में तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया। जांच में 100 से अधिक विदेशी मेडिकल स्नातक चिन्हित।
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राजस्थान एसओजी ने विदेश से एमबीबीएस करने के बाद अनिवार्य एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा पास किए बिना राजस्थान में इंटर्नशिप और मेडिकल पंजीयन कराने के मामले में तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर कूटरचित एफएमजी स्क्रीनिंग प्रमाण पत्र के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने का आरोप है।
एसओजी के अनुसार, इस मामले में थाना एसओजी जयपुर में प्रकरण संख्या 08/2026 के तहत धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में मामला दर्ज है। जांच में सामने आया कि विदेश से एमबीबीएस करने वाले ऐसे लोगों के लिए फर्जी एफएमजी स्क्रीनिंग प्रमाण पत्र तैयार किए जा रहे थे, जो परीक्षा पास नहीं कर पाए थे। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर राजस्थान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में अस्थायी पंजीयन कराया जा रहा था।
24 घंटे में तीन डॉक्टर गिरफ्तार
एसओजी ने कार्रवाई करते हुए आशीष कुमार शर्मा, राजेंद्र कुमार यादव और नरेश रोलानिया को गिरफ्तार किया है। आशीष और राजेंद्र को 10 अगस्त तथा नरेश को 12 अगस्त को गिरफ्तार किया गया। तीनों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
एसओजी के मुताबिक, फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने और उसके आधार पर पंजीयन कराने के नेटवर्क में अब तक 100 से अधिक विदेशी मेडिकल डिग्रीधारियों की पहचान की जा चुकी है। इनमें राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार समेत कुल 30 लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
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25 से 29 लाख रुपये में बनवाया फर्जी एफएमजी प्रमाण पत्र
जांच में आरोपियों से पूछताछ के दौरान फर्जी प्रमाण पत्र के लिए लाखों रुपये देने की बात सामने आई है। आशीष शर्मा ने कथित तौर पर कजाकिस्तान से एमबीबीएस करने के बाद 2021 में भारत लौटकर एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा तीन बार दी, लेकिन पास नहीं हो सका। इसके बाद उसने कथित रूप से शुभम गुर्जर के माध्यम से 25 लाख रुपये में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया और करौली के सरकारी मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप की।
इसी तरह राजेंद्र यादव ने चीन से 2006 से 2012 के बीच एमबीबीएस किया था। एफएमजी परीक्षा आठ बार देने के बावजूद सफल नहीं होने पर उसने कथित तौर पर 29 लाख रुपये में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन किया।
नरेश रोलानिया ने कजाकिस्तान से 2021 में एमबीबीएस किया था। एफएमजी परीक्षा में तीन बार असफल होने के बाद उसने कथित तौर पर अपने रिश्तेदार नरेंद्र के माध्यम से 26 लाख रुपये में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया और उदयपुर मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप की।
बिना परीक्षा पास किए मरीजों का इलाज करने का आरोप
एसओजी के अनुसार, नरेश रोलानिया वर्तमान में कोटपूतली के एक अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में काम कर रहा था और आरोप है कि वह एफएमजी परीक्षा पास किए बिना तथा राजस्थान मेडिकल काउंसिल के पंजीयन के बगैर मरीजों का इलाज कर रहा था।
जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी एफएमजी प्रमाण पत्र तैयार करने वाले मुख्य आरोपी भानाराम माली और उसके सहयोगियों ने प्रत्येक व्यक्ति से कथित तौर पर 20 से 30 लाख रुपये तक लिए।
एसओजी ने बताया कि फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर इंटर्नशिप और पंजीयन कराने वाले 25 विदेशी मेडिकल स्नातकों, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन और मुख्य आरोपी भानाराम माली समेत कई आरोपियों को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है।